केरल के उच्च शिक्षण संस्थानों की छात्र राजनीति में एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने त्रिपुनिथुरा स्थित गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में सभी प्रमुख पदों पर विजय प्राप्त करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल किया है। इस चुनाव परिणाम के साथ ही संस्थान में करीब 45 वर्षों से काबिज स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का लंबा वर्चस्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में मिली सफलता के तुरंत बाद दक्षिण भारत के इस वामपंथी प्रभाव वाले परिसर में एबीवीपी का यह प्रदर्शन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
त्रिपुनिथुरा कॉलेज में सभी छह प्रमुख पदों पर कब्जा
इस चुनाव में एबीवीपी के उम्मीदवारों ने एकजुट होकर मुकाबला किया और छात्र संघ के सभी छह महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा जमा लिया। चार दशकों से अधिक समय से इस कॉलेज की छात्र राजनीति पूरी तरह वामपंथी छात्र संगठनों के इर्द-गिर्द घूमती रही थी, जहां एसएफआई लगातार सत्ता में बनी हुई थी। इस बार के नतीजों ने उस सिलसिले को तोड़ दिया। इस कैंपस चुनाव के नतीजे ठीक उसी दौर में आए हैं जब त्रिपुनिथुरा क्षेत्र के राजनीतिक परिदृश्य में भी बदलाव देखा गया है। हाल ही में भाजपा ने त्रिपुनिथुरा नगरपालिका में प्रशासन संभालते हुए वहां स्थानीय निकाय स्तर पर 45 साल से चले आ रहे वामपंथी नेतृत्व को शिकस्त दी थी। नगर निकाय के बाद अब उसी क्षेत्र के कॉलेज परिसर में भी छात्र राजनीति की दिशा बदलती नजर आई है।
चुनाव में विजयी हुए सभी उम्मीदवारों का विवरण
त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी के कई उम्मीदवारों ने शीर्ष जिम्मेदारियों पर जीत दर्ज की है। छात्र संघ के प्रमुख पदों के नतीजे इस प्रकार रहे
- चेयरपर्सन और वाइस चेयरपर्सन: स्निग्धा एम हरि को छात्र संघ की नई चेयरपर्सन चुना गया है, जबकि आदित्य टीए ने वाइस चेयरपर्सन पद पर जीत हासिल की।
- जनरल सेक्रेटरी और मैगजीन एडिटर: विग्नेश भट्ट ने जनरल सेक्रेटरी के पद पर सफलता पाई, वहीं विग्नेश डी कॉलेज के मैगजीन एडिटर चुने गए।
- आर्ट्स क्लब सेक्रेटरी और काउंसलर: अंजलि टी ने आर्ट्स क्लब सेक्रेटरी का चुनाव जीता, जबकि निवेद्या केएन यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर के रूप में निर्वाचित हुईं।
- कक्षा प्रतिनिधि: छात्र संघ के प्रतिनिधि पदों में शिवानी आर को सेकंड यूजी रिप्रेजेंटेटिव और अवनी सीबी को सेकंड पीजी रिप्रेजेंटेटिव चुना गया है।
नतीजों पर प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना
संस्थान में मिली इस जीत को एबीवीपी ने एसएफआई की छात्र नीतियों के खिलाफ छात्रों का स्पष्ट जनादेश बताया है। परिषद के एक प्रतिनिधि के अनुसार, यह परिणाम साबित करता है कि छात्र समुदाय वामपंथी संगठन के कामकाज से असंतुष्ट था। प्रतिनिधि ने यह आरोप भी लगाया कि एसएफआई के नेतृत्व वाले पूर्व छात्र संघों ने संस्कृत भाषा और उसके संवर्धन के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए। एबीवीपी का मानना है कि चार दशक बाद संस्कृत कॉलेज के इस गढ़ में दर्ज की गई जीत से केरल के अन्य महाविद्यालयों में भी संगठन की इकाइयों का उत्साह बढ़ेगा और आगामी दिनों में राज्य के दूसरे परिसरों में भी उनकी चुनावी उपस्थिति मजबूत होगी।



















