सितंबर का महीना मक्के की खेती करने वाले किसानों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस अवधि में मक्के की फसल पर फॉल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप तेजी से फैलने की संभावना बनी रहती है। यह हानिकारक कीट पौधे की गोभ यानी सेंट्रल व्होर्ल के भीतर छिपकर बैठता है और नई निकलने वाली कोमल पत्तियों को खाकर नुकसान पहुंचाता है। यदि शुरुआत में ही इस कीट की पहचान न की जा सके, तो यह बहुत कम समय में पूरे खेत की फसल को अपनी चपेट में ले लेता है और पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसी वजह से कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अपने खेतों की लगातार निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
फॉल आर्मी वर्म के लक्षण और पहचान
फॉल आर्मी वर्म की सूंडी मक्के के पौधे के सबसे नाजुक हिस्से यानी गोभ के अंदर अपना ठिकाना बनाती है। गोभ में छुपकर यह पत्तियों को कुतरना शुरू कर देती है। जब पौधे की नई पत्तियां बाहर की ओर फैलती हैं, तो उन पर एक सीधी कतार में बने छोटे और बड़े छेद साफ तौर पर दिखाई देते हैं। पत्तियों पर छिद्रों का यह विशेष पैटर्न कीट के प्रकोप का प्रमुख संकेत माना जाता है। इसके साथ ही, गोभ के अंदर सूंडी का मल या बीट जमा हुआ दिखाई देता है। यदि समय पर रोकथाम के कदम न उठाए जाएं, तो यह सूंडी पौधे के दूसरे अंगों को भी चबाकर नष्ट कर देती है। फसल को क्षति से बचाने के लिए किसानों को हफ्ते में कम से कम एक बार खेत का दौरा करके प्रत्येक पौधे की गोभ की जांच करनी चाहिए।
कीटनाशक दवाएं और उनके इस्तेमाल की मात्रा
कीट नियंत्रण को लेकर कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि फॉल आर्मी वर्म पर काबू पाने के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG एक प्रभावी रसायन है। इस दवा की लगभग 1 ग्राम मात्रा को 2.5 लीटर पानी में घोलकर इस्तेमाल करना चाहिए। एक एकड़ खेत में छिड़काव करने के लिए सामान्यतः 200 लीटर पानी के घोल की जरूरत पड़ती है।
इमामेक्टिन बेंजोएट के अलावा किसान क्लोरांट्रानिलिप्रोल 18.5% SC या स्पिनेटोरम 11.7% SC कीटनाशक का उपयोग भी कर सकते हैं। ये दोनों रसायन भी सूंडी को नियंत्रित करने में काफी असरदार साबित होते हैं।
छिड़काव करने का सही समय और जरूरी सावधानियां
चूंकि फॉल आर्मी वर्म की सूंडी गोभ के गहराई वाले हिस्से में छिपी रहती है, इसलिए छिड़काव करते समय स्प्रे नोजल का रुख सीधे गोभ की तरफ होना बेहद जरूरी है ताकि दवा का घोल सीधे कीट तक पहुंच सके। छिड़काव का कार्य सुबह के समय या फिर देर शाम को करना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है। इन घंटों के दौरान सूंडी अधिक सक्रिय होकर भोजन करती है, जिससे रासायनिक दवा का प्रभाव सटीक और त्वरित होता है।
प्रतिरोधक क्षमता से बचाव और खेत की स्वच्छता
केवल रासायनिक दवाओं के बार-बार छिड़काव पर निर्भर रहना इस कीट का स्थायी समाधान नहीं है। लगातार एक ही तरह के कीटनाशक का इस्तेमाल करने से कीटों के भीतर उस रसायन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए किसानों को अलग-अलग समूह वाली दवाओं को अदल-बदलकर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, खेत में उगे खरपतवार को नियमित रूप से नष्ट करते रहना चाहिए और पिछली फसल के अवशेषों को खेत से हटा देना चाहिए ताकि कीटों के छिपने और पनपने की जगह खत्म हो सके।















