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लाल पद्मधर सिंह बघेल: विंध्य का वह सपूत जिसने तिरंगे के लिए दी शहादतमध्य प्रदेश
8 जुल॰ 2026, 7:27 am (67 दिन पहले)· 2

लाल पद्मधर सिंह बघेल: विंध्य का वह सपूत जिसने तिरंगे के लिए दी शहादत

मध्य प्रदेश के सतना और रीवा के कई प्रमुख संस्थानों के नाम जिस वीर शहीद पर रखे गए हैं, उनकी कहानी बेहद प्रेरणादायक है। मात्र 28 साल की उम्र में देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले लाल पद्मधर सिंह बघेल ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जो मिसाल पेश की, वह आज भी युवाओं का मार्गदर्शन करती है।

क्या आपने कभी सोचा है कि सतना और रीवा के सबसे प्रमुख कॉलेजों, सार्वजनिक पार्कों और पुस्तकालयों के नाम आखिर किस शख्सियत के नाम पर रखे गए हैं? यह कहानी जुड़ी है एक ऐसे महानायक से, जिनका जन्म 12 अगस्त 1914 को रीवा रियासत की कृपालपुर गढ़ी में हुआ था। हम बात कर रहे हैं अमर शहीद लाल पद्मधर सिंह बघेल की, जिन्होंने गुलामी की बेड़ियों को काटने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब उन्होंने महज 28 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के सामने सीना तानकर तिरंगा थामे रखा, तो उनकी वीरता ने इतिहास रच दिया। आज विंध्य क्षेत्र का प्रशासन और नगर निगम मिलकर उनकी स्मृतियों को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

क्रांतिकारी सफर की शुरुआत

कृपालपुर के स्थानीय निवासी संजय दहिया के अनुसार, लाल पद्मधर सिंह बघेल एक प्रतिष्ठित राज परिवार से संबंधित थे। वे चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके अन्य भाइयों के नाम लाल गजाधर सिंह, लाल चक्रधर सिंह और लाल शंखधर सिंह थे। प्रारंभिक शिक्षा रीवा से पूरी करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा का रुख किया और वर्ष 1941 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीएससी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। उस कालखंड में स्वतंत्रता संग्राम पूरे चरम पर था। महात्मा गांधी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किए जाने के बाद, 11 अगस्त 1942 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन में एक गोपनीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में उन 31 चुनिंदा छात्रों में पद्मधर भी थे जिन्होंने देश के लिए शहीद होने का संकल्प लिया था। उन्होंने अपना जीवन देश को समर्पित करने का निर्णय लिया और कभी विवाह नहीं किया, क्योंकि उनका मानना था कि वे एक गुलाम राष्ट्र में अपनी संतान को जन्म नहीं देना चाहते थे।

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शहादत और इंकलाब का स्वर

जिस दिन उन्हें वीरगति प्राप्त हुई, उस दिन छात्र कॉलेज परिसर से निकलकर कचहरी की ओर एक शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान ब्रिटिश अधिकारियों ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। भगदड़ के माहौल में जब नयनतारा सहगल नामक युवती के हाथों से तिरंगा गिरने लगा, तो लाल पद्मधर सिंह बघेल ने फुर्ती दिखाते हुए उसे थाम लिया। वे इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए पूरी दिलेरी के साथ आगे बढ़ते रहे। दुर्भाग्यवश, अंग्रेजों की गोली उन्हें जा लगी और उन्होंने देश की मिट्टी के लिए अपने प्राण त्याग दिए। उनकी इस महान शहादत और वीरता के किस्सों को उनके मित्र रमेश प्रताप सिंह जाखी ने संकलित किया है, जिन्होंने पत्रों और यादों के आधार पर उन पर एक पुस्तक भी लिखी है।

विरासत जो आज भी जीवित है

आज शहीद लाल पद्मधर सिंह बघेल का नाम विंध्य से लेकर इलाहाबाद तक सम्मान के साथ लिया जाता है। सतना का सबसे प्रतिष्ठित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय और रीवा का चाकघाट शासकीय महाविद्यालय उन्हीं के नाम पर संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा त्यौंथर गांव में भी उनके नाम से कॉलेज है। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उनके गृह ग्राम कृपालपुर में एक आधुनिक लाइब्रेरी का निर्माण किया गया है। रीवा के मध्य में बना पद्मधर पार्क आज एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक केंद्र माना जाता है। कृपालपुर के पार्क में बने उनके स्मारक पर उनके पत्रों की पंक्तियां अंकित हैं। उनके सम्मान में कई प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उनकी भव्य प्रतिमा के साथ एक शहीद स्मारक मौजूद है, जहां हर साल शहीदी दिवस के अवसर पर भव्य आयोजन किया जाता है। कृपालपुर गढ़ी में उनके भतीजे और उनका परिवार आज भी इस महान ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

लाल पद्मधर सिंह बघेल कौन थे?
वे रीवा रियासत के कृपालपुर के रहने वाले एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के लिए शहादत दी थी।
उनकी शहादत कैसे हुई थी?
इलाहाबाद में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान शांतिपूर्ण जुलूस पर हुई ब्रिटिश फायरिंग में तिरंगा गिरने से बचाने के प्रयास में उन्हें गोली लगी थी।
उनके नाम पर रीवा और सतना में कौन से संस्थान हैं?
सतना का शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रीवा का चाकघाट शासकीय महाविद्यालय और रीवा का प्रसिद्ध पद्मधर पार्क उन्हीं के नाम पर हैं।
उनका जन्म कब हुआ था?
लाल पद्मधर सिंह बघेल का जन्म 12 अगस्त 1914 को हुआ था।
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