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मध्य प्रदेश में लोकायुक्त का बड़ा छापा, हेड कांस्टेबल के पास मिली 29 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्तिमध्य प्रदेश
14 अक्तू॰ 2026, 10:08 pm (14 दिन पहले)· 2

मध्य प्रदेश में लोकायुक्त का बड़ा छापा, हेड कांस्टेबल के पास मिली 29 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति

इंदौर पुलिस के प्रधान आरक्षक फिरोज खान के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी में 33 संपत्तियों और 21 बैंक खातों का पता चला है, जहां खर्च वैध आय से 568 प्रतिशत अधिक पाया गया।

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के तहत इंदौर पुलिस में तैनात हेड कांस्टेबल फिरोज खान के खिलाफ भारी अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त की विशेष जांच टीमों ने जब उनके देवास स्थित आवास समेत कुल 15 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी, तो सामने आई संपत्तियों के ब्योरे ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। अब तक के तलाशी अभियान में प्रधान आरक्षक के पास 29 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति होने के दस्तावेज मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोनों शहरों में तलाशी अभियान जारी है और आगे संपत्ति का यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है।

15 ठिकानों पर लोकायुक्त की एक साथ छापेमारी

लोकायुक्त इंदौर और लोकायुक्त उज्जैन की संयुक्त टीमों ने 14 अक्टूबर की सुबह फिरोज खान के देवास स्थित निवास और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर सुनियोजित तलाशी अभियान शुरू किया। जांच के दायरे में कुल 15 अलग-अलग ठिकाने शामिल किए गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि प्रधान आरक्षक का कुल व्यय लगभग ₹12.95 करोड़ दर्ज किया गया है। यह राशि उनकी ज्ञात और वैध आय से करीब ₹11.01 करोड़ अधिक बैठती है। अनुपातहीनता के लिहाज से यह उनकी वास्तविक वैध आमदनी से करीब 568 प्रतिशत अधिक पाई गई है।

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33 अचल संपत्तियों और 21 बैंक खातों का खुलासा

दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान कुल 33 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है, जिनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब ₹29.73 करोड़ आंका गया है। इसके अलावा जांच में एक परिचित महिला रोशनी वर्मा के नाम पर दर्ज संपत्तियों, कई कंपनियों और विभिन्न कारोबारी फर्मों से जुड़े लेन-देन की कड़ियां भी मिली हैं। मामले में लगभग 21 बैंक खातों का पता चलने के बाद अधिकारियों ने किसी भी संभावित वित्तीय हेरफेर को रोकने के लिए इन सभी खातों से रकम निकासी पर तत्काल रोक लगा दी है। फिलहाल देवास और इंदौर में संबंधित परिसरों पर जांच की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस पृष्ठभूमि से जुड़ा है परिवार

जांच के बीच फिरोज खान की पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। उनके पिता गफ्फार भी पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं दे चुके थे और सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, जिनका अब निधन हो चुका है। इसके अलावा फिरोज के जुड़वां भाई जावेद भी पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और इस समय आगर मालवा में पदस्थ हैं। विभाग से मिले रिकॉर्ड के मुताबिक, फिरोज खान पिछले कई दिनों से बिना ड्यूटी के अवकाश पर चल रहे थे। पुलिस विभाग में एक प्रधान आरक्षक के स्तर पर इतनी भारी संपत्ति अर्जित करने के मामले ने सभी को चौंका दिया है।

सवाल-जवाब

लोकायुक्त ने किसके ठिकानों पर छापेमारी की है?
लोकायुक्त टीमों ने इंदौर पुलिस के प्रधान आरक्षक फिरोज खान के देवास स्थित आवास समेत कुल 15 ठिकानों पर तलाशी ली है।
जांच में अब तक कुल कितनी संपत्ति का पता चला है?
कार्रवाई में 33 अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग ₹29.73 करोड़ आंका गया है।
प्रधान आरक्षक की आय और व्यय में कितना अंतर मिला?
जांच में करीब ₹12.95 करोड़ का व्यय सामने आया है, जो उनकी ज्ञात वैध आय से ₹11.01 करोड़ अधिक यानी 568 प्रतिशत अनुपातहीन है।
कार्रवाई के दौरान वित्तीय लेन-देन पर क्या कदम उठाया गया है?
जांच में सामने आए करीब 21 बैंक खातों से निकासी पर तत्काल रोक लगा दी गई है।
फिरोज खान के परिवार में कौन-कौन पुलिस सेवा से जुड़ा रहा है?
उनके दिवंगत पिता गफ्फार सब इंस्पेक्टर पद से रिटायर हुए थे, जबकि उनके जुड़वां भाई जावेद आगर मालवा में पुलिस विभाग में पदस्थ हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·14 दिन पहले

एक हेड कांस्टेबल के पास करोड़ों की संपत्ति देखकर सचमुच हैरानी होती है। आखिर इतने सालों तक विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 दिन पहले

एक हेड कांस्टेबल के पास 29 करोड़ की संपत्ति होना हैरान करने वाला है, पर यकीन करना मुश्किल होता है कि विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी होगी। भाई और पिता भी पुलिस में थे, तो क्या वाकई सब अकेले ही मैनेज हो रहा था या कुछ और भी है?

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही पकड़ा आपने। अकेले इतने बड़े खेल को चलाना नामुमकिन है, महकमे में ऊपर तक इसके तार जुड़े होने की पूरी बू आ रही है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

एक सिपाही के पास उनतीस करोड़ की संपत्ति देखकर अक्ल चकरा जाती है। पूरा परिवार पुलिस में है, इसका मतलब सिस्टम के भीतर ही रहकर सब कुछ सेट किया गया है। अब देखना है कि भाई और बाकी रिश्तेदारों की फाइलों पर कब गाज गिरती है।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

करण भाई, सही कहा आपने। मैंने अपने लखनऊ वाले दिनों में एक छोटे बाबू के पास इतनी बेनामी संपत्ति देखी थी कि आज इस सिपाही वाली खबर पर बिल्कुल हैरानी नहीं हुई।

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