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पहाड़ी बारिश से उफनाई शारदा नदी, गोला के रूरा सुल्तानपुर गांव में कटान से सैकड़ों बीघा खेत लील रही तेज़ धारभारत
9 सित॰ 2026, 11:10 am (1 घंटे पहले)· 2

पहाड़ी बारिश से उफनाई शारदा नदी, गोला के रूरा सुल्तानपुर गांव में कटान से सैकड़ों बीघा खेत लील रही तेज़ धार

लखीमपुर खीरी जिले में पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश के बाद शारदा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। गोला तहसील के रूरा सुल्तानपुर गांव के पास वीर बाबा स्थान पर शारदा नदी का तेज कटान जारी है, जिससे किसानों की फसलें और खेत पानी में समा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पहाड़ों पर जारी अनवरत बारिश का घातक प्रभाव अब निचले और मैदानी इलाकों में तबाही के रूप में सामने आ रहा है। उफान पर आई शारदा नदी ने अपना विकराल रूप दिखा दिया है, जिसके कारण तटवर्ती इलाकों में भीषण कटान शुरू हो गया है। सबसे गंभीर स्थिति गोला तहसील क्षेत्र के रूरा सुल्तानपुर गांव की है, जहाँ नदी की तेज धार किसानों की उपजाऊ जमीन और मेहनत से तैयार फसलों को लगातार अपने आगोश में ले रही है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के साथ ही किनारे की जमीन भरभराकर पानी में विलीन हो रही है, जिससे पूरे ग्रामीण इलाके में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

गोला तहसील के रूरा सुल्तानपुर में कटान का तांडव

लखीमपुर खीरी जिले की कुल पांच तहसीलें बाढ़ के संवेदनशील क्षेत्र में आती हैं। इस समय गोला तहसील के अंतर्गत आने वाले रूरा सुल्तानपुर गांव के उत्तर दिशा में स्थित प्रसिद्ध वीर बाबा स्थान के समीप शारदा नदी सबसे ज्यादा कहर बरपा रही है। नदी का प्रवाह इतना प्रचंड है कि तटवर्ती खेतों की मिट्टी तेजी से कटकर धारा में बह रही है। जिन जमीनों पर कल तक लहलहाती फसलें खड़ी थीं, वे देखते ही देखते नदी का हिस्सा बनती जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के लिए यह केवल भूमि का नुकसान नहीं है, बल्कि उनके पूरे परिवार के भरण-पोषण और आजीविका पर आया गहरा संकट है।

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धान और गन्ने की लहलहाती फसलें नदी में जलमग्न

शारदा नदी के इस भीषण कटाव के कारण किसानों द्वारा खून-पसीने से सींचे गए खेत पूरी तरह तबाह हो रहे हैं। मुख्य रूप से धान और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। नदी के बहाव के आगे मजबूत तटबंध और पेड़ तक नहीं टिक पा रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलें लगातार पानी में समा रही हैं, जिससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया है। अगर कटान इसी रफ्तार से जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में न केवल सैंकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि का नामोनिशान मिट जाएगा, बल्कि पूरे गांव का नक्शा भी बदल सकता है।

ग्रामीणों की आपबीती: आधे घंटे में बह जाती है तीन बीघा जमीन

प्रभावित इलाके में स्थिति का जायजा लेने के दौरान रूरा सुल्तानपुर के निवासी और किसान नीरज ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह से वीर बाबा स्थान के आसपास शारदा नदी बेहद तेजी से कटान कर रही है। स्थिति इतनी खतरनाक है कि महज आधे घंटे के भीतर ही नदी लगभग दो से तीन बीघा जमीन को अपने आगोश में समा लेती है। किसान नीरज का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस तीव्र कटान को रोकने के ठोस इंतजाम नहीं किए, तो बहुत जल्द पूरे रूरा सुल्तानपुर गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। इस बीच, बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा निचले हिस्सों में रहने वाले ग्रामीणों से लगातार सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर चले जाने की अपील की जा रही है।

वर्षों की पूंजी और 7 एकड़ की फसल गँवा चुके किसान

एक अन्य स्थानीय किसान जगदीश ने नदी के प्रकोप की खौफनाक दास्तान बयां की। जगदीश के अनुसार, उनकी 7 एकड़ जमीन पर गन्ने की बेहतरीन फसल लगी हुई थी। लेकिन शारदा नदी के अनवरत कटान के कारण उनकी पूरी की पूरी खेती नदी में समा गई। अब उनकी 7 एकड़ जमीन में से केवल एक बीघा गन्ने की फसल ही किसी तरह बची रह गई है, जबकि बाकी सारी ज़मीन और फसल जलमग्न हो चुकी है। यही नहीं, नदी किनारे खड़े विशालकाय पेड़ भी कटान की चपेट में आकर धारा में विलीन हो चुके हैं। इस तबाही ने ग्रामीणों की कठिनाइयों को कई गुना बढ़ा दिया है, और वे अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी भर की कमाई को नदी में बहते देखने को मजबूर हैं।

सवाल-जवाब

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से कौन सा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित है?
गोला तहसील के अंतर्गत आने वाला रूरा सुल्तानपुर गांव शारदा नदी के कटान से सबसे ज्यादा प्रभावित है।
रूरा सुल्तानपुर गांव में कटान किस स्थान के पास हो रहा है?
यह कटान रूरा सुल्तानपुर गांव के उत्तर दिशा में स्थित वीर बाबा स्थान के पास तेजी से हो रहा है।
किसान नीरज के अनुसार नदी के कटान की रफ्तार कितनी तेज है?
किसान नीरज के अनुसार केवल आधा घंटे के भीतर शारदा नदी लगभग दो से तीन बीघा जमीन अपने आगोश में समा लेती है।
किसान जगदीश को इस कटान से कितना नुकसान हुआ है?
किसान जगदीश की 7 एकड़ जमीन पर लगी गन्ने की फसल में से केवल एक बीघा फसल बची है, बाकी पूरी फसल नदी में समा गई है।
लखीमपुर खीरी जिले में कितनी तहसीलें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आती हैं?
लखीमपुर खीरी जनपद की कुल पांच तहसीलें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।
प्रशासन द्वारा प्रभावित ग्रामीणों के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
प्रशासन द्वारा लगातार अपील की जा रही है कि लोग निचले इलाकों को छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 मिनट पहले

लखीमपुर खीरी के रूरा सुल्तानपुर में शारदा नदी का यह कटान सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक और पर्यावरणीय विफलता का गंभीर संकेत है। क्राइम और जन-सुरक्षा मामलों के दृष्टिकोण से, यदि समय रहते भू-कटाव रोकने के ठोस और वैज्ञानिक उपाय नहीं किए गए, तो यह संकट केवल किसानों की आजीविका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनजीवन की भारी क्षति और गंभीर कानूनी-व्यवस्था की स्थिति को जन्म दे सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·34 मिनट पहले

लखीमपुर खीरी के रूरा सुल्तानपुर में शारदा नदी का यह कटान सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक और पर्यावरणीय विफलता का गंभीर संकेत है। इस संकट का सीधा असर कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण वित्तीय स्थिरता पर पड़ रहा है। जब किसानों की दशकों की पूंजी और फसलें जलमग्न होती हैं, तो ग्रामीण ऋण अदायगी और कृषि ऋणों पर संकट गहरा जाता है, जिससे क्षेत्रीय वित्तीय संतुलन बिगड़ता है। यदि समय रहते वैज्ञानिक और तकनीकी उपाय नहीं किए गए, तो यह आर्थिक तबाही स्थानीय बाजार और निवेश चक्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।

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