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जाम देख भड़के केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी, टोल प्लाजा के गेट खुलवाकर मिनटों में साफ कराया 2 किलोमीटर लंबा जामभारत
7 सित॰ 2026, 12:03 am (24 दिन पहले)· 2

जाम देख भड़के केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी, टोल प्लाजा के गेट खुलवाकर मिनटों में साफ कराया 2 किलोमीटर लंबा जाम

केरल के त्रिशूर में पालियेक्करा टोल प्लाजा पर दो किलोमीटर लंबे जाम में फंसे लोगों को देख केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने खुद उतरकर सभी गेट खुलवा दिए, जिससे कुछ ही मिनटों में जाम पूरी तरह साफ हो गया।

केरल के त्रिशूर जिले से गुजरने वाले कोच्चि-सलेम नेशनल हाईवे पर रविवार शाम एक ऐसा नजारा दिखा जो आमतौर पर वीकेंड पर होने वाली परेशानी की मिसाल था। पालियेक्करा टोल प्लाजा की तरफ बढ़ने वाली गाड़ियां करीब दो किलोमीटर पीछे से ही रेंगने लगी थीं और घंटों की इस धीमी रफ्तार ने यात्रियों को बुरी तरह थका दिया था। ठीक उसी वक्त उस रास्ते से केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी का काफिला गुजरने वाला था।

मंत्री ने खुद उतरकर दिया गेट खोलने का आदेश

वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के तहत आगे चल रही पायलट गाड़ी ने भीड़ के बीच से रास्ता निकालते हुए सुरेश गोपी की कार को टोल बूथ तक पहुंचा दिया। आम तौर पर ऐसे मौकों पर काफिला बिना रुके आगे बढ़ जाता है, लेकिन इस बार मंत्री ने खुद अपनी गाड़ी वहीं रुकवा दी। वे कार से बाहर निकले, सीधे टोल बूथ की तरफ चल पड़े और वहां मौजूद कर्मचारियों से साफ शब्दों में कहा कि हर लेन का गेट तुरंत खोल दिया जाए। उनका निर्देश एकदम स्पष्ट था, किसी भी वाहन से एक रुपया भी टोल लिए बिना उसे आगे जाने दिया जाए।

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सुरक्षाकर्मियों ने उठाए बैरियर, मिनटों में गायब हुआ जाम

मंत्री के इस सख्त रुख को देखकर उनके साथ चल रहे सुरक्षाकर्मी भी बिना देर किए आगे आए और उन्होंने खुद टोल बैरियर उठवा दिए। इसके बाद सड़क का पूरा नजारा ही बदल गया, जो गाड़ियां घंटों से थमी हुई थीं, वे अचानक रफ्तार पकड़ने लगीं। जो जाम कई घंटों से सड़क को जकड़े हुए था, वह चंद मिनटों के भीतर पूरी तरह साफ हो गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री अपनी आगे की मंजिल एर्नाकुलम के लिए रवाना हो गए। खास बात यह है कि पालियेक्करा टोल प्लाजा सुरेश गोपी के अपने ही संसदीय क्षेत्र में आता है, और छुट्टी के दिनों या वीकेंड पर यहां भारी जाम लगना कोई नई बात नहीं है, यह पहले भी कई बार देखा जा चुका है। मंत्री ने साफ किया कि उन्होंने यह कदम किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उठाया।

कतार में खड़े लोगों का गुस्सा भांप लिया था मंत्री ने

इसके बाद एक टीवी चैनल से बातचीत में सुरेश गोपी ने बताया कि जब उनकी गाड़ी जाम को चीरते हुए आगे बढ़ रही थी, तब उन्होंने कतार में फंसे लोगों के चेहरों पर साफ नाराजगी और खीज देखी थी। उन्हें उसी वक्त एहसास हो गया था कि आम यात्री उस पल क्या झेल रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि कई लोग मेरे काफिले को देखकर नाराज थे, लेकिन मुझे संतुष्टि है कि इससे उन सबको राहत मिली।"

कानून का हवाला देकर बताई गेट खोलने की वजह

सुरेश गोपी ने अपने इस फैसले के पीछे की वजह भी विस्तार से बताई। उन्होंने कहा कि जब किसी टोल प्लाजा पर तय सीमा से ज्यादा लंबी कतार लग जाए, तो मौजूदा अदालती निर्देशों के मुताबिक गेट खोलकर वाहनों को आगे निकालना ही एकमात्र रास्ता बचता है। उन्होंने यह भी समझाया कि घंटों तक इंजन चालू हालत में खड़े रहने से न सिर्फ भारी मात्रा में ईंधन बेकार जलता है, बल्कि इससे निकलने वाला धुआं आसपास के इलाके में प्रदूषण और गर्मी दोनों को बढ़ा देता है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिर्फ टोल बूथ पर तैनात कर्मचारियों पर पूरा दोष मढ़ना ठीक नहीं है, क्योंकि तय टैक्स वसूलना उनकी ड्यूटी का ही हिस्सा है। मंत्री के मुताबिक इसका असली समाधान यह है कि वीकेंड और भारी ट्रैफिक वाले दिनों में जिला प्रशासन, स्थानीय अधिकारी और पुलिस आपस में तालमेल बिठाकर लगातार निगरानी करें, ताकि आम यात्रियों को बार-बार इस तरह की मुसीबत का सामना न करना पड़े।

सवाल-जवाब

यह घटना कब और कहां हुई?
रविवार शाम को केरल के त्रिशूर जिले में कोच्चि-सलेम नेशनल हाईवे पर पालियेक्करा टोल प्लाजा के पास।
जाम कितना लंबा था?
करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगी थी।
मंत्री ने टोल बूथ पर क्या आदेश दिया?
उन्होंने टोल बूथ पर पहुंचकर सभी गेट खोलने और बिना टोल लिए वाहनों को निकालने का निर्देश दिया।
जाम कितनी देर में साफ हुआ?
बैरियर हटते ही कुछ ही मिनटों में जाम पूरी तरह साफ हो गया।
सुरेश गोपी ने अपने फैसले की वजह क्या बताई?
उन्होंने कहा कि तय सीमा से ज्यादा कतार लगने पर अदालत के निर्देशों के मुताबिक गेट खोलना जरूरी होता है।
क्या यह टोल प्लाजा मंत्री के क्षेत्र में आता है?
हां, पालियेक्करा टोल प्लाजा सुरेश गोपी के संसदीय क्षेत्र में ही स्थित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·24 दिन पहले

यह घटना आधुनिक शहरी जीवन के उस बड़े संकट को उजागर करती है जहाँ वीआईपी संस्कृति और आम नागरिक की दैनिक असुविधा आमने-सामने आ जाती है। वीकेंड पर घंटों का यह ट्रैफिक समय की बर्बादी के साथ मानसिक तनाव और ईंधन की भारी खपत का कारण बनता है। भविष्य में यदि इस क्षेत्र में कोई दीर्घकालिक और स्थायी ढांचागत समाधान नहीं निकाला गया, तो यह जनता का बढ़ता असंतोष राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

यह घटना न केवल आम जनता की असुविधा को उजागर करती है, बल्कि बुनियादी ढांचे और शहरी प्रबंधन की कमियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जब किसी वीआईपी के हस्तक्षेप से मिनटों में जाम खुल सकता है, तो यह प्रशासनिक मशीनरी की सुस्ती को साफ दिखाता है। यदि ऐसे व्यस्त मार्गों पर समयबद्ध और स्वचालित यातायात प्रबंधन प्रणाली लागू नहीं की गई, तो यह न केवल ईंधन की बर्बादी और प्रदूषण का कारण बनेगा, बल्कि इससे कॉर्पोरेट लॉजिस्टिक्स और दैनिक आवाजाही पर भी वित्तीय असर पड़ेगा।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·24 दिन पहले

रविकाश की बात से आगे बढ़ते हुए, यह घटना सिर्फ प्रशासनिक सुस्ती नहीं बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा और स्टार-राजनेताओं की संस्कृति का भी एक दिलचस्प पहलू है। जब एक लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने सुरेश गोपी खुद जमीन पर उतरकर ऐसा कदम उठाते हैं, तो यह सीधे तौर पर जनता के बीच उनकी 'रील से रियल हीरो' वाली छवि को मजबूत करता है। आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं जनता के जनप्रतिनिधियों से अपेक्षाओं को और बढ़ाएंगी, साथ ही बुनियादी समस्याओं पर जवाबदेही तय करने का दबाव भी प्रशासनिक तंत्र पर डालेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

यह घटना प्रशासनिक सुस्ती और सड़क परिवहन अधिनियम के नियमों के बीच के टकराव को उजागर करती है। हालांकि मंत्री ने तात्कालिक राहत दी, लेकिन ऐसे मामलों में सिर्फ वीआईपी हस्तक्षेप से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। कानूनी रूप से, राष्ट्रीय राजमार्ग नियमों के तहत टोल पर तय सीमा से अधिक कतारें होने पर प्रबंधन पर जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान है। यदि स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई इस बार भी कोई स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन योजना नहीं बनाते हैं, तो इस संसदीय क्षेत्र में नागरिकों का यह संघर्ष कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर बार-बार दोहराया जाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

यह तात्कालिक राहत तो है, किंतु नीतिगत स्तर पर एनएचएआई और संबंधित रियायतग्राहियों की जवाबदेही तय किए बिना यह समस्या विकराल बनी रहेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के अनुसार, यदि किसी वाहन को दस सेकंड से अधिक इंतजार करना पड़े या कतार सौ मीटर से लंबी हो, तो टोल बिना शुल्क वसूले खोला जाना अनिवार्य है। इस विधिक प्रावधान का पालन न होना और बार-बार जाम लगना यह दर्शाता है कि संविदात्मक दायित्वों के प्रवर्तन में प्रशासनिक तंत्र विफल हो रहा है। यदि इसे केवल राजनीतिक हस्तक्षेप तक सीमित रखा गया, तो सार्वजनिक नीति की यह खामी नागरिकों को परेशान करती रहेगी।

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