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मधेपुरा के स्कूल का हैरान करने वाला सच, दो कमरे और टीन शेड में चल रही हैं आठ कक्षाएंबिहार
25 अग॰ 2026, 5:40 pm (31 दिन पहले)· 1

मधेपुरा के स्कूल का हैरान करने वाला सच, दो कमरे और टीन शेड में चल रही हैं आठ कक्षाएं

बिहार के मधेपुरा से एक सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर सामने आई है, जहां 159 छात्रों को पढ़ाने के लिए केवल दो कमरे और एक टीन शेड उपलब्ध है। जगह की कमी के चलते एक ही कमरे में कई कक्षाओं के बच्चों को साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।

बिहार के मधेपुरा जिले से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को बयां करती एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहाँ एक ही विद्यालय परिसर में कक्षा एक से लेकर आठ तक के कुल 159 बच्चों की पढ़ाई मात्र दो कमरों और एक टीन के शेड के सहारे चल रही है। पर्याप्त कमरों के अभाव में शिक्षकों को मजबूरन कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। चिलचिलाती गर्मी के मौसम में टीन का शेड अत्यधिक तपने के कारण बच्चों और शिक्षकों का वहाँ बैठना तक मुहाल हो जाता है, इसके बावजूद मजबूरी में शिक्षा का यह सफर जैसे-तैसे जारी है। इस पूरे विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत कुल पाँच शिक्षक अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, जो सीमित संसाधनों के बीच बच्चों का भविष्य सँवारने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

एक ही कमरे में एक साथ पढ़ रहे हैं छह से आठ तक के छात्र

जब एक ही बंद कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को अलग-अलग विषयों की शिक्षा दी जाती है, तो विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए स्थिति बेहद असहज हो जाती है। एक तरफ शिक्षक किसी कक्षा के बच्चों को गणित के जटिल सवाल समझा रहे होते हैं, तो दूसरी तरफ पास में ही बैठे किसी अन्य कक्षा के बच्चों को भाषा का कोई पाठ पढ़ाया जा रहा होता है। इस तरह के मिले-जुले माहौल के कारण विद्यार्थियों का पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। शिक्षकों के सामने भी यह बड़ी चुनौती रहती है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी कक्षाओं का पाठ्यक्रम कैसे पूरा कराएँ। विद्यालय के शिक्षक राधेश्याम राम ने इस समस्या पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि उन्हें एक ही कमरे में कक्षा छह, सात और आठ के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ता है, जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में शिक्षकों को सामूहिक रूप से इस प्रकार पढ़ाना पड़ता है कि अधिक से अधिक बच्चों को मूल बातें समझ में आ सकें, लेकिन इसके बावजूद समय पर सिलेबस पूरा करना असंभव सा हो जाता है।

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फंड स्वीकृत होने के बावजूद जमीन न मिलने से रुका भवन निर्माण

विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल में कुल 159 बच्चों का नामांकन दर्ज है, जिनमें से प्रतिदिन औसतन 90 से 110 बच्चे विद्यालय में उपस्थित होते हैं। नामांकित विद्यार्थियों की इस संख्या के मुकाबले स्कूल परिसर में कमरों की संख्या बेहद कम है। उन्होंने बताया कि विद्यालय भवन के निर्माण और बुनियादी व्यवस्थाओं में सुधार करवाने के लिए विभाग को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

जमीन की अनुपलब्धता के कारण वापस लौट गया निर्माण फंड

प्रधानाध्यापक के अनुसार, विद्यालय के लिए नए भवन के निर्माण वास्ते प्रशासनिक स्तर पर राशि स्वीकृत हो चुकी थी, लेकिन विडंबना यह रही कि निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त जमीन ही उपलब्ध नहीं हो पाई। जमीन का प्रबंध न हो पाने की वजह से स्वीकृत हुई वह जरूरी राशि अंततः वापस लौट गई। इस प्रशासनिक और भूमीय लाचारी के कारण आज भी नौनिहाल खुले आसमान के नीचे टीन शेड और जर्जर या अपर्याप्त कमरों में पढ़ाई करने को विवश हैं।

सवाल-जवाब

यह मामला बिहार के किस जिले से जुड़ा है?
यह मामला बिहार के मधेपुरा जिले का है।
विद्यालय में कुल कितने बच्चे नामांकित हैं?
विद्यालय में कुल 159 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें से प्रतिदिन 90 से 110 बच्चे स्कूल पहुँचते हैं।
बच्चों को पढ़ाने के लिए कौन-से बुनियादी संसाधन उपलब्ध हैं?
बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में केवल दो कमरे और एक टीन का शेड उपलब्ध है।
विद्यालय भवन का निर्माण क्यों नहीं हो सका?
भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने के बावजूद जमीन उपलब्ध न हो पाने के कारण निर्माण नहीं हो सका और राशि वापस लौट गई।
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