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झांसी में कर्ज के बोझ तले दबे युवक ने उठाया खौफनाक कदम, पुलिस ने छत तोड़कर बचाई जानउत्तर प्रदेश
13 अक्तू॰ 2026, 10:47 am (16 दिन पहले)· 0

झांसी में कर्ज के बोझ तले दबे युवक ने उठाया खौफनाक कदम, पुलिस ने छत तोड़कर बचाई जान

उत्तर प्रदेश के झांसी में आर्थिक तंगी और महज 15 हजार रुपये के कर्ज से परेशान एक युवक ने आत्मकथा का प्रयास किया। डायल 112 की पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए घर की छत की सीमेंट शीट तोड़कर उसे बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया।

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां महज 15 हजार रुपये के कर्ज के दबाव में आकर एक युवक ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का गंभीर प्रयास किया। आर्थिक तंगी और सिर पर मंडरा रहे कर्ज के बोझ से बुरी तरह परेशान होकर युवक ने यह खौफनाक कदम उठाया। गनीमत यह रही कि समय रहते पुलिस को इस बात की भनक लग गई और आपातकालीन सेवा डायल 112 की टीम ने फौरन मौके पर पहुंचकर मुस्तैदी दिखाई, जिससे एक अनहोनी टल गई और युवक की जान बचाई जा सकी। वर्तमान में पीड़ित युवक का इलाज झांसी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहां डॉक्टरों की एक टीम उसकी देखरेख कर रही है।

बरुआसागर थाना क्षेत्र के तिलैथा खुर्द गांव की घटना

यह पूरी घटना झांसी जिले के बरुआसागर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तिलैथा खुर्द गांव की है। यहाँ रहने वाले 26 साल के मुकेश रेंकवार काफी समय से वित्तीय संकट और कर्ज के कारण भारी मानसिक तनाव में चल रहे थे। इसी तनाव के चलते उन्होंने यह घातक कदम उठाया। जब घटना के संबंध में पुलिस को सूचना मिली तो बिना एक पल गंवाए डायल 112 में तैनात उपनिरीक्षक हरिराम सिंह, पुष्पेंद्र कुमार और भूपेन्द्र यादव की सक्रिय टीम तत्काल घटनास्थल पर रवाना हो गई। पुलिस जब मौके पर पहुँची तो घर का मुख्य दरवाजा अंदर से पूरी तरह बंद था। ऐसे में हालात की गंभीरता को समझते हुए पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए घर की छत पर लगी सीमेंट की शीट को तोड़ डाला और अंदर घुसने का रास्ता बनाया। इसके बाद उन्होंने फंदे से लटके युवक को नीचे उतारा और बिना समय गंवाए उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरुआसागर पहुँचाया। वहाँ के चिकित्सकों ने उसकी नाज़ुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत झाँसी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया, जहाँ उसका उपचार जारी है।

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सिर्फ 15 हजार रुपये के कर्ज से था परेशान

मुकेश के भाई धर्मेंद्र रैकवार ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उनका भाई मात्र 15 हजार रुपये के कर्ज को लेकर बेहद चिंतित और परेशान चल रहा था। परिवार की माली हालत पहले से ही काफी खराब थी। रविवार की शाम को मुकेश ने अपनी माँ गणेशी रैकवार से पैसों की मांग की थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय होने के कारण उनकी माँ उस वक्त इतनी रकम का इंतजाम करने में पूरी तरह असमर्थ रहीं। अपनी माँ से पैसे न मिलने और सिर पर चढ़े कर्ज के कारण उपजे गहरे तनाव के चलते ही मुकेश ने यह कठोर निर्णय ले लिया।

दो साल की बेटी का पिता है पीड़ित मुकेश

मिली जानकारी के अनुसार मुकेश शादीशुदा है और उसकी एक छोटी सी दो साल की बेटी भी है जिसका नाम परी है। इस घटना के बाद से पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यदि पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई न की जाती और सही समय पर सूचना न मिलती, तो यह मामला किसी बड़ी ट्रेजेडी में बदल सकता था। डायल 112 के पुलिसकर्मियों की त्वरित और साहसिक कार्रवाई की बदौलत ही युवक को समय पर अस्पताल पहुँचाना संभव हो पाया। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है और पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है ताकि परिवार को सांत्वना दी जा सके और इस तरह के हालातों से निपटने के उपाय किए जा सकें।

सवाल-जवाब

यह घटना कहाँ पर हुई है?
यह घटना उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बरुआसागर थाना क्षेत्र के तिलैथा खुर्द गाँव में हुई है।
युवक ने यह कदम क्यों उठाया?
युवक आर्थिक तंगी और लगभग 15 हजार रुपये के कर्ज के तनाव के कारण परेशान था।
युवक की जान किसने बचाई?
डायल 112 की पुलिस टीम ने घर की छत की सीमेंट शीट तोड़कर अंदर प्रवेश किया और युवक की जान बचाई।
वर्तमान में युवक का इलाज कहाँ चल रहा है?
युवक का वर्तमान में झाँसी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
पुलिस टीम में कौन-कौन शामिल था?
डायल 112 टीम में उपनिरीक्षक हरिराम सिंह, पुष्पेंद्र कुमार और भूपेन्द्र यादव शामिल थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·15 दिन पहले

पंद्रह हजार रुपये जैसी छोटी सी रकम के लिए इतना बड़ा कदम उठा लिया, क्या कोई पड़ोसी या दोस्त मदद के लिए आगे नहीं आया?

Arjun Mehta@arjun-mehta·15 दिन पहले

पंद्रह हजार रुपये के लिए किसी की जान पर बन आएगी, सोचकर ही सिहरन होती है। पुलिस ने छत तोड़कर जिस तरह वक्त पर जान बचाई, वो गनीमत रही। पर क्या ऐसे छोटे कर्जों से निपटने के लिए कोई सरकारी मदद या संस्थागत रास्ता हमारे गांवों में है?

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। 15 हजार रुपये जैसी छोटी रकम के लिए इतनी बड़ी जान जोखिम में पड़ जाना हमारी अनौपचारिक कर्ज व्यवस्था और गांवों में आसान वित्तीय मदद के अभाव को साफ दिखाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 दिन पहले

पंद्रह हजार रुपये के लिए किसी की जान पर बन आए, सोचकर ही सिहरन होती है। शुक्र है डायल 112 की टीम ने वक्त पर छत तोड़कर बचा लिया, वरना एक छोटी सी मासूम बच्ची हमेशा के लिए पिता के प्यार से महरूम हो जाती।

Rohan Verma@rohan-verma·15 दिन पहले

सही कहा करण जी, छोटी सी रकम ने पूरा घर उजाड़ने की कगार पर ला दिया था। पुलिस की मुस्तैदी काम आ गई वरना सच में अनहोनी हो जाती।

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