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कम लागत और बिना सिंचाई के डेढ़ लाख की कमाई देने वाली अरु की खेती का तरीका जानिएझारखंड
3 सित॰ 2026, 12:30 pm (22 दिन पहले)· 2

कम लागत और बिना सिंचाई के डेढ़ लाख की कमाई देने वाली अरु की खेती का तरीका जानिए

कम पानी और न्यूनतम देखभाल में पैदा होने वाली अरु की फसल किसानों के लिए बेहद किफायती साबित हो रही है। जानिए बुवाई से लेकर खुदाई और 1.5 लाख रुपये की बंपर पैदावार की पूरी प्रक्रिया।

कृषि क्षेत्र में कम लागत और कम पानी वाली फसलें किसानों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। ऐसी ही एक अनोखी फसल अरु है, जिसकी बनावट ओल जैसी होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बार-बार पानी देने या दिन-रात देखभाल करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सही तकनीक और शुरुआती तैयारी के साथ इसकी खेती करके किसान प्रति एकड़ 1.5 लाख रुपये तक का कुल मूल्य हासिल कर सकते हैं।

मिट्टी की तैयारी और बुवाई की अनोखी विधि

चारु मंडल के अनुसार, इस फसल की खेती में केवल शुरुआती चरण यानी बुवाई के दौरान ही मुख्य मेहनत लगती है। खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले जमीन में 4 फीट गहरा गड्ढा तैयार किया जाता है। बीज रोपने से लगभग 15 दिन पहले मिट्टी में चूना, गोबर खाद, केंचुआ खाद और आवश्यक कीटनाशक दवाइयां मिलाई जाती हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता में जबरदस्त इजाफा होता है।

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सिंचाई की जरूरत नहीं, जमीन से खुद सोखता है नमी

तैयार किए गए गड्ढे में बीज बोने के बाद केवल बुवाई के वक्त ही एक बार सिंचाई करनी होती है। इसके उपरांत फसल को दोबारा पानी देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यह पौधा अपनी जड़ों के सहारे जमीन की गहराई से खुद-ब-खुद नमी और पानी सोख लेता है। सिंचाई का खर्च न के बराबर होने के कारण किसानों की उत्पादन लागत काफी घट जाती है।

कंद का वजन और बंपर कमाई का गणित

अरु का एक कंद 15 से 20 किलोग्राम तक का आकार ले लेता है। यदि एक एकड़ जमीन में इसकी खेती की जाए, तो आसानी से लगभग 30 क्विंटल तक की कुल उपज प्राप्त हो जाती है। बाजार में 30 क्विंटल अरु का कुल मूल्य तकरीबन 1.5 लाख रुपये बैठता है, जिससे यह किसानों के लिए एक निश्चित और सुरक्षित रिटर्न देने वाला जरिया बन जाता है।

पत्तियों से सब्जी और फसल कटाई का संकेत

इस पौधे की केवल जड़ या कंद ही उपयोगी नहीं होता, बल्कि इसकी पत्तियों का उपयोग स्वादिष्ट सब्जी बनाने के लिए भी किया जाता है। पत्तियों का बढ़ता आकार जमीन के नीचे पल रहे कंद के विकास को दर्शाता है। जब ऊपर की पत्तियां काफी बड़ी हो जाती हैं, तब यह स्पष्ट संकेत होता है कि जमीन के अंदर कंद पूरी तरह तैयार हो चुका है और फसल की खुदाई की जा सकती है।

सवाल-जवाब

अरु की खेती में सिंचाई की कितनी आवश्यकता होती है?
अरु की खेती में केवल बुवाई के समय एक बार पानी देना पड़ता है, जिसके बाद इसे दोबारा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।
बुवाई के लिए गड्ढा कितना गहरा खोदा जाता है?
जमीन में 4 फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है और बुवाई से 15 दिन पहले मिट्टी में चूना, गोबर खाद, केंचुआ खाद और कीटनाशक मिलाए जाते हैं।
अरु के एक कंद का वजन कितना होता है?
अरु का एक कंद 15 से 20 किलोग्राम तक का हो जाता है।
एक एकड़ जमीन से अरु का कितना उत्पादन और कमाई होती है?
एक एकड़ जमीन से लगभग 30 क्विंटल अरु प्राप्त होता है, जिसका कुल बाजार मूल्य लगभग 1.5 लाख रुपये तक होता है।
अरु की फसल तैयार होने का पता कैसे चलता है?
अरु के पत्तों का आकार बड़ा होने पर यह संकेत मिलता है कि जमीन के अंदर कंद पूरी तरह तैयार हो चुका है और खुदाई की जा सकती है।
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