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मऊ के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में कागजों पर हैं 15 बेड, ज़मीन पर एक भी नहीं मिलने से मरीज परेशानउत्तर प्रदेश
22 अक्तू॰ 2026, 2:25 pm (6 दिन पहले)· 2

मऊ के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में कागजों पर हैं 15 बेड, ज़मीन पर एक भी नहीं मिलने से मरीज परेशान

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के एक राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में कागजों पर 15 बेड की सुविधा दर्ज है, लेकिन ज़मीन पर एक भी बेड न होने के कारण मरीजों को मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में स्थित एक राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बदइंतोमी की एक बड़ी मिसाल पेश कर रहा है। कागजों पर इस अस्पताल के भीतर इलाज के लिए 15 बेड स्थापित होने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि ज़मीन पर एक भी बेड मौजूद नहीं है। इस बुनियादी कमी के चलते दूर-दूर से इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बेड न होने की वजह से गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा सकता, जिससे उन्हें मजबूरन महंगे निजी क्लीनिकों और अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय लोगों और मरीजों की अब केवल एक ही मांग है कि इस अस्पताल में जल्द से जल्द बेड की मु मुकम्मल व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

मरीजों को उठाना पड़ता है निजी अस्पतालों का भारी खर्च

अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे प्रेमचंद प्रजापति ने बताया कि जो लोग अत्यधिक बीमार या गंभीर स्थिति में होते हैं, वे यहां डॉक्टर के पास आते तो हैं लेकिन बेड न होने के कारण उन्हें भर्ती नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में उन्हें बाहर के प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है, जहां उनकी जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। यदि इसी आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में मरीजों को भर्ती करने की मुकम्मल व्यवस्था होती, तो लोगों को अपनी गाढ़ी कमाई महंगे इलाज में खर्च नहीं करनी पड़ती। मरीजों का यह भी मानना है कि आयुर्वेदिक औषधियां बीमारी को जड़ से खत्म करने का काम करती हैं, जिसके कारण इस केंद्र पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें निराशा हाथ लगती है।

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डॉक्टर रहते हैं मौजूद, पर संसाधनों का है भारी अभाव

स्थानीय मरीज प्रेमचंद का यह भी कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं और समय पर आते हैं। वे आने वाले मरीजों की जांच करके उन्हें सही दवाइयां भी लिखते हैं और वितरित करते हैं। हालांकि, गंभीर मरीजों के मामले में डॉक्टर केवल दवाएं देकर ही काम चला सकते हैं क्योंकि उन्हें अस्पताल में एडमिट करने का कोई विकल्प ही नहीं है। यही कारण है कि मरीजों को मजबूरी में आयुर्वेद छोड़कर दूसरी चिकित्सा पद्धतियों और बाहर के प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। यदि इस चिकित्सालय के भीतर बेड की उचित सुविधा मुहैया करा दी जाए, तो इस इलाके के लोगों को आयुर्वेदिक उपचार का पूरा और बेहतर लाभ मिल सकेगा। स्थानीय नागरिकों की ओर से लगातार यह मांग उठाई जा रही है कि प्रशासन कागजों पर दर्ज इन 15 बेडों को धरातल पर उतारे।

स्टाफ की कमी और बुनियादी सुविधाओं का रोड़ा

एक अन्य स्थानीय निवासी राज नारायण यादव ने अपनी बात रखते हुए बताया कि अस्पताल की इमारत तो खड़ी कर दी गई है और कागजों में 15 बेड की बात भी कही गई है, लेकिन धरातल पर भर्ती के लिए एक अदद बेड भी नजर नहीं आता। इस व्यवस्था के न होने से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने आए लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अविलंब यहां बेड की व्यवस्था करे, ताकि मरीजों को इधर-उधर न भटकना पड़े। इसके साथ ही अस्पताल में केवल बेड ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त स्टाफ की भी सख्त जरूरत है क्योंकि मौजूदा समय में कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। यदि अस्पताल प्रशासन यहाँ पर्याप्त स्टाफ और बेड दोनों की व्यवस्था सुनिश्चित कर दे, तो क्षेत्र के तमाम जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिल जाएगी।

चिकित्सा प्रभारी ने बताई जगह की कमी की समस्या

पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रभारी सत्येंद्र साहू ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के लिए 15 बेड की स्थापना हेतु जगह को चिन्हित करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, उनकी मुख्य अड़चन यह है कि नगर पंचायत की तरफ से अभी तक इसके लिए भूमि का आवंटन नहीं किया जा रहा है। जैसे ही जमीन की यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, अस्पताल को उस नई जगह पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा और सभी 15 बेड सुचारू रूप से स्थापित कर दिए जाएंगे। इस क्षेत्र में एक बड़ा आयुर्वेदिक अस्पताल खोलने और मरीजों को तमाम जरूरी आधुनिक सुविधाएं देने की योजना है। इस सिलसिले में कई बार प्रशासनिक स्तर पर आवेदन भी दिए जा चुके हैं, लेकिन नगर पंचायत द्वारा अब तक जगह चिन्हित न किए जाने के कारण काम अटका हुआ है। जमीन मिलते ही अस्पताल का निर्माण कार्य और अन्य सुविधाएं वहां स्थापित कर दी जाएंगी।

सवाल-जवाब

मऊ के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में कागजों पर कितने बेड स्थापित बताए गए हैं?
कागजों पर इस अस्पताल में 15 बेड स्थापित बताए गए हैं।
धरातल पर अस्पताल में कितने बेड मौजूद हैं?
धरातल पर इस अस्पताल में एक भी बेड मौजूद नहीं है।
मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा क्यों लेना पड़ता है?
अस्पताल में भर्ती होने के लिए बेड की कोई सुविधा न होने के कारण मरीजों को मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
अस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रभारी कौन हैं?
अस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रभारी सत्येंद्र साहू हैं।
बेड और अस्पताल को शिफ्ट करने में क्या बाधा आ रही है?
नगर पंचायत द्वारा अभी तक अस्पताल के लिए भूमि अलॉट नहीं की गई है, जिससे जगह चिन्हित करने में देरी हो रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·5 दिन पहले

कागजों पर अस्पताल चलाना और मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में लूटने के लिए मजबूर करना सरासर भ्रष्टाचार है। डॉक्टर मेहनत कर रहे हैं पर सरकार की लापरवाही से गरीबों की जान पर बन आई है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

कागजों पर पंद्रह बेड और ज़मीन पर एक भी नहीं, भ्रष्टाचार की इससे साफ़ मिसाल क्या होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

अर्जुन भाई, भ्रष्टाचार तो है ही, पर हो सकता है कागजों पर बेड आने के बाद अभी बजट या डिलीवरी अटकी हो।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

पंद्रह बेड सिर्फ कागजों पर कैसे हो सकते हैं, अस्पताल बनने के समय ही किसी ने जांच नहीं की क्या?

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

अरे करण भाई, मऊ के कई अस्पतालों में कागजी आंकड़े और असलियत में जमीन-आसमान का फर्क रहता है, यह तो आम बात हो गई है।

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