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कोहिमा दौरे में नागालैंड के ड्रोन प्रशिक्षण अभियान से खुश हुए राज्यपाल नंद किशोर यादवनागालैंड
8 सित॰ 2026, 4:10 pm (23 दिन पहले)· 2

कोहिमा दौरे में नागालैंड के ड्रोन प्रशिक्षण अभियान से खुश हुए राज्यपाल नंद किशोर यादव

नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने कोहिमा स्थित नागालैंड जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग सेंटर और ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा किया, जहां उन्हें राज्य के ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अब तक 72 प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण पूरा करने की जानकारी दी गई।

कोहिमा की दो प्रमुख तकनीकी संस्थाओं ने सोमवार को नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव को राज्य के बढ़ते ड्रोन इकोसिस्टम की पूरी झलक दिखाई, मैपिंग सर्वे से लेकर पायलट सर्टिफिकेशन कोर्स तक, यह दौरा इस क्षेत्र में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा के तौर पर हुआ।

दो केंद्र, एक मकसद

राज्यपाल ने नागालैंड जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनजीआईएसआरएससी) और ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा किया। दोनों केंद्र नागालैंड सरकार के प्लानिंग एंड ट्रांसफॉर्मेशन डिपार्टमेंट के अंतर्गत काम करते हैं। इस दौरे में अधिकारियों ने राज्यपाल को ड्रोन आधारित कौशल विकास, इसके व्यावहारिक इस्तेमाल और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों से जुड़ी प्रगति की जानकारी दी।

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मैपिंग यूनिट से ट्रेनिंग हब तक का सफर

नागालैंड में ड्रोन तकनीक की शुरुआत एक अलग ड्रोन यूनिट बनाने से हुई थी, जिसे शुरुआत में मैपिंग, सर्वे और जियोस्पेशियल डेटा जुटाने के लिए स्थापित किया गया था। समय के साथ इस यूनिट ने रिसर्च और डेवलपमेंट का काम भी शुरू किया, कई हितधारकों और सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम किया और धीरे-धीरे यूएवी प्रशिक्षण के मामले में पूरे क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। यही शुरुआती ड्रोन स्कूल अब पूर्ण रूप से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बन चुका है, इसका मकसद कुशल जनशक्ति तैयार करना और रोजगार, उद्यमिता, स्टार्टअप्स तथा सार्वजनिक क्षेत्र में यूएवी तैनाती के लिए करियर के रास्ते खोलना है।

कौन-कौन से कोर्स कराए जा रहे हैं

यह केंद्र फिलहाल डीजीसीए के नियमों के मुताबिक स्मॉल और मीडियम कैटेगरी के ड्रोन के लिए रिमोट पायलट सर्टिफिकेट कोर्स करा रहा है। इसके अलावा प्रशिक्षुओं को एफपीवी (फर्स्ट पर्सन व्यू) उड़ान, ड्रोन की मरम्मत और रखरखाव, जीआईएस आधारित ड्रोन सर्वे व मैपिंग, ड्रोन सिनेमैटोग्राफी और एविओनिक्स की व्यावहारिक ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

आंकड़ों में तस्वीर

युवाओं में कौशल विकास को बढ़ावा देने के मकसद से नागालैंड स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट मिशन (एनएसईडीएम) के तहत अलग-अलग ड्रोन कोर्स के लिए अब तक 70 उम्मीदवारों का चयन किया जा चुका है। वहीं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से अब तक 72 प्रशिक्षु ड्रोन प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। अधिकारियों की नजर में यह केंद्र नागालैंड को ड्रोन कौशल, इनोवेशन और इसके इस्तेमाल के मामले में क्षेत्रीय हब बनाने की दिशा में अहम कड़ी है, साथ ही यह राज्य के युवाओं के लिए तकनीक आधारित रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते भी खोल रहा है।

राज्यपाल का संदेश

राज्यपाल यादव ने एनजीआईएसआरएससी और ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के काम की सराहना करते हुए कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम कार्यबल तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल अब खेती, इन्फ्रास्ट्रक्चर, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी, सिनेमैटोग्राफी और जियोस्पेशियल मैपिंग जैसे कई क्षेत्रों में हो रहा है, जिससे यह गवर्नेंस और रोजगार दोनों के लिहाज से एक अहम उभरता हुआ क्षेत्र बन गया है। उन्होंने केंद्र को अपनी गतिविधियों और क्षमताओं को लगातार मजबूत करते रहने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

सवाल-जवाब

सोमवार को नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने क्या किया?
उन्होंने कोहिमा स्थित नागालैंड जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग सेंटर और ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा कर राज्य की ड्रोन तकनीक और जियोस्पेशियल कामकाज की समीक्षा की।
ये दोनों केंद्र किस विभाग के अंतर्गत काम करते हैं?
दोनों केंद्र नागालैंड सरकार के प्लानिंग एंड ट्रांसफॉर्मेशन डिपार्टमेंट के अंतर्गत आते हैं।
ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कौन-कौन से कोर्स कराए जाते हैं?
यहां डीजीसीए के मानकों के मुताबिक स्मॉल और मीडियम ड्रोन के लिए रिमोट पायलट सर्टिफिकेट कोर्स, साथ ही एफपीवी उड़ान, ड्रोन मरम्मत-रखरखाव, जीआईएस ड्रोन सर्वे व मैपिंग, ड्रोन सिनेमैटोग्राफी और एविओनिक्स की ट्रेनिंग दी जाती है।
अब तक कितने प्रशिक्षु ड्रोन ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं?
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से अब तक 72 प्रशिक्षु ड्रोन ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं।
नागालैंड स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट मिशन के तहत कितने उम्मीदवार चुने गए हैं?
एनएसईडीएम के तहत अलग-अलग ड्रोन कोर्स के लिए 70 उम्मीदवारों का चयन किया गया है।
राज्यपाल ने ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल खेती, इन्फ्रास्ट्रक्चर, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी, सिनेमैटोग्राफी और जियोस्पेशियल मैपिंग जैसे कई क्षेत्रों में हो रहा है।
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