राजस्थान के सीकर शहर के बड़ा तालाब क्षेत्र में स्थित बोलता बालाजी मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। लगभग एक सदी पुराना यह मंदिर अपने अनोखे इतिहास और धार्मिक महत्व के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। स्थानीय परंपरा और इतिहास के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण एक ऐसी घटना के बाद हुआ था जिसे आज भी क्षेत्रवासी दिव्य चमत्कार के रूप में याद करते हैं।
जमीन के नीचे से गूंजी थी रहस्यमयी आवाज
यह घटना करीब 100 साल पुरानी है जब बड़ा तालाब इलाके में खुदाई का कार्य चल रहा था। उस दौरान वहां काम देख रहे बिलास तिवाड़ी को अचानक जमीन के भीतर से एक स्पष्ट आवाज सुनाई दी। उस आवाज में किसी ने उनसे कहा था कि मुझे बाहर निकालो। इस घटना से हैरान होकर बिलास तिवाड़ी ने तुरंत तत्कालीन राजा से संपर्क किया और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। राजा के निर्देश पर जब उस चिन्हित स्थान पर खुदाई आगे बढ़ाई गई, तो वहां से बालाजी महाराज की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा प्राप्त हुई।
ऐसे पड़ा बोलता बालाजी नाम
प्रतिमा मिलने के तुरंत बाद उसे उसी पवित्र स्थान पर स्थापित कर दिया गया और विधिवत पूजा-अर्चना शुरू की गई। चूंकि प्रतिमा मिलने से ठीक पहले जमीन से बोलने जैसी आवाज सुनाई दी थी, इसलिए समय के साथ यह पावन स्थल बोलता बालाजी के नाम से विख्यात हो गया। आज भी मंदिर में आने वाले भक्त इस घटना को मंदिर के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र अध्याय मानते हैं।
एक ही परिवार की चार पीढ़ियों की सेवा
इस ऐतिहासिक मंदिर की देखरेख और मुख्य पूजा व्यवस्था पिछले लगभग सौ सालों से एक ही परिवार संभाल रहा है। मंदिर के वर्तमान पुजारी पं. सुनील तिवाड़ी ने बताया कि उनके परदादा बिलास तिवाड़ी ने इस पावन स्थल की पहली बार सेवा शुरू की थी। उनके बाद सीताराम तिवाड़ी ने मंदिर की जिम्मेदारी संभाली और परंपरा को आगे बढ़ाया। इसके पश्चात राजकुमार तिवाड़ी ने मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दी और वर्तमान में पं. सुनील तिवाड़ी खुद नियमित रूप से मंदिर के दैनिक अनुष्ठान और व्यवस्थाएं देख रहे हैं। इस प्रकार एक शताब्दी से परिवार की चार पीढ़ियां लगातार बालाजी महाराज की सेवा में समर्पित हैं।
आरती का समय और धार्मिक आयोजन
मंदिर में प्रतिदिन नियमपूर्वक सुबह 9 बजे और शाम 7 बजे आरती आयोजित की जाती है। सामान्य दिनों में भी दोनों समय की आरती में करीब 40 से 50 श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसके अलावा प्रत्येक सप्ताह मंगलवार और शनिवार को दोपहर 4 बजे महिला मंडल द्वारा विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। हालांकि मंदिर के संचालन के लिए कोई औपचारिक ट्रस्ट या समिति नहीं बनाई गई है, लेकिन लगभग 150 सदस्यों का एक समर्पित भक्त मंडल सभी धार्मिक कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग देता है।
वार्षिक स्थापना महोत्सव और रोट का भोग
प्रत्येक पूर्णिमा के दिन बोलता बालाजी को विशेष रूप से रोट का भोग अर्पित किया जाता है और विशेष पूजा संपन्न होती है, जिसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर का सबसे प्रमुख और भव्य आयोजन वार्षिक स्थापना महोत्सव है, जो हर साल हनुमान जयंती के आठ दिनों के बाद शुरू होता है। दस दिनों तक चलने वाले इस लंबे धार्मिक उत्सव के दौरान विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम होते हैं, जिनमें सीकर शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।



















