सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरझारखंड में गवार की सब्जी की बढ़ी मांग, बाजार में ₹100 किलो तक बिक रही उपजप्राथमिक बाजार में दस्तक देंगे दो नए पब्लिक इश्यू, 770 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारीहॉस्पिटैलिटी दिग्गज ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म को 6650 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मिली सेबी की हरी झंडीलाइव मैच: एशियाई खेल 2026: महिला क्रिकेट के खिताबी मुकाबले में श्रीलंका से भिड़ेगा भारत
किशाऊ बांध परियोजना से हिमाचल को हर साल मिलेंगे 1200 करोड़, सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की बड़ी सफलताहिमाचल प्रदेश
16 सित॰ 2026, 10:06 am (6 दिन पहले)· 0

किशाऊ बांध परियोजना से हिमाचल को हर साल मिलेंगे 1200 करोड़, सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की बड़ी सफलता

किशाऊ बांध परियोजना के समझौते के बाद हिमाचल प्रदेश को बिना किसी लागत के हर साल करीब 1200 करोड़ रुपये की कमाई होगी। राज्य सरकार को इसके निर्माण पर एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा।

शिमला में मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि किशाऊ बिजली परियोजना के मुकम्मल होने के बाद हिमाचल प्रदेश को सालाना लगभग 1,200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। यह समझौता उत्तर भारत के कई राज्यों के बीच लंबे समय से अटके जल बंटवारे और ऊर्जा उत्पादन के विवादों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है। इस पूरी व्यवस्था से पहाड़ी राज्य की वित्तीय स्थिति को एक नया संबल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

दिल्ली में हुआ ऐतिहासिक समझौता

नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान किशाऊ परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच औपचारिक करार पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते में छह राज्यों के बीच जल बंटवारे और बिजली उत्पादन को लेकर सहमति बनी है, जो पिछले छह दशकों से विभिन्न कारणों से लंबित पड़ी थी। इस बहुउद्देशीय परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल बिजली की आपूर्ति सुगम होगी बल्कि संपूर्ण उत्तर भारत में जल संसाधनों के प्रबंधन का तौर-तरीका भी पूरी तरह बदल जाएगा।

ये भी पढ़ें

हिमाचल प्रदेश को मिला वित्तीय लाभ और शून्य लागत

इस पूरे समझौते का सबसे खास पहलू यह है कि हिमाचल प्रदेश को इस विशाल परियोजना के निर्माण के लिए अपनी तरफ से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। राज्य का करीब 800 करोड़ रुपये का हिस्सा वे अन्य लाभार्थी राज्य वहन करेंगे जो इस परियोजना के पानी का सीधा इस्तेमाल करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले से ही राज्य के वित्तीय हितों को लेकर अड़े हुए थे और उन्होंने निर्माण कार्यों पर किसी भी तरह का वित्तीय बोझ उठाने से साफ इंकार कर दिया था। इसे सुक्खू सरकार की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत माना जा रहा है।

बिना किसी उत्पादन लागत के मिलेगी 211 मेगावाट बिजली

नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस ऐतिहासिक समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को किशाऊ बांध से कुल उत्पादित होने वाली बिजली में से 211 मेगावाट बिजली बिल्कुल मुफ्त और बिना किसी उत्पादन लागत के मिलेगी। बिजली तैयार करने में आने वाला खरबों और हजारों करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च अब वे राज्य उठाएंगे जो इस बांध के पानी का उपभोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के जल संसाधनों को हमेशा से 'बहता हुआ सोना' कहा जाता रहा है और अब राज्य सरकार इन अमूल्य जल संसाधनों का वास्तविक आर्थिक लाभ उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध होकर आगे बढ़ रही है।

परियोजना का भौगोलिक दायरा और तकनीकी विवरण

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय किशाऊ बांध परियोजना यमुना बेसिन के अंतर्गत टोंस नदी पर बनाई जानी है। टोंस नदी यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है। इस पूरी परियोजना की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 660 मेगावाट होगी। इस परियोजना के निर्माण से हिमाचल प्रदेश के आठ गांवों के 2,092 लोग और उत्तराखंड के नौ गांवों के 3,406 लोग प्रभावित होंगे। इस विशाल बांध के कारण हिमाचल प्रदेश में लगभग 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 1,452 हेक्टेयर यानी कुल मिलाकर 2,950 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से हिमाचल को बिना निवेश के भारी मुनाफा मिलेगा।

सवाल-जवाब

किशाऊ बांध परियोजना के पूरा होने पर हिमाचल प्रदेश को हर साल कितनी कमाई होगी?
हिमाचल प्रदेश को इस परियोजना के पूरा होने के बाद हर साल लगभग 1,200 करोड़ रुपये की कमाई होगी।
इस समझौते पर किन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए हैं?
इस समझौते पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए हैं।
किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण पर हिमाचल प्रदेश कितना पैसा खर्च करेगा?
हिमाचल प्रदेश इस परियोजना के निर्माण के लिए एक भी रुपया खर्च नहीं करेगा, और इसका 800 करोड़ रुपये का हिस्सा लाभार्थी राज्य वहन करेंगे।
हिमाचल प्रदेश को इस परियोजना से कितनी मुफ्त बिजली मिलेगी?
राज्य को किशाऊ बांध से पैदा होने वाली 211 मेगावाट बिजली बिना किसी उत्पादन लागत के मुफ्त मिलेगी।
किशाऊ बांध परियोजना किस नदी पर प्रस्तावित है?
यह परियोजना यमुना बेसिन में टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है।
इस परियोजना के निर्माण से कुल कितने क्षेत्र में पानी भर जाएगा?
इस परियोजना के कारण हिमाचल प्रदेश में 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 1,452 हेक्टेयर यानी कुल 2,950 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·5 दिन पहले

किशाऊ बांध जैसी बड़े पैमाने की बहुउद्देशीय परियोजनाओं की सफलता केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक के एकीकरण पर भी निर्भर करती है। छह राज्यों के बीच 660 मेगावाट बिजली और जल संसाधनों के पारदर्शी वितरण के लिए स्मार्ट ग्रिड तकनीक, आईओटी आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग और एआई-संचालित डेटा एनालिटिक्स की अत्यंत आवश्यकता होगी। डिजिटल ट्विन और स्वचालित संसाधन प्रणालियों को अपनाकर न केवल बिजली के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है, बल्कि अंतर-राज्यीय संसाधनों का सटीक और निर्बाध प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह समझौता पहाड़ी राज्यों के लिए बिना वित्तीय जोखिम के परिसंपत्ति निर्माण और राजस्व जुटाने का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत करता है। कर्ज और वित्तीय तंगी से जूझते राज्यों के लिए बिना किसी पूंजीगत व्यय (CapEx) और परिचालन लागत के 211 मेगावाट बिजली के साथ 1200 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व हासिल करना एक बड़ा राजकोषीय संबल है। छह दशकों से अटके इस विवाद का निपटारा अंतर-राज्यीय जल सहयोग की दिशा में नई उम्मीद जगाता है और देश में लंबित पड़ी अन्य अंतर-राज्यीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी एक व्यावहारिक खाका तैयार करता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

रविकश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस समझौते का राजनीतिक और प्रशासनिक आयाम भी उतना ही महत्वपूर्ण है। छह दशकों से लंबित मामले पर विभिन्न राजनीतिक दलों के मुख्यमंत्रियों के बीच यह सहमति 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) की एक प्रभावी मिसाल पेश करती है। अपने जल संसाधनों का बिना किसी वित्तीय भार के अधिकतम दोहन करना केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक चतुर कूटनीतिक जीत है। यह सौदा दर्शाता है कि जब राज्य क्षेत्रीय मतभेदों से ऊपर उठकर नीतिगत समझदारी दिखाते हैं, तो अंतर-राज्यीय विवादों का समाधान न केवल संभव है, बल्कि वह राजकोषीय घाटे से जूझ रहे राज्यों के लिए शासन का एक नया मानक तय करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह समझौता न केवल हिमाचल के लिए वित्तीय राहत है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लिए भी यमुना बेसिन में जल सुरक्षा का बड़ा जरिया बनेगा। छह दशकों के विवाद के बाद बहुराज्यीय सहमति बनना यह दिखाता है कि क्षेत्रीय राजनीति से ऊपर उठकर संसाधन प्रबंधन अब प्राथमिकता बन रहा है। आगे चलकर अन्य अटकी हुई नदी घाटी परियोजनाओं के लिए भी यह करार एक बड़ा और मजबूत उदाहरण पेश करेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

छह दशकों से लंबित जल विवादों का बहुराज्यीय मंच पर इस तरह सुलझना प्रशासनिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से एक बड़ा मील का पत्थर है। जब इतने सारे राज्य आपसी कानूनी और प्रशासनिक उलझनों को दरकिनार कर किसी बहुउद्देशीय परियोजना पर सहमत होते हैं, तो इससे अंतर-राज्यीय विवादों के निपटारे के लिए एक मजबूत मिसाल कायम होती है। यह समझौता दिखाता है कि बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय संसाधनों के प्रबंधन में दीर्घकालिक कानूनी और प्रशासनिक सहयोग कितना जरूरी है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp