हरियाणा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने पलवल और सोहना के बीच एक नए 4-लेन बाईपास के निर्माण की योजना को स्वीकृति दे दी है। चंडीगढ़ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 919 (एनएच-919) के 24 किलोमीटर लंबे खंड के नवीनीकरण और चौड़ीकरण के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दक्षिण हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों के बीच आवागमन काफी सुगम हो जाएगा।
पलवल और सोहना के बीच आवाजाही होगी आसान
वर्तमान में पलवल और सोहना को जोड़ने वाला एनएच-919 का यह 24 किलोमीटर का रास्ता केवल दो लेन का है। इस सड़क पर प्रतिदिन भारी संख्या में वाहन गुजरते हैं, जिनमें मुख्य रूप से गुरुग्राम और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले नौकरीपेशा लोग शामिल हैं। सड़क की चौड़ाई कम होने और वाहनों का दबाव अधिक होने के कारण यात्रियों को सुबह और शाम के समय भीषण ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है। इसके अलावा, इस मार्ग पर बड़े कमर्शियल और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही बनी रहती है। संकरी सड़क पर ओवरटेकिंग के दौरान हादसों का जोखिम हमेशा बना रहता है, जिसके चलते स्थानीय निवासी लंबे समय से इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग कर रहे थे।
9,700 करोड़ रुपये की व्यापक अवसंरचना योजना
एनएच-919 के इस खंड का विस्तार हरियाणा सरकार की लगभग 9,700 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सड़क अवसंरचना योजना का एक हिस्सा है। इस व्यापक मास्टरप्लांक के तहत राज्य के कई प्रमुख शहरों और कस्बों में बाईपास नेटवर्क और रिंग रोड का निर्माण किया जाना है, ताकि शहरी क्षेत्रों के भीतर यातायात के दबाव को कम किया जा सके। सरकार का मानना है कि पलवल-सोहना बाईपास के तैयार होने से केवल यातायात ही सुचारू नहीं होगा, बल्कि पलवल और इसके समीपवर्ती ग्रामीण व शहरी इलाकों में नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, उद्योगों और रोजगार के अवसरों का भी विस्तार होगा।
ज़मीन अधिग्रहण और निर्माण की तैयारी
इस बड़ी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए हरियाणा का लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) हरकत में आ गया है। विभाग ने बाईपास के प्रस्तावित रूट के दायरे में आने वाली जमीनों की नामांतरण प्रक्रिया और जमीनों की रजिस्ट्रियों को अस्थायी रूप से रोकने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम का उद्देश्य भूमि की अनधिकृत खरीद-फरोख्त को रोकना है ताकि जमीन अधिग्रहण का काम बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण की कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही सड़क निर्माण के मुख्य चरण पर काम शुरू कर दिया जाएगा।


















