पवन सिंह सावन में चिकन बनाते फंसे विवादों में, तिलक-लॉकेट पर भड़के लोगचित्रकूट में देवांगना घाटी के ऊंचे पहाड़ों पर बसा पंपापुर आश्रम, जहां आध्यात्म और प्रकृति का अनोखा मेलसोशल मीडिया पर छाए रवि किशन, 'मनी फॉलोज माई ब्रदर' मीम पर तोड़ी चुप्पीशाहजहांपुर के किसानों के लिए फूलगोभी की अगेती खेती से बंपर कमाई का मौकाअनुज अग्निहोत्री की यूपीएससी सफलता: 1997 के इस लोकप्रिय गाने ने ऐसे संभाला हौसलालाइव: यूएई का आरोप- ईरान ने तेल टैंकर पर किया हमला, ओमान ने होर्मुज़ वार्ता में प्रगति का दिया संकेतएलपीजी कनेक्शन पर ई-केवाईसी की अनिवार्यता, जानिए किन ग्राहकों पर गिरेगी गाजकिसान क्रेडिट कार्ड योजना: डिजिटल अपग्रेड और व्यापक दायरे से किसानों को मिल रहा है सीधा लाभघर पर ऐसे बनाएं बाजार जैसा मुलायम और ताजा मक्खन, मिनटों में छाछ और मक्खन हो जाएंगे अलगएक ही टेस्ट खेलकर समाप्त हो गया रॉबिन सिंह का रेड बॉल करियर, जानिए वनडे में कैसा रहा रिकॉर्ड
मालदीव राष्ट्रपति की सार्क को पुनर्जीवित करने की मांग पर भारत का करारा जवाब, कहा- दक्षिण एशिया जानता है बाधा कौन बन रहाभारत
28 जुल॰ 2026, 10:05 pm (12 दिन पहले)· 0

मालदीव राष्ट्रपति की सार्क को पुनर्जीवित करने की मांग पर भारत का करारा जवाब, कहा- दक्षिण एशिया जानता है बाधा कौन बन रहा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू द्वारा सार्क को फिर सक्रिय करने की वकालत पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पूरा दक्षिण एशिया जानता है कि क्षेत्रीय सहयोग में रुकावट के लिए कौन सा देश जिम्मेदार है।

विदेश मंत्रालय ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सार्क सम्मेलन और क्षेत्रीय सहयोग को दोबारा शुरू करने वाले बयान पर कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने बिना किसी मुल्क का सीधा नाम लिए स्पष्ट कर दिया कि पूरा दक्षिण एशिया भली-भांति जानता है कि क्षेत्रीय संगठन के काम में अडंगा कौन डाल रहा है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस विषय पर भारत की स्थिति साफ की।

सद्भावना और नीयत बिना संभव नहीं क्षेत्रीय सहयोग

रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत हमेशा से एक सशक्त और असरदार क्षेत्रीय सहयोग का पक्षधर रहा है। भारत ने बीते कई दशकों से इस दिशा में निरंतर प्रयास भी किए हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र का हर देश इस सच्चाई से पूरी तरह वाकिफ है कि कौन सा देश और किस तरह का आचरण सार्क की गतिविधियों में निरंतर रुकावटें पैदा कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, किसी भी क्षेत्रीय सहयोग मंच की सफलता के लिए सदस्य देशों के बीच अच्छी नीयत और आपसी सद्भावना का होना प्राथमिक शर्त है। जब तक सीमा पार से नकारात्मक नीतियां जारी रहेंगी, तब तक कोई भी मंच सुचारू रूप से कार्य नहीं कर सकता।

ये भी पढ़ें

मुइज्जू की सार्क को सक्रिय करने की अपील

यह पूरा घटनाक्रम मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के उस भाषण के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को एक बार फिर से सक्रिय करने की पुरजोर वकालत की थी। मुइज्जू ने अपने संबोधन के दौरान सदस्य देशों के बीच जारी आपसी मतभेदों को बातचीत और संवाद के जरिए हल करने की सलाह दी थी। हालांकि, भारत के आधिकारिक बयान से यह साफ संकेत मिल गया है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पड़ोसी देश के रवैये में बदलाव आए बिना सार्क को दोबारा सक्रिय करना मुमकिन नहीं है।

2016 के उरी हमले के बाद से ठप है सार्क शिखर सम्मेलन

सार्क आठ दक्षिण एशियाई देशों का एक प्रमुख क्षेत्रीय समूह है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल हैं। इस संगठन का अंतिम शिखर सम्मेलन वर्ष 2014 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित हुआ था। इसके बाद अगला सम्मेलन वर्ष 2016 में पाकिस्तान के इस्लामाबाद शहर में होना तय किया गया था।

हालांकि, 18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी स्थित भारतीय सैन्य शिविर पर एक जघन्य और कायरतापूर्ण आतंकवादी हमला हुआ था। इस हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के साए में किसी भी कूटनीतिक वार्ता या सम्मेलन में भाग लेने से साफ़ मना कर दिया था। भारत के इस कड़े फैसले के समर्थन में बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी थी। सहयोगियों के इस बहिष्कार के बाद से सार्क व्यावहारिक रूप से पूरी तरह निष्क्रिय और ठप पड़ा हुआ है।

सवाल-जवाब

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने सार्क के बारे में क्या कहा?
मुइज्जू ने सार्क को फिर से सक्रिय करने और सदस्य देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की वकालत की थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने कहा कि पूरा दक्षिण एशिया जानता है कि सार्क के काम में कौन बाधा डाल रहा है और क्षेत्रीय सहयोग के लिए सद्भावना प्राथमिक शर्त है।
सार्क का अंतिम शिखर सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित हुआ था?
सार्क का अंतिम शिखर सम्मेलन वर्ष 2014 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित हुआ था।
2016 में इस्लामाबाद सार्क सम्मेलन रद्द क्यों हुआ था?
18 सितंबर 2016 को उरी में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में भारत ने भाग लेने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी बैठक का बहिष्कार किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR