अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब स्थित पूर्वोत्तर भारत विदेशी बाजारों में पैठ बनाने के लिए इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक मजबूत केंद्र बन सकता है। नगालैंड के ऊर्जा मंत्री केजी केन्ये ने औद्योगिक इकाइयों से अपील की है कि वे कोलकाता से आगे बढ़कर पूर्वोत्तर के अछूते कारोबारी अवसरों पर ध्यान दें। केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट नीति और इलाके में सुधरते बुनियादी ढांचे के बीच विनिर्माताओं के पास दक्षिण एशियाई और पड़ोसी मुल्कों में अपने उत्पाद पहुंचाने का यह बेहतरीन मौका है।
सीमावर्ती बाजारों में बढ़ती मांग और बुनियादी ढांचे की संभावनाएं
इंडियन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित एलेक्रामा 2027 के एक पूर्वावलोकन कार्यक्रम में बोलते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार कई क्षेत्रों में बिजली ढांचे की भारी कमी है। इसके बावजूद उन इलाकों में उपभोक्ताओं की मांग में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जो भारतीय उत्पादकों के लिए बड़े व्यापारिक विस्तार का आधार बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय राजमार्गों और मजबूत सड़क संपर्कों के बनने से नगालैंड भविष्य में एक बड़े व्यापार और निवेश केंद्र के तौर पर उभरेगा।
सरकारी नौकरियों की सीमा और निजी क्षेत्र से रोजगार की उम्मीद
राज्य के आर्थिक ढांचे पर बात करते हुए केजी केन्ये ने बताया कि नगालैंड में शिक्षित युवाओं की एक बड़ी तादाद रोजगार की तलाश में है। सरकारी तंत्र अब उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां नए शिक्षित युवाओं को सरकारी नौकरियों में समाहित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है। राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मियों के वेतन और भत्तों में खर्च हो जाता है, जिससे अन्य विकासात्मक कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन सीमित रह जाते हैं। ऐसे हालात में निजी क्षेत्र का निवेश ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
उद्योगपतियों को सुरक्षित और अनुकूल कारोबारी माहौल का भरोसा
नगालैंड में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को स्वीकारते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार एक शांतिपूर्ण और उद्योग-अनुकूल परिवेश तैयार करने पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने बाहर से आने वाले निवेशकों को राज्य प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिया। मंत्री ने जोर देकर कहा कि अगर कंपनियां नगालैंड को विनिर्माण आधार बनाती हैं, तो उन्हें पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच हासिल होगी।
असेंबली और रिपेयरिंग इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव
इसी कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव केडी विजो ने भी इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली उपकरण कंपनियों से नगालैंड समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में विनिर्माण, असेंबली और मरम्मत केंद्र खोलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में पूर्वोत्तर लंबे समय से पिछड़ा रहा है। यदि कंपनियां शुरुआत में बड़े पैमाने पर पूरे संयंत्र लगाने में सक्षम नहीं हैं, तो वे सेमी-नॉक्ड-डाउन असेंबली इकाइयां शुरू कर सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, बेरोजगारी घटेगी और युवा पीढ़ी के लिए आजीविका के सम्मानजनक साधन विकसित होंगे।





















