देश की राजधानी दिल्ली से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया है कि वे अभी अपना अनशन खत्म करने वाले नहीं हैं। मंगलवार देर रात तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता शिफ्ट किया गया था, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे और अनशन तोड़ने की गुजारिश की। लेकिन वांगचुक ने दोनों मंत्रियों को एक तीखा पत्र लिखकर सरकार के सामने कड़ी शर्तें रख दी हैं। पत्र में उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक प्रदर्शनकारी छात्रों पर से कानूनी कार्रवाई का खतरा पूरी तरह नहीं हटाया जाता, उनका उपवास अनिश्चित काल तक चलता रहेगा। उन्होंने लिखा है कि उनकी अपनी जान से कहीं ज्यादा जरूरी छात्रों का भविष्य और उनके हित हैं। अपने पत्र में उन्होंने सरकार को साफ शब्दों में बता दिया है कि जब तक यह भरोसा नहीं मिलता, वे किसी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।
अनशन खत्म करने के लिए वांगचुक की मुख्य शर्त क्या है?
पत्र में वांगचुक की सबसे बड़ी मांग छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी है। उनका कहना है कि संसद चलो आंदोलन में उतरे किसी भी युवा को किसी तरह की सजा या कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। वे चाहते हैं कि सरकार लिखित में यह भरोसा दे कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ बदले की भावना से या दंडात्मक तरीके से कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। वांगचुक का तर्क है कि इन नौजवानों ने बस एक निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था के लिए आवाज उठाई है, इससे ज्यादा उनकी कोई गलती नहीं है। जब तक यह लिखित गारंटी नहीं मिलती, वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपने पत्र में सीधे शब्दों में लिखा, "बिना इस गारंटी के मैं अपना आंदोलन पीछे नहीं लूंगा।"
अस्पताल में मंत्रियों से मुलाकात में और क्या तय हुआ?
वांगचुक ने पत्र में बीती रात मेदांता अस्पताल में हुई बातचीत का पूरा ब्योरा भी साझा किया है। उनके मुताबिक सरकार की तरफ से भरोसा दिलाया गया कि परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद जिन छात्रों ने आत्महत्या कर ली, उनके परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा जवाबदेही तय करने के मकसद से संसद के भीतर एक ठोस चर्चा कराने की बात भी सामने आई, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर भी गौर करने का जिक्र हुआ। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि सरकार इन मुद्दों को हल्के में नहीं लेगी और युवाओं की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उनका मानना है कि यह भरोसा तभी मायने रखेगा जब उसे अमल में लाया जाएगा।
65 सांसदों की चिट्ठी पर वांगचुक ने क्या कहा?
20 जुलाई को हुए संसद चलो मार्च का हवाला देते हुए वांगचुक ने पुलिस की सख्ती पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा कि भारी पुलिस बल इस्तेमाल किए जाने के बावजूद यह मार्च शुरू से आखिर तक शांतिपूर्ण बना रहा। वांगचुक ने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े करीब 65 सांसदों ने उन्हें चिट्ठी लिखकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया है। इन सांसदों ने उनसे कहा कि देश की सेवा के लिए अभी उन्हें आगे बहुत लंबा काम करना बाकी है। वांगचुक ने भी माना कि वे जल्द से जल्द अपने छात्रों और शिक्षा के काम में लौटना चाहते हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे उन युवाओं की कीमत पर ऐसा कभी नहीं करेंगे, जिनके लिए यह पूरा आंदोलन शुरू हुआ था। इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर की निगाहें टिकी हैं और आने वाले दिनों में सरकार का रुख क्या रहता है, इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।



















