अरुणाचल प्रदेश अपने रणनीतिक और दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भू-तापीय ऊर्जा (जियोथर्मल एनर्जी) की संभावनाएं तलाश रहा है। राज्य की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री दसांगलू पुल ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि सीमाई बस्तियों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
लद्दाख के पुगा वैली प्रोजेक्ट का दौरा और तकनीकी समझ
इस योजना को व्यावहारिक रूप देने के लिए अरुणाचल प्रदेश की एक उच्चस्तरीय टीम ने लद्दाख का दौरा किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री दसांगलू पुल के साथ सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज एंड हिमालयन स्टडीज (सीईएसएचएस) के निदेशक ताना तागे और विभागीय भूवैज्ञानिकों ने पुगा वैली में स्थित ओएनजीसी के भू-तापीय प्रोजेक्ट का जायजा लिया। इस दौरान टीम ने हिमालय के अत्यधिक ऊंचाई वाले और दुर्गम माहौल में भू-तापीय खोज, ड्रिलिंग तकनीकों और बिजली उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन किया। इस तकनीकी अनुभव का इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश अपनी आगामी योजनाओं में करेगा। दसांगलू पुल ने इस दौरान ओएनजीसी और उसकी कार्यकारी सहयोगी कंपनी सेरोस (SEROS) का तकनीकी जानकारी साझा करने के लिए आभार भी जताया।
तवांग के मागो-थिमबू बेल्ट में 10 से 15 मेगावाट क्षमता का अनुमान
राज्य में तवांग जिले का मागो-थिमबू क्षेत्र भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। शुरुआती आकलनों के मुताबिक इस पूरे बेल्ट में लगभग 10 से 15 मेगावाट तक बिजली उत्पादन की क्षमता मौजूद है। अरुणाचल प्रदेश में पिछले कई वर्षों से भू-तापीय संसाधनों पर लगातार अध्ययन चल रहा है। मार्च 2024 में सीईएसएचएस ने नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल इंस्टीट्यूट और आइसलैंड की संस्था जियोट्रोपी के साथ मिलकर मागो, थिमबू सहित आसपास के गर्म पानी के झरनों (हॉट स्प्रिंग्स) वाले इलाकों में मैपिंग और फील्ड सर्वे किया था।
बिजली के अलावा हीटिंग, कूलिंग और खेती में होगा इस्तेमाल
अध्ययनों में यह भी देखा जा रहा है कि इन प्राकृतिक गर्म स्रोतों का उपयोग केवल बिजली पैदा करने तक सीमित न रहे। स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस ऊर्जा का उपयोग घरों को गर्म रखने (हीटिंग), ठंडा रखने (कूलिंग) और कृषि उत्पादों को सुखाने जैसे अन्य जरूरी कार्यों में भी किया जा सकता है। इसके अलावा सीईएसएचएस और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने तवांग के मागो, थिमबू, दमटेंग और त्सेचु में सतह व उपसतह की जांच से जुड़े प्री-फीजिबिलिटी अध्ययन किए हैं। जिले के पांच प्रमुख भू-तापीय स्थलों दमटेंग, ग्रेंगखार, मागो, थिमबू और त्सेचु से जियोकेमिकल जांच के लिए नमूने भी एकत्र किए गए हैं।
“अरुणाचल प्रदेश अपार प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, और हमारा प्रयास एक स्थायी भविष्य के लिए इस क्षमता का जिम्मेदारी से दोहन करना है।”
दसांगलू पुल ने कहा कि पुगा परियोजना से मिले अनुभवों से अरुणाचल प्रदेश को विशेष रूप से दूरदराज के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा का मजबूत ढांचा विकसित करने में बड़ी मदद मिलेगी।




















