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करजन अदालत ने स्विटी पटेल हत्याकांड में पुलिस निरीक्षक अजय देसाई को सुनाई आजीवन कारावास की सजागुजरात
15 अग॰ 2026, 12:20 am (29 दिन पहले)· 2

करजन अदालत ने स्विटी पटेल हत्याकांड में पुलिस निरीक्षक अजय देसाई को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

गुजरात के करजन में 2021 के चर्चित स्विटी पटेल हत्याकांड पर अदालत ने फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर अजय देसाई को आजीवन कारावास और उनके सहयोगी किरीटसिंह जाडेजा को 5 साल की जेल की सजा दी है.

गुजरात के वडोदरा जिले में स्थित करजन की एक अदालत ने वर्ष 2021 के सनसनीखेज स्विटी पटेल हत्याकांड में अपना फैसला सुना दिया है. अदालत ने मामले के मुख्य अभियुक्त और स्विटी पटेल के पति, तत्कालीन पुलिस निरीक्षक अजय अमृत देसाई को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है. इसके साथ ही, हत्याकांड की साजिश में सह-अभियुक्त रहे किरीटसिंह जाडेजा को हत्या का षड्यंत्र रचने तथा साक्ष्यों को नष्ट करने में सहयोग देने का दोषी पाते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है. न्यायिक पीठ ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों दोषियों पर 2-2 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है.

न्यायिक प्रक्रिया और अदालत का अंतिम निर्णय

करजन न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त फॉरेंसिक साक्ष्य, परिस्थितिजन्य प्रमाण और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए. अदालत ने पाया कि तत्कालीन पुलिस सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बने अजय देसाई ने कानून की रक्षा का पद संभालते हुए स्वयं ही अपनी पत्नी की नृशंस हत्या की. साक्ष्यों को छुपाने और कानून से बचने के लिए उन्होंने अपने करीबी सहयोगी किरीटसिंह जाडेजा का सहारा लिया. न्यायाधीश ने तमाम साक्ष्यों के आधार पर अजय देसाई को आजीवन कारावास और किरीटसिंह जाडेजा को 5 साल जेल की सजा सुनाई, जबकि दोनों अभियुक्तों को 2-2 लाख रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया गया.

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स्विटी पटेल का पारिवारिक पृष्ठभूमि और पहला विवाह

इस दुखद घटना की शिकार बनी 37 वर्षीय स्विटी महेंद्र पटेल गुजरात के आनंद जिले के उमरेठ तालुका अंतर्गत पानसोरा गांव की रहने वाली थीं. वर्ष 2001 में स्विटी ने अपने ही गांव के निवासी हेतस महेश पांड्या के साथ प्रेम विवाह किया था. विवाह के पश्चात यह दंपत्ति अहमदाबाद चला गया, जहां उनके दो पुत्रों ऋदम और प्रणील का जन्म हुआ. हालांकि, वैवाहिक जीवन में वैचारिक मतभेदों और आपसी अनबन के कारण वर्ष 2014 में दोनों ने परस्पर सहमति से तलाक ले लिया और कानूनी रूप से अलग हो गए.

पुलिस अधिकारी संग प्रेम और 2016 में गंधर्व विवाह

तलाक के बाद वर्ष 2015 में एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान स्विटी की मुलाकात पुलिस विभाग में कार्यरत तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर अजय अमृत देसाई से हुई. समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने साथ रहने का फैसला किया. वर्ष 2016 में गुजरात के गांधीनगर स्थित रूपल गांव के एक मंदिर में स्विटी पटेल और अजय देसाई ने गंधर्व विवाह की रस्में पूरी कीं. विवाह के बाद दोनों एक साथ रहने लगे और एक नए जीवन की शुरुआत की.

बिना बताए दूसरी शादी और दांपत्य जीवन में गहराता तनाव

स्विटी के साथ गंधर्व विवाह करने के महज एक साल बाद, यानी वर्ष 2017 में अजय देसाई ने स्विटी को पूरी तरह अंधेरे में रखकर अपने ही समुदाय की एक अन्य महिला से सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार दूसरा विवाह रचा लिया. जब स्विटी को इस गुप्त शादी की जानकारी मिली, तो दोनों के बीच गंभीर विवाद शुरू हो गए. इसी तनाव भरे दौर में वर्ष 2019 में स्विटी ने एक पुत्र को जन्म दिया, जो अजय देसाई का बेटा और स्विटी की तीसरी संतान था. सार्वजनिक रूप से पत्नी का दर्जा न मिलने तथा देसाई के दूसरे विवाह को लेकर दोनों के बीच आए दिन तीखी बहस होने लगी.

5 जून 2021 का घटनाक्रम, हत्या और सबूत नष्ट करने की साजिश

लगातार बढ़ते घरेलू विवाद के बीच 5 जून 2021 को स्विटी पटेल अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गईं. शुरुआत में गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परतें खुलती चली गईं. गहन छानबीन के दौरान यह चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई कि खुद पुलिस अधिकारी अजय देसाई ने अपनी पत्नी का कत्ल कर दिया था. इसके बाद उसने अपने सहयोगी किरीटसिंह जाडेजा के साथ मिलकर मृत शरीर का निपटारा किया और सबूतों को पूरी तरह नष्ट करने की कोशिश की. अदालत ने अंततः अभियोजन द्वारा पेश किए गए ठोस साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को स्वीकार करते हुए दोनों को दोषी करार दिया और सजा सुनाई.

सवाल-जवाब

स्विटी पटेल हत्याकांड में अदालत ने मुख्य आरोपी को क्या सजा सुनाई?
करजन कोर्ट ने मुख्य आरोपी और तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर अजय देसाई को अपनी पत्नी स्विटी पटेल की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.
इस मामले में सह-आरोपी किरीटसिंह जाडेजा को कितनी सजा मिली है?
सह-आरोपी किरीटसिंह जाडेजा को हत्या की साजिश में शामिल होने और सबूत मिटाने में मदद करने के लिए 5 साल के कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई है.
स्विटी पटेल और अजय देसाई का विवाह कब और कहां हुआ था?
2015 में मुलाकात के बाद स्विटी पटेल और अजय देसाई ने 2016 में गुजरात के रूपल गांव स्थित एक मंदिर में गंधर्व विवाह की रस्में पूरी की थीं.
स्विटी पटेल की हत्या के पीछे क्या मुख्य वजह थी?
अजय देसाई द्वारा 2017 में छिपकर की गई दूसरी शादी और स्विटी पटेल को सामाजिक पहचान न देने को लेकर दोनों के बीच लगातार झगड़े हो रहे थे, जो अंततः हत्या की वजह बने.
स्विटी पटेल कब लापता हुई थीं और पुलिस को क्या पता चला?
स्विटी पटेल 5 जून 2021 को लापता हुई थीं. जांच में खुलासा हुआ कि उनके पति अजय देसाई ने उनकी हत्या कर साथी किरीटसिंह जाडेजा की मदद से शव ठिकाने लगाया था.
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टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·28 दिन पहले

यह बहुचर्चित मामला किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसा प्रतीत होता है, जो पुलिस व्यवस्था और न्याय प्रणाली के बीच के अंतर्विरोध को उजागर करता है। एक कानून रक्षक द्वारा ही अपराध को अंजाम देकर साक्ष्य छुपाने की यह दास्तान दिखाती है कि वास्तविक जीवन की अपराध कथाएं कई बार सिनेमाई कल्पनाओं को भी पीछे छोड़ देती हैं, और डिजिटल युग में ऐसे मामलों की गहन दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति भविष्य में किसी क्राइम थ्रिलर सीरीज का आधार बन सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 दिन पहले

यह मामला कानून के रखवालों द्वारा ही कानून तोड़ने की प्रवृत्ति और घरेलू रिश्तों में बढ़ते तनाव के खौफनाक अंजाम को उजागर करता है। जब एक पुलिस अधिकारी ही साक्ष्य छिपाने और हत्या जैसे जघन्य अपराध में संलिप्त पाया जाता है, तो यह संपूर्ण न्याय व्यवस्था और पुलिस विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। इस तरह के फैसलों से न केवल पीड़ित पक्ष को न्याय मिलता है, बल्कि यह भी संदेश जाता है कि पद की आड़ में कानून से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है, जहाँ फॉरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपराधियों को सजा मिली। एक पुलिस अधिकारी द्वारा अपने ही पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर साक्ष्य छिपाने की कोशिश यह रेखांकित करती है कि आंतरिक जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है। भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए विभाग के भीतर कड़े नैतिक मानकों और मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग की आवश्यकता पर बल देना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

इस मामले में एक पुलिस अधिकारी द्वारा कानून को अपने हाथ में लेकर साक्ष्य छिपाने की कोशिश करना न्याय व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती थी। अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाया जाना यह स्पष्ट करता है कि खाकी वर्दी पहनने वाला भी कानून से ऊपर नहीं है। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने इस मामले में अभूतपूर्व भूमिका निभाई, जिससे यह तय हुआ कि अपराधियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

यह फैसला इस बात का एक कड़ा संदेश है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय प्रणाली की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। मामले में फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूती ने यह साबित कर दिया कि तकनीकी और वैज्ञानिक जांच किसी भी प्रभावशाली आरोपी के रसूख को बेअसर करने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि, इस तरह के मामलों में गवाहों की सुरक्षा और त्वरित বিচার प्रक्रिया सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि समाज में कानून का डर और विश्वास दोनों कायम रहें।

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