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कश्मीर मामले पर नई दिल्ली की दो टूक, तुर्की नेतृत्व को बाहरी दखल से दूर रहने की हिदायतभारत
30 सित॰ 2026, 9:02 pm (29 दिन पहले)· 1

कश्मीर मामले पर नई दिल्ली की दो टूक, तुर्की नेतृत्व को बाहरी दखल से दूर रहने की हिदायत

संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर राग अलापने पर भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को सख्त संदेश देते हुए साफ किया कि इस अंदरूनी विषय पर किसी तीसरे पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता।

संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच पर तुर्की की ओर से कश्मीर का राग दोहराए जाने के तुरंत बाद नई दिल्ली ने बेहद सख्त कूटनीतिक रुख अख्तियार किया है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर से जुड़े विषयों पर किसी भी बाहरी मुल्क अथवा तीसरे पक्ष का कोई दखल या अधिकार क्षेत्र स्वीकार्य नहीं होगा। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के वार्षिक सत्र के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगन ने एक बार फिर इस संवेदनशील क्षेत्रीय विषय को उठाया था, जिसके जवाब में नई दिल्ली ने अपनी स्पष्ट संप्रभु सीमाएं रेखांकित की हैं।

ग्लोबल मंच पर तुर्की का पुराना रुख

तुर्की के शीर्ष नेतृत्व की ओर से बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय बैठकों में कश्मीर का उल्लेख करना कोई नई बात नहीं है। अंकारा का कूटनीतिक झुकाव लंबे अरसे से इस्लामाबाद के बेहद करीब माना जाता रहा है, और पाकिस्तानी नेतृत्व के समर्थन में तुर्की अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग कश्मीर पर बयानबाजी के लिए करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के हालिया संबोधन में भी इसी पुराने ढर्रे को आगे बढ़ाते हुए एर्दोगन ने इस मामले को उठाने की कोशिश की थी।

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नई दिल्ली का कड़ा संदेश और कूटनीतिक संदेश

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत के आंतरिक मामलों में अवांछित हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। कूटनीतिक हलकों में यह संदेश पूरी तरह साफ कर दिया गया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और किसी भी विदेशी ताकत को इस पर टिप्पणी करने अथवा मध्यस्थता जताने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। हाल के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में तुर्की के इन बयानों को पाखंड करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की मर्यादा याद दिलाई गई है, जिससे यह साफ होता है कि वैश्विक मंचों पर भारत अपनी संप्रभुता से जुड़े सवालों पर कड़ा प्रतिरोध जारी रखेगा।

सवाल-जवाब

भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को क्या जवाब दिया?
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि कश्मीर मुद्दे पर किसी भी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
तुर्की के राष्ट्रपति ने कश्मीर पर बयान कहां दिया था?
राष्ट्रपति एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के मंच पर अपने संबोधन के दौरान यह टिप्पणी की थी।
तुर्की बार-बार कश्मीर का मुद्दा क्यों उठाता है?
तुर्की को पाकिस्तान का करीबी सहयोगी माना जाता है और वह अक्सर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में पाकिस्तान के रुख के समर्थन में बयानबाजी करता रहा है।
कश्मीर मुद्दे पर भारत का आधिकारिक रुख क्या है?
भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू और कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और यह उसका पूरी तरह से आंतरिक मामला है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

एर्दोगन को बार-बार मुंह की खाने के बाद भी ऐसी हरकतें करने से क्या मिलता है?

Priya Sharma@priya-sharma·29 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा! हर बार बेइज्जती करवाने के बाद भी एर्दोगन को समझ क्यों नहीं आता?

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

विदेश मामलों में दखलअंदाजी की आदत नहीं छूटती कुछ देशों की। भारत ने बिल्कुल सही और कड़ा रुख अपनाया है, संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

बिल्कुल सही कहा करण भाई, दूसरे देशों को अपनी हद में रहना चाहिए।

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