अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे ब्रिटिश पाउंड दबाव में, 1.3200 के स्तर पर टिकापीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालवित्त राशिफल 25 सितंबर: 12 राशियों के लिए धन, निवेश और बजट की पूरी स्थितिसंयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू के आरोपों पर जोहरान ममदानी का कड़ा पलटवार, याद दिलाया आईसीसी का वारंटकन्या राशिफल 25 सितंबर 2026: साझेदारी से चमकेगा कारोबार और रिश्तों में घुलेगी मिठासहाफिज सईद पर सवाल सुनते ही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से कन्नी काट गए शहबाज शरीफसंयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल ने रखी हिमालयी सुरक्षा तंत्र की रूपरेखा, भारत और चीन के सहयोग को सराहासंघर्षों को मात देकर सिनेमा में बनाई मुकाम, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्या दत्ता की अनूठी दास्तानतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानम्यांमार ड्रोन मामले में अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को कोर्ट से मिली वतन वापसी की अस्थायी छूट
जमशेदपुर की दांगी मार्डी बनीं राजस्थान लीग की टॉप स्कोरर, दैनिक मजदूर की बेटी अब भारतीय फुटबॉल टीम पर साधे नजरराजस्थान
8 सित॰ 2026, 1:56 pm (17 दिन पहले)· 2

जमशेदपुर की दांगी मार्डी बनीं राजस्थान लीग की टॉप स्कोरर, दैनिक मजदूर की बेटी अब भारतीय फुटबॉल टीम पर साधे नजर

जमशेदपुर की 15 वर्षीय दांगी मार्डी जिंक फुटबॉल एकेडमी की मदद से राजस्थान लीग में टॉप स्कोरर बनकर उभरी हैं। रोजाना सुबह 4 बजे उठकर कड़े अभ्यास और नौवीं की पढ़ाई को संतुलित करने वाली दांगी का लक्ष्य भारत के लिए खेलना और भविष्य में कोच बनना है।

झारखंड के जमशेदपुर की एक 15 साल की लड़की दांगी मार्डी के जीवन में फुटबॉल केवल एक खेल नहीं बल्कि गरीबी की सीमाओं को तोड़कर आगे बढ़ने का जरिया बन चुका है। बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली दांगी आज उदयपुर स्थित जिंक फुटबॉल एकेडमी में अपने खेल कौशल को तराश रही हैं। उनके माता-पिता दैनिक मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन दांगी का इरादा मैदान में देश का प्रतिनिधित्व करने का है। अपनी लगन और कठिन अभ्यास की बदौलत वह राजस्थान लीग में सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी बनीं। भारतीय टीम की जर्सी पहनने और भविष्य में एक फुटबॉल कोच बनने का सपना देखने वाली दांगी की यह कहानी अनुशासन, संकल्प और कड़ी मेहनत की मिसाल है।

जमशेदपुर के मोहल्ले से शुरू हुआ संघर्ष भरा सफर

दांगी मार्डी का बचपन जमशेदपुर की तंग गलियों और सीमित साधनों के बीच बीता। उनके घर के पास एक खुला मैदान था जहाँ ज्यादातर लड़के ही खेल खेला करते थे। बुनियादी खेल सुविधाओं और सही मार्गदर्शन की कमी के बावजूद दांगी और उनकी सहेलियों ने मैदान में उतरने की हिम्मत दिखाई। लड़कों के साथ मिलकर अभ्यास करते हुए उन्होंने खेल की बुनियादी बातें सीखीं। उस दौर में उनके पास न तो कोई पेशेवर कोच था और न ही कोई बेहतर स्पोर्ट्स किट। उनकी खेल गतिविधियों का दायरा सिर्फ स्कूल के स्तर तक होने वाले छोटे-मोटे टूर्नामेंटों तक ही सीमित था।

ये भी पढ़ें

पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो दांगी के माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं, जिससे परिवार की गुजर-बसर होती है। घर में एक भाई भी है जो पढ़ाई के साथ-साथ फुटबॉल में रुचि रखता है। विपरीत परिस्थितियों के बीच दांगी ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। जब वह 14 साल की थीं, तब उन्हें एक फुटबॉल ट्रायल की जानकारी मिली। दांगी ने इस अवसर को हाथ से नहीं जाने दिया और ट्रायल में भाग लेकर अपना चयन पक्का किया। इसके तुरंत बाद उन्हें जिंक फुटबॉल एकेडमी के ट्रायल में भाग लेने का मौका मिला, जहाँ उनके खेल से प्रभावित होकर चयनकर्ताओं ने उन्हें एकेडमी का हिस्सा बना लिया।

जिंक फुटबॉल एकेडमी में मिला पेशेवर माहौल और अवसर

उदयपुर स्थित जिंक फुटबॉल एकेडमी में दाखिला मिलना दांगी के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। यहाँ आकर न केवल उनकी ट्रेनिंग का तरीका बदला बल्कि उनकी पूरी जीवनशैली में सकारात्मक सुधार आया। एकेडमी द्वारा उन्हें रहने के लिए हॉस्टल, संतुलित पौष्टिक भोजन, स्कूल में पढ़ाई और विश्वस्तरीय कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने के कारण जो सुविधाएं दांगी के परिवार के लिए जुटाना नामुमकिन था, वे सब उन्हें इस एकेडमी के जरिए मुफ्त में उपलब्ध कराई गईं।

एकेडमी में आने से पहले दांगी केवल अपने स्थानीय मैदान में अभ्यास करती थीं, जहाँ उन्हें बड़े मैच या प्रतिस्पर्धी मुकाबले खेलने का मौका नहीं मिलता था। लेकिन जिंक एकेडमी में दाखिले के बाद उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय टूर्नामेंटों में लगातार खेलने का अवसर मिला। उनकी टीम ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई खिताब जीते और प्रतिष्ठित यूथ लीग के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। दांगी के लगातार बेहतरीन खेल के बल पर उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कैंप के लिए भी बुलावा मिला। यद्यपि अंतिम टीम में उनका चयन नहीं हो सका, लेकिन नए माहौल में मिली इस ट्रेनिंग और अनुभव को उन्होंने अपनी सीख के रूप में स्वीकार किया।

भोर के 4 बजे से शुरू होने वाला कठोर अनुशासन

मैदान पर सफलता हासिल करने के पीछे दांगी का बेहद कड़ा और अनुशासित रूटीन है। जहाँ उनकी उम्र के ज्यादातर किशोर अपना खाली समय मनोरंजन, टीवी और स्मार्टफोन पर बिताते हैं, वहीं दांगी का पूरा दिन पढ़ाई और मैदान के बीच ही गुजरता है। उनका दिन सुबह लगभग 4:00 बजे शुरू होता है। भोर में उठने के बाद वह तुरंत अपनी ट्रेनिंग के लिए तैयार होती हैं और सुबह 5:30 बजे तक मैदान में पहुंच जाती हैं। सुबह का पहला ट्रेनिंग सेशन 7:00 बजे तक चलता है, जिसमें फिटनेस, बॉल कंट्रोल और स्टेमिना पर जोर दिया जाता है।

सुबह के सत्र के समाप्त होने के बाद दांगी नाश्ता करती हैं और स्कूल जाने की तैयारी में जुट जाती हैं। सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक वह स्कूल में पढ़ाई करती हैं। दोपहर में लौटने के बाद कुछ घंटे का विश्राम लेकर वह शाम के अभ्यास सत्र के लिए मैदान पर उतरती हैं। शाम का ट्रेनिंग सेशन 4:45 बजे शुरू होकर 6:00 बजे तक चलता है, जिसमें रणनीतिक कौशल और टीम वर्क पर काम किया जाता है। इसके बाद रात के भोजन और नियमित पढ़ाई के साथ उनका लंबा दिन समाप्त होता है।

स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण और परिवार से जुड़ाव

जिंक फुटबॉल एकेडमी का अनुशासन बहुत कड़ा है, जहाँ खिलाड़ियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के नियम तय किए गए हैं। दांगी को हफ्ते में केवल तीन दिन ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है। सप्ताह में दो दिन उन्हें 20-20 मिनट और रविवार के दिन लगभग 30 मिनट के लिए फोन दिया जाता है। इसी बेहद सीमित समय के दौरान वह जमशेदपुर में रह रहे अपने परिवार के साथ वीडियो कॉल के जरिए बात कर पाती हैं।

घर से दूर रहना किसी भी 15 साल की बच्ची के लिए आसान नहीं होता, लेकिन दांगी का ध्यान पूरी तरह अपने लक्ष्य पर टिका है। परिवार भी उनके इस सफर में उनका पूरा समर्थन करता है। उनके पिता अपनी बेटी का खेल और रहने की व्यवस्था देखने के लिए खुद एक बार एकेडमी आ चुके हैं। इसके अलावा, राजस्थान लीग के सफल समापन के बाद दांगी को एकेडमी की ओर से 10 दिनों की छुट्टी मिली थी, जिसमें उन्होंने घर जाकर अपने माता-पिता और भाई के साथ समय बिताया था।

राजस्थान लीग में टॉप स्कोरर बनकर साबित किया हुनर

अपने कड़े अभ्यास और एकेडमी के मार्गदर्शन का परिणाम दांगी के प्रदर्शन में साफ नजर आ रहा है। राजस्थान लीग में बतौर विंगर खेलते हुए दांगी ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया और पूरी प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा गोल करके टॉप स्कोरर का खिताब हासिल किया। एक समय अपने मोहल्ले में लड़कों के साथ खेलने के लिए जगह तलाशने वाली इस खिलाड़ी का राज्य स्तरीय लीग में टॉप स्कोरर बनना उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण है।

वर्तमान में नौवीं कक्षा की छात्रा दांगी अपने खेल के साथ पढ़ाई को भी पूरी गंभीरता से ले रही हैं। उनका पहला लक्ष्य भारत की सीनियर राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में जगह बनाकर देश के लिए खेलना है। इसके साथ ही, अपने खेल करियर के बाद वह एक पेशेवर फुटबॉल कोच बनने की इच्छा रखती हैं ताकि अपने जैसी अन्य प्रतिभाशाली लड़कियों को तराश सकें। गरीबी और सीमित संसाधनों को मात देकर दांगी जिस तरह आगे बढ़ रही हैं, वह देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

सवाल-जवाब

दांगी मार्डी कौन हैं और वह मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं?
दांगी मार्डी 15 साल की एक उभरती हुई फुटबॉल खिलाड़ी हैं, जो झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली हैं।
दांगी मार्डी वर्तमान में कहां ट्रेनिंग ले रही हैं?
वह राजस्थान के उदयपुर स्थित जिंक फुटबॉल एकेडमी में रहकर आवासीय ट्रेनिंग, पोषण और शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
राजस्थान लीग में दांगी मार्डी की क्या उपलब्धि रही?
दांगी ने राजस्थान लीग में एक विंगर के रूप में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे टूर्नामेंट में सबसे अधिक गोल किए और टॉप स्कोरर बनीं।
दांगी मार्डी का दैनिक रूटीन क्या है?
वह सुबह 4 बजे उठती हैं, 5:30 से 7:00 बजे तक पहला ट्रेनिंग सेशन पूरा करती हैं, फिर 8 से 2 बजे तक स्कूल जाती हैं और शाम 4:45 से 6:00 बजे तक दूसरा ट्रेनिंग सेशन करती हैं।
जिंक फुटबॉल एकेडमी में मोबाइल इस्तेमाल को लेकर क्या नियम हैं?
एकेडमी में हफ्ते में 3 दिन मोबाइल दिया जाता है, जिसमें दो दिन 20-20 मिनट और रविवार को 30 मिनट के लिए परिवार से बात करने की अनुमति होती है।
दांगी मार्डी का भविष्य का सपना क्या है?
उनका पहला लक्ष्य भारतीय सीनियर फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व करना है और उसके बाद एक फुटबॉल कोच बनना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

दांगी मार्डी की यह सफलता यह रेखांकित करती है कि देश के सुदूर और वंचित हिस्सों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बशर्ते उन्हें सही मंच मिले। जिंक फुटबॉल एकेडमी जैसे कॉर्पोरेट और संस्थागत सहयोग का यह मॉडल जमीनी स्तर की खेल प्रतिभाओं को निखारने में एक प्रभावी उत्प्रेरक साबित हो रहा है। यदि ऐसी अकादमियों का दायरा झारखंड और राजस्थान से आगे बढ़कर देश के अन्य राज्यों तक बढ़ाया जाए, तो ग्रामीण और मजदूर परिवारों से आने वाली कई अन्य बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

दांगी मार्डी की यह उपलब्धि केवल खेल के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुदूर और पिछड़े इलाकों में बालिकाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और न्यायसंगत विकास का भी एक बड़ा उदाहरण है। जब एक दैनिक मजदूर की बेटी ऐसे बड़े मंच पर पहुँचती है, तो यह समाज में लैंगिक समानता और समान अवसरों की आवश्यकता को मजबूती से सामने लाता है। खेल अकादमियों और खेल प्रणालियों में पारदर्शी चयन और संस्थागत सहयोग का यह मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक तंगी या सामाजिक बाधाएं किसी भी युवा प्रतिभा के बुनियादी अधिकारों और सपनों में बाधा न बनें।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp