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लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के रौद्र रूप से 500 साल पुराना वीर बाबा स्थान खतरे में, बचाने के लिए ग्रामीणों ने शुरू की विशेष प्रार्थनाउत्तर प्रदेश
12 सित॰ 2026, 12:04 pm (47 दिन पहले)· 2

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के रौद्र रूप से 500 साल पुराना वीर बाबा स्थान खतरे में, बचाने के लिए ग्रामीणों ने शुरू की विशेष प्रार्थना

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी का भीषण कटान जारी है, जिससे एक ऐतिहासिक 500 वर्ष पुराना धार्मिक स्थल और पूरा रूरा सुल्तानपुर गांव नदी में विलीन होने की कगार पर है।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई क्षेत्रों में शारदा नदी के उफान ने तबाही मचा रखी है। पहाड़ों पर लगातार हो रही भीषण बारिश के कारण नदी का जलस्तर असाधारण रूप से बढ़ गया है, जिससे मैदानी इलाकों में मिट्टी के कटान की रफ्तार बेहद तेज हो गई है। नदी का यह आक्रामक रूप अब केवल खेतों और लहलहाती फसलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह तेजी से घनी आबादी वाले ग्रामीण इलाकों की तरफ रुख कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप कई एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नदी के आगोश में समा चुकी है। ग्रामीण इलाकों में सालों की मेहनत से बनाए गए मकानों पर विनाश का खतरा मंडरा रहा है, जिससे गोला तहसील के अंतर्गत आने वाले रूरा सुल्तानपुर गांव के निवासियों में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

पहाड़ी इलाकों में बारिश से मैदानी इलाकों में मचा हाहाकार

भौगोलिक रूप से तराई क्षेत्र में स्थित गोला तहसील का रूरा सुल्तानपुर गांव इन दिनों प्राकृतिक आपदा के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। पहाड़ों पर होने वाली लगातार बारिश का सीधा असर इस मैदानी इलाके की नदियों पर पड़ता है। पानी की भारी आवक के कारण शारदा नदी की धारा अब अनियंत्रित होकर किनारों को काटने लगी है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नदी की तेज लहरें जमीन के बड़े-बड़े हिस्सों को अपने साथ बहा ले जा रही हैं। जिन खेतों में कुछ समय पहले तक हरी-भरी फसलें खड़ी थीं और जो ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन थीं, वे अब पूरी तरह से नदी के तेज बहाव में विलीन हो चुके हैं। इस आपदा ने किसानों के सामने भरण-पोषण का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

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पांच सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर पर आया संकट

शारदा नदी की विनाशकारी लहरें अब केवल कृषि भूमि तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे रूरा सुल्तानपुर गांव की सबसे पुरानी और पूजनीय पहचान की ओर बढ़ चुकी हैं। गांव में स्थित लगभग 500 वर्ष पुराना वीर बाबा स्थान अब नदी के मुहाने पर खड़ा है। यह स्थल केवल एक धार्मिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से ग्रामीणों की आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है। हर त्योहार और विशेष अवसरों पर पूरा गांव यहाँ अपनी मन्नतें लेकर आता रहा है। नदी के कटान की धार इस ऐतिहासिक स्थल के बिल्कुल समीप पहुँच जाने से लोगों के दिलों में गहरा दुख और चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल जमीन का नुकसान नहीं है, बल्कि उनकी ऐतिहासिक पहचान और आस्था पर आया एक बहुत बड़ा संकट है।

जब प्रशासनिक व्यवस्था हारी, तो लिया ईश्वर का सहारा

बाढ़ और कटान की इस विभीषिका के बीच ग्रामीणों की लाचारी साफ देखी जा सकती है। जब बचाव के सभी व्यावहारिक रास्ते बंद दिखाई दिए, तो ग्रामीणों ने अपनी आस्था को ही एकमात्र सहारा बना लिया है। वीर बाबा के स्थान पर गाँव के लोग बड़ी संख्या में एकत्र होकर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। ग्रामीणों की यह अटूट मान्यता है कि उनकी सामूहिक प्रार्थना और अनुष्ठान से शारदा नदी का प्रकोप शांत होगा और वह अपनी दिशा बदल लेगी। नदी की उफनती लहरों के सामने खड़े होकर हाथ जोड़े प्रार्थना करते ग्रामीणों के चेहरे उनकी बेबसी और अटूट विश्वास की कहानी बयां करते हैं। वे नदी से लगातार पीछे हटने और उनके घरों को सुरक्षित छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं।

मजबूरन पलायन और प्रशासनिक उदासीनता का आरोप

इस संकट के बीच कई परिवारों के पास अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। नदी के बढ़ते खतरे को देखते हुए कुछ ग्रामीण पहले ही गाँव से पलायन कर चुके हैं। कटान के शिकार बेचू ने बताया कि उनकी फसलें पहले ही नदी के पेट में समा चुकी हैं और अब कटान लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे हालात में लोग अपने आशियानों को उजड़ते हुए देखने को मजबूर हैं और गाँव छोड़कर जा रहे हैं। वहीं, दिलीप मिश्रा ने स्थानीय प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि नदी के कटान को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम या सुरक्षात्मक व्यवस्था नहीं की गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई तकनीकी उपाय किए होते, तो इस तबाही को रोका जा सकता था। अब हर दिन मकान और फसलें पानी में बह रही हैं, जिससे गाँव का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है।

सुरक्षा के लिए केवल प्रार्थना ही एकमात्र जरिया

धार्मिक अनुष्ठान करा रहे पंडित नरेंद्र कुमार पांडे ने इस स्थिति पर अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि एक आम इंसान के रूप में वे लोग केवल ईश्वर से प्रार्थना ही कर सकते हैं। वे लगातार मां शारदा की आराधना कर रहे हैं ताकि वह शांत होकर गाँव की रक्षा करें। उन्होंने बताया कि नदी का कटान इतनी तेजी से हो रहा है कि वीर बाबा का यह प्राचीन स्थान धीरे-धीरे नदी के मुहाने में समाता जा रहा है। गाँव के लोग बेहद भयभीत हैं क्योंकि उनके पास इस प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए कोई संसाधन नहीं बचे हैं और प्रशासन की ओर से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।

सवाल-जवाब

यह घटना उत्तर प्रदेश के किस जिले की है?
यह घटना उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के गोला तहसील क्षेत्र के रूरा सुल्तानपुर गांव की है।
कौन सा ऐतिहासिक धार्मिक स्थल खतरे में है?
गाँव का लगभग 500 वर्ष पुराना 'वीर बाबा स्थान' नदी के तेज कटान के कारण गंभीर खतरे में है।
नदी के कटान का मुख्य कारण क्या है?
पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शारदा नदी का जलस्तर और बहाव काफी बढ़ गया है, जिससे किनारों का कटान तेज हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाए हैं?
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन की ओर से कटान को रोकने के लिए कोई सुरक्षात्मक व्यवस्था या ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
बचाव के लिए ग्रामीण क्या उपाय कर रहे हैं?
ग्रामीणों ने अब आस्था का सहारा लिया है और वे वीर बाबा स्थान पर इकट्ठा होकर शारदा नदी को शांत करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान कर रहे हैं।
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