अमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिलफीफा अंडर-15 विश्व कप में अफगानिस्तान से हारा भारत, अब कजाकिस्तान से टक्करकक्षा में दांव-पेंच और लंबी उड़ान से चौकन्ना हुआ वॉशिंगटन, ड्रैगन के गुप्त स्पेसप्लेन की पहली स्पष्ट झलक आई सामनेआर्मेनिया की संसद में चुनावी वादे पर भिड़े नेता, लाइव प्रसारण के दौरान चले लात-घूंसे और फटे कपड़ेफर्जी हेल्थ कैंप के बहाने ग्रामीणों के आधार जुटाकर ई-सिम रैकेट चलाने वाले दो जालसाज मथुरा से पकड़े गएचीन के रहस्यमयी स्पेसप्लेन की तस्वीर ने खोली गुप्त अंतरिक्ष अभियानों की पोल, अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट में बड़े खुलासेगुवाहाटी के ओडीआईएन एक्सपीरियंसेज ने जीता पूर्वी भारत के सर्वश्रेष्ठ नाइटक्लब का राष्ट्रीय खिताबभागलपुर के 12वीं के छात्र प्रिंस का पंचक सिलाट में अंतरराष्ट्रीय चयन, 33 देशों के मुकाबले में उतरेंगेउत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा की शहर पर्ची जारी, जानिए तारीखें और डाउनलोड प्रक्रियाऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक की चूक पर ग्राहकों को पूरा हर्जाना मिले: शीर्ष अदालत
जंतर-मंतर पर सीजेपी के धरने में पहुंचे अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, पुलिस पहरे के बीच उठाया चुनावी जवाबदेही का मुद्दादिल्ली
10 अक्तू॰ 2026, 4:11 pm (20 दिन पहले)· 0

जंतर-मंतर पर सीजेपी के धरने में पहुंचे अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, पुलिस पहरे के बीच उठाया चुनावी जवाबदेही का मुद्दा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जाने-माने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज शामिल हुए। उन्होंने भारी सुरक्षा पहरे के बीच नागरिकों के वोटिंग अधिकार और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की वकालत की।

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आयोजित एक राजनीतिक धरने में जानी-मानी शख्सियत ज्यां द्रेज की आमद ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी द्वारा आहूत इस विरोध प्रदर्शन स्थल पर चारों तरफ सुरक्षा बलों की कड़ी घेराबंदी थी। सख्त पुलिस बंदोबस्त के बावजूद अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज वहां पहुंचे और कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होकर अपनी आवाज बुलंद की। यूरोपीय मूल के होने के कारण आम लोग अक्सर उन्हें विदेशी समझ लेते हैं, जबकि वे लंबे समय से भारतीय नागरिक के रूप में देश के जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

हवाई अड्डे पर नेताओं की धरपकड़ के बाद पहुंचे धरना स्थल

शनिवार को हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए थे जब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके और उनके कई सहयोगी नेताओं को सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी हिरासत में ले लिया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की धरपकड़ के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध फीका पड़ जाएगा। इसके उलट, द्रेज ने स्वयं धरना स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया और नागरिक अधिकारों के प्रति अपना खुला समर्थन प्रकट किया।

ये भी पढ़ें

बेल्जियम की पृष्ठभूमि और भारतीय नागरिकता का सफर

यूरोप के देश बेल्जियम में पैदा हुए ज्यां द्रेज दशकों पूर्व भारत आ गए थे और यहीं के समाज का अभिन्न हिस्सा बन गए। देश के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के चलते उन्होंने वर्ष 2002 में अपनी पुरानी नागरिकता का परित्याग करते हुए औपचारिक रूप से भारत की नागरिकता अंगीकार की थी। शैक्षणिक जगत में वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स तथा रांची विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्राध्यापक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात विद्वान अमर्त्य सेन के साथ मिलकर उन्होंने कई विचारोत्तेजक और महत्वपूर्ण शोध पुस्तकें लिखी हैं। इन कृतियों में जनसामान्य से जुड़ी भुखमरी, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा की दशा और निर्धनता निवारण के उपायों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया गया है। विशेषकर झारखंड के सुदूर इलाकों में कमजोर तबकों के अधिकारों के लिए वे एक मुखर सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर लगातार काम करते रहे हैं।

नीति निर्माण और कानूनी अधिकारों में अहम भूमिका

भारत में ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करने वाली देशव्यापी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के मूल ढांचे और उसकी वैचारिक बुनियाद को तैयार करने में द्रेज का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके साथ ही वे केंद्र सरकार द्वारा गठित पूर्ववर्ती राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में बतौर सदस्य भी शामिल रहे हैं, जहां उन्होंने जनहितकारी नीतियों को शक्ल देने में मदद की थी।

प्रदर्शन का मूल उद्देश्य और द्रेज का दृष्टिकोण

जंतर-मंतर पर सीजेपी का यह जमावड़ा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से त्यागपत्र की मांग को लेकर रखा गया था। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे थे। धरना स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए द्रेज ने प्रशासन द्वारा की गई व्यापक पुलिस घेराबंदी को गैर-जरूरी बताया।

उनका कहना था कि सत्ता तंत्र को किसी किस्म की हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की चिंता नहीं है, बल्कि भय इस बात का है कि अवाम अपने मताधिकार की सुरक्षा को लेकर जागरूक हो रही है। उन्होंने साफ किया कि पाबंदियों के कारण जो नागरिक कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके, उनके हक की बात सामने रखना बेहद जरूरी है। उनकी इस भागीदारी ने दलगत विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक जवाबदेही और व्यापक नागरिक अधिकारों की राष्ट्रीय बहस में तब्दील कर दिया।

सवाल-जवाब

ज्यां द्रेज कौन हैं?
ज्यां द्रेज बेल्जियम में जन्मे जाने-माने अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने 2002 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी और वे ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के प्रारूपण से जुड़े रहे हैं।
जंतर-मंतर पर किस संगठन का प्रदर्शन चल रहा था?
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था।
सीजेपी नेताओं के साथ हवाई अड्डे पर क्या हुआ?
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य नेताओं को शनिवार को आईजीआई हवाई अड्डे पर सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया था।
सीजेपी प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या थी?
प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठा रहे थे।
ज्यां द्रेज ने अमर्त्य सेन के साथ किन विषयों पर काम किया है?
उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के साथ मिलकर गरीबी, भुखमरी, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं।
जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल के बारे में ज्यां द्रेज ने क्या कहा?
उन्होंने भारी पुलिस तैनाती को अनुचित बताया और कहा कि सरकार को सुरक्षा का नहीं, बल्कि लोगों द्वारा अपने मताधिकार पर सवाल उठाने का भय है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·19 दिन पहले

जंतर-मंतर पर ज्यां द्रेज को यूं खुलकर बोलते देखना मुझे अपने पुराने दिनों की याद दिला गया जब हम भी ऐसे ही छोटे-छोटे मुद्दों पर सड़कों पर उतर आते थे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 दिन पहले

जंतर-मंतर पर ज्यां द्रेज को यूं पुलिस के बीच खड़े देखना मुझे रांची के उन दिनों की याद दिला गया जब वे विश्वविद्यालय के गलियारों में आम आदमी के हक की बात करते थे। सत्ता चाहे जितनी पाबंदियां लगा ले, कुछ लोग अपनी आवाज दबाने नहीं देते।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·19 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है कि वे हमेशा गरीबों के हक के लिए खड़े रहे हैं, लेकिन क्या सच में भारी पुलिस पहरे के बीच ऐसा विरोध प्रदर्शन करने से कोई बड़ा बदलाव आ पाएगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

अभिजीत दीपके और बाकी नेताओं को एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया था, तो फिर पुलिस ने ज्यां द्रेज को जंतर-मंतर तक कैसे पहुँचने दिया? क्या उन्हें वहाँ आने से रोकने की कोई कोशिश ही नहीं हुई थी?

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

करण भाई, ऐसा नहीं है। कई बार पुलिस जानबूझकर एयरपोर्ट पर नेताओं को रोकती है और बाकी लोगों को शांति से आने देती है ताकि माहौल ज़्यादा न बिगड़े।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp