महाराष्ट्र में गणेशोत्सव नजदीक आते ही डीजे और तेज साउंड सिस्टम को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. पुणे में लोग ऊंची आवाज वाले डीजे बजाए जाने का विरोध कर रहे हैं और अब राज्य की एक मंत्री ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है.
माधुरी मिसाल ने डीजे पर पूरी तरह रोक की मांग की
महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय एवं शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने सोमवार को एक वीडियो संदेश जारी करके अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि वह त्योहारों के दौरान डीजे सिस्टम के इस्तेमाल की खुद पूरी तरह विरोधी हैं. उनका कहना है कि गणेशोत्सव हो या कोई और धार्मिक या सार्वजनिक आयोजन, हर त्योहार को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मनाया जाना चाहिए, न कि कानफाड़ू डीजे सिस्टम के भरोसे. मंत्री के मुताबिक तेज आवाज में बजने वाला संगीत आम लोगों के लिए मुसीबत बन जाता है, और इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों, बुजुर्गों और बीमार मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें शांत माहौल की जरूरत होती है.
ढोल-ताशा से मनेगा उत्सव, डीजे की जरूरत नहीं
माधुरी मिसाल ने जोर देकर कहा कि गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा त्योहार है, इसलिए इसे उसी पुरानी और पारंपरिक शैली में मनाया जाना चाहिए. उनके अनुसार ढोल, ताशा और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों से भी उत्सव की रौनक कम नहीं होती, ऐसे में तेज आवाज वाले डीजे सिस्टम की कोई जरूरत नहीं रह जाती.
विरोध को लेकर सफाई भी दी
अपने बयान पर उठ सकने वाले सवालों को भांपते हुए मंत्री ने साफ किया कि डीजे सिस्टम के विरोध का मतलब त्योहार मनाने के खिलाफ होना बिलकुल नहीं है. उनका आरोप है कि कुछ लोग जानबूझकर इस पूरे मसले को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं और इसे त्योहारों पर पाबंदी लगाने की कोशिश जैसा दिखा रहे हैं. माधुरी मिसाल ने कहा कि गणेशोत्सव की गौरवशाली परंपरा और उसका उत्साह कम होने की कोई वजह नहीं बनती, बल्कि इसे अनुशासित और परंपरागत ढंग से मनाया जाना चाहिए ताकि किसी को परेशानी न हो.
पुणे के 32 गणेश मंडलों ने पहले ही दिखाई राह
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए मंत्री ने पुणे के 32 गणेश मंडलों की मिसाल भी दी. इन मंडलों ने हाल में हुए दही हांडी उत्सव में डीजे सिस्टम का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया और पूरा आयोजन पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ ही संपन्न कराया. माधुरी मिसाल के अनुसार यह उदाहरण बताता है कि बिना तेज डीजे के भी उत्सव उतने ही जोश के साथ मनाया जा सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि पुणे के लोग आने वाले गणेशोत्सव में भी यही परंपरा आगे बढ़ाकर पूरे महाराष्ट्र के सामने एक मिसाल पेश करेंगे.





















