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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में तड़के 3.6 तीव्रता का भूकंप, सिरोंचा क्षेत्र में कांपी धरतीमहाराष्ट्र
3 सित॰ 2026, 11:18 am (10 दिन पहले)· 0

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में तड़के 3.6 तीव्रता का भूकंप, सिरोंचा क्षेत्र में कांपी धरती

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा-अहेरी क्षेत्र में गुरुवार तड़के 4:36 बजे 3.6 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया, हालांकि इसमें किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है।

महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्से में स्थित गढ़चिरौली जिले में गुरुवार तड़के अचानक जमीन हिलने से स्थानीय नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई। सुबह-सुबह आए इस भूकंप का झटका काफी स्पष्ट महसूस किया गया, जिसके कारण नींद में सो रहे कई लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.6 दर्ज की गई है। शुरुआती विवरण के अनुसार झटके तड़के 4 बजकर 36 मिनट पर आए, जिसने सिरोंचा और आसपास के इलाकों को प्रभावित किया।

भूकंप की तीव्रता, केंद्र और प्रभावित क्षेत्र

भूवैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक, गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा-अहेरी इलाके में आए इस भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। भूकंप का मुख्य केंद्र बिंदु सिरोंचा तालुका के अंतर्गत आने वाले एक आरक्षित वन क्षेत्र में पाया गया है। तड़के करीब 4:36 बजे जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, अचानक धरती में कंपन महसूस हुआ। सिरोंचा के अलावा नागेपल्ली क्षेत्र में भी लोगों ने इस हलचल को महसूस किया।

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राहत की बात यह रही कि इस भूकंप की तीव्रता अपेक्षाकृत कम थी। स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों से मिली अब तक की सूचना के अनुसार, इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है। न तो किसी इमारत को नुकसान पहुंचने की खबर है और न ही कोई व्यक्ति घायल हुआ है। हालांकि, सुबह के वक्त अचानक महसूस हुए इन झटकों ने लोगों के बीच कुछ समय के लिए डर का माहौल पैदा कर दिया था।

महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों में लगातार आ रहे झटके

हाल के दिनों में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में बार-बार भूकंपीय गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। इससे पहले 14 अगस्त को राज्य के नासिक जिले में भी जमीन कांपी थी, जहां रिक्टर स्केल पर 3.4 तीव्रता का भूकंप मापा गया था। नासिक की इस घटना से ठीक तीन दिन पहले, यानी 11 अगस्त को तटीय जिले पालघर में एक ही दिन में भूकंप के दो लगातार झटके महसूस किए गए थे। पालघर में आए इन झटकों की तीव्रता क्रमशः 3.2 और 3.4 दर्ज की गई थी, जिससे तटीय इलाकों में दहशत फैल गई थी।

केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के कई हिस्सों में पिछले कुछ हफ्तों से भूगर्भीय हलचल तेज हुई है। अगस्त के मध्य में हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी चार बार धरती कांपने की घटनाएं सामने आई थीं। भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार आ रहे इन झटकों के कारण लोगों के मन में बड़े भूकंप को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं।

धरती के नीचे क्यों आते हैं भूकंप?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें हमेशा बहुत धीमी गति से तैरती या खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो उनके किनारों पर भारी दबाव और तनाव पैदा होता है।

दीर्घकाल तक दबाव जमा होने के बाद जब चट्टानें इस तनाव को सहन नहीं कर पातीं, तो धरती के भीतर संचित ऊर्जा अचानक बाहर की ओर मुक्त होती है। ऊर्जा की यह तीव्र तरंगें पृथ्वी की सतह तक पहुंचती हैं और हमें भूकंपीय झटकों के रूप में महसूस होती हैं। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, 3.6 जैसी कम तीव्रता वाले भूकंप आमतौर पर गंभीर तबाही नहीं मचाते, लेकिन यह इस बात का संकेत होते हैं कि धरती के भीतर प्लेटों की हलचल निरंतर जारी है।

सवाल-जवाब

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में भूकंप कब और किस समय आया?
भूकंप गुरुवार तड़के करीब 4:36 बजे आया, जिसका केंद्र सिरोंचा तालुका के आरक्षित वन क्षेत्र में था।
रिक्टर पैमाने पर गढ़चिरौली भूकंप की तीव्रता कितनी मापी गई?
रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.6 दर्ज की गई और इसकी गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे थी।
क्या इस भूकंप से कोई जनहानि या नुकसान हुआ है?
नहीं, भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण सिरोंचा, नागेपल्ली या आसपास के क्षेत्रों में किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
महाराष्ट्र के किन अन्य जिलों में हाल ही में भूकंप महसूस किए गए थे?
14 अगस्त को नासिक में 3.4 तीव्रता का और 11 अगस्त को पालघर में 3.2 तथा 3.4 तीव्रता के दो झटके महसूस किए गए थे।
भूकंप आने का मुख्य वैज्ञानिक कारण क्या है?
धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने या खिसकने से दबाव बनता है, जो अचानक ऊर्जा के रूप में बाहर निकलकर भूकंप का कारण बनता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

गढ़चिरौली जैसे सुदूर वन क्षेत्र में 3.6 तीव्रता का यह झटका और हाल ही में नासिक व पालघर में हुई भूगर्भीय हलचल इस बात का संकेत है कि पश्चिमी और मध्य भारत में टेक्टोनिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इस बार किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ग्रामीण और वन क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करना आवश्यक हो गया है ताकि किसी भी बड़े खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

गढ़चिरौली और अन्य जिलों में हालिया भूकंपीय गतिविधियां यह रेखांकित करती हैं कि हमें आपदा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था के समन्वय को केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि वन और ग्रामीण अंचलों तक इसका विस्तार करना अनिवार्य है। इस तरह के मामलों में स्थानीय पुलिस और आपातकालीन इकाइयों को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए हमेशा मुस्तैद रहना होगा, ताकि किसी भी संभावित बड़े संकट के समय त्वरित और सुरक्षित उपाय सुनिश्चित किए जा सकें।

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