नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। एम्स के चिकित्सा बेड़े में 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत देश में ही निर्मित पहली एंडोस्कोपी मशीन को शामिल किया गया है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में स्थापित की गई इस आधुनिक मशीन की मदद से अब मरीजों की जटिल जांच और इलाज बेहद आसान हो जाएगा। इस अत्याधुनिक उपकरण का निर्माण प्रमुख जापानी कंपनी फूजीफिल्म इंडिया द्वारा किया गया है, जिसने हाल ही में भारत में अपनी विनिर्माण इकाई स्थापित की है।
घरेलू स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मिली नई मजबूती
आत्मनिर्भर भारत और 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत, फूजीफिल्म इंडिया ने राजस्थान के जोधपुर में एंडोस्कोपी मशीन बनाने के लिए एक अत्याधुनिक कारखाने की शुरुआत की है। इस स्थानीय कारखाने में उत्पादन शुरू होने के बाद, कंपनी ने अपने द्वारा तैयार किए गए पहले स्वदेशी EP-6000 एंडोस्कोप सिस्टम को एम्स नई दिल्ली को पूरी तरह से निशुल्क दान किया है। यह कदम सीधे तौर पर उन जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की मदद के लिए उठाया गया है जो इलाज के लिए इस प्रतिष्ठित संस्थान में आते हैं। इस नई मशीन में उन्नत इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से डॉक्टर पेट, आंत और पूरे पाचन तंत्र की गंभीर बीमारियों को बेहद स्पष्ट और सटीक तरीके से देख और समझ सकेंगे।
अस्पताल प्रशासन ने स्वदेशी तकनीक का किया स्वागत
एम्स के प्रशासनिक और चिकित्सा नेतृत्व ने अस्पताल में इस स्वदेशी मशीन के शामिल होने पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर निखिल टंडन ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रोफेसर निखिल टंडन ने कहा, "हम खुश हैं कि भारत में अब एंडोस्कोप बनाने की फैक्ट्री लग गई है।" उन्होंने आगे कहा कि देश में तैयार की गई यह पहली एंडोस्कोपी मशीन अस्पताल की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देगी, जिससे डॉक्टरों के लिए अधिक से अधिक मरीजों को समय पर इलाज देना संभव हो सकेगा।
इससे पहले, भारत के प्रमुख अस्पतालों को एंडोस्कोपी जैसी संवेदनशील जांच प्रक्रियाओं के लिए पूरी तरह से विदेशों से आयात की जाने वाली महंगी मशीनों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रमोद गर्ग ने बताया कि यह नई प्रणाली विभाग के काम को काफी सुगम बना देगी। डॉ. प्रमोद गर्ग ने कहा, "यह सिस्टम विभाग की ताकत बढ़ाएगा और बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज आसान बनेगा।"
चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
भारत में चिकित्सा उपकरणों के स्थानीय स्तर पर निर्माण की यह पहल वैश्विक कंपनियों के दीर्घकालिक निवेश को दर्शाती है। फूजीफिल्म इंडिया के प्रमुख वाडा सान ने भारतीय बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य उत्पाद और बेहतरीन सेवाएं प्रदान करने के अपने संकल्प को दोहराया। वाडा सान ने कहा, "कंपनी लंबे समय तक भारत में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काम करती रहेगी।"
संस्थान के मीडिया विशेषज्ञों ने भी इस कदम को देश और मरीजों दोनों के लिए बेहद खास बताया है। PIC मीडिया सेल की इंचार्ज प्रोफेसर रीमा दादा ने इस पहल के दोहरे महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने समझाया कि पहला महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 'मेक इन इंडिया' अभियान के जरिए अब देश के भीतर ही उच्च तकनीक वाले जटिल चिकित्सा उपकरणों का निर्माण संभव हो पा रहा है। दूसरा लाभ यह है कि एम्स जैसे देश के सबसे बड़े और व्यस्त अस्पताल में इस स्वदेशी मशीन के आने से आम मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवा का स्तर बेहतर होगा। प्रोफेसर रीमा दादा ने कहा, "मेक इन इंडिया के तहत अब देश में ही आधुनिक मेडिकल उपकरण बन रहे हैं।" इससे पहले ऐसी जटिल तकनीक वाली मशीनें केवल विदेशों से ही मंगवाई जाती थीं।
जानिए कैसे काम करती है एंडोस्कोपी तकनीक और क्या हैं इसके फायदे
एंडोस्कोपी चिकित्सा जगत की एक ऐसी आधुनिक और न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया है, जिसकी मदद से डॉक्टर बिना किसी बड़े ऑपरेशन या चीर-फाड़ के शरीर के अंदरूनी अंगों की बारीकी से जांच कर पाते हैं। मुख्य रूप से इसका उपयोग पेट, अन्नप्रणाली और पाचन तंत्र के अन्य हिस्सों की जांच के लिए किया जाता है। इस जांच के दौरान, मरीज के मुंह के रास्ते गले से होते हुए पेट के अंदर एक पतली और बेहद लचीली ट्यूब डाली जाती है, जिसे एंडोस्कोप कहा जाता है। इस ट्यूब के अगले सिरे पर एक सूक्ष्म कैमरा और प्रकाश स्रोत लगा होता है, जो पेट के आंतरिक हिस्सों की वास्तविक समय में उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें और वीडियो डॉक्टर के सामने लगी स्क्रीन पर भेजता है। इसकी मदद से डॉक्टर अल्सर, सूजन, आंतरिक रक्तस्राव या किसी भी तरह की असामान्य गांठ जैसी बीमारियों का आसानी से और शुरुआती चरण में ही पता लगा लेते हैं। अब भारत में ही निर्मित इस नई तकनीक के आ जाने से जांच की सटीकता और बढ़ जाएगी, जिसका सीधा लाभ उन हजारों मरीजों को मिलेगा जो हर दिन एम्स की ओपीडी में परामर्श के लिए आते हैं।
















