सर्दियों की दस्तक के बीच देश के उत्तरी मैदानी इलाकों में वायु प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है। दिवाली के त्योहार से पहले ही उत्तर भारत के कई शहरों की फिजाओं में प्रदूषण का गंभीर स्तर घुल चुका है, जिससे आम जनजीवन और सांस लेने की सामान्य प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। आमतौर पर सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा होती है, मगर ताजा हालात बताते हैं कि इस बार संकट केवल राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई औद्योगिक और रिहायशी शहरों ने प्रदूषण के मामले में दिल्ली को कहीं पीछे छोड़ दिया है। हवा में धुंध और जहरीले कणों की मौजूदगी के चलते कई जगहों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक सीमाओं को पार कर चुका है, जिसके कारण लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
मेरठ देश में सबसे ऊपर, हापुड़ और पानीपत की स्थिति भी गंभीर
सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर मेरठ देश का सबसे प्रदूषित केंद्र बनकर उभरा है। मेरठ में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 987 दर्ज किया गया, जो किसी भी आबादी के लिए बेहद खतरनाक स्तर माना जाता है। इस सूची में दूसरे पायदान पर उत्तर प्रदेश का ही हापुड़ शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 877 के आंकड़े तक पहुंच गया। तीसरे स्थान पर हरियाणा का प्रमुख औद्योगिक केंद्र पानीपत दर्ज हुआ, जहां सुबह के वक्त AQI का स्तर 842 रहा। इन तीनों शहरों में हवा का स्तर इतना खराब हो चुका है कि खुले वातावरण में सामान्य सैर या कामकाज करना भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहा है। हवा में फैले इस घने प्रदूषण के कारण सुबह के समय दृश्यता पर भी भारी असर पड़ा है और लोग दिन की शुरुआत से ही भारी घुटन महसूस कर रहे हैं।
हरियाणा के कई शहरों में फैला प्रदूषण का असर
वायु प्रदूषण का यह भारी दबाव केवल उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्य हरियाणा के कई शहरों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। सुबह 7:45 बजे के आंकड़ों के अनुसार, पानीपत के अलावा हरियाणा के कई अन्य जिले भी इस जहरीली हवा की चपेट में हैं। सोनीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक 781 दर्ज किया गया, जबकि रोहतक में यह आंकड़ा 740 तक पहुंच गया। कैथल शहर में AQI 702 के स्तर पर रहा। इसी तरह करनाल में यह माप 699 और फरीदाबाद में 663 दर्ज किया गया। हरियाणा के कुल सात शहर ऐसे हैं जहां हवा की गुणवत्ता बेहद खराब और खतरनाक श्रेणी में दर्ज की गई है। इन शहरों में बढ़ती ठंड और वातावरण में तैरती धूल व धुएं की वजह से प्रदूषण जमीन की सतह के बेहद करीब ठहर गया है, जिससे पूरे क्षेत्र के नागरिकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब
उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भी स्थिति किसी भी तरह से राहत भरी नजर नहीं आ रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सुबह के समय AQI 786 दर्ज किया गया, जिसके चलते यह शहर देश के चौथे सबसे प्रदूषित केंद्र के रूप में सामने आया। वहीं राष्ट्रीय राजधानी से बिल्कुल सटे गाजियाबाद शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 700 के आंकड़े को छू गया। गाजियाबाद इस सूची में आठवें स्थान पर रहा। दिल्ली-NCR के इस पूरे औद्योगिक और घनी आबादी वाले क्षेत्र में वाहनों के लगातार उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों और मौसमी बदलावों के कारण हवा का यह स्तर सीधे तौर पर स्थानीय निवासियों की दिनचर्या और स्वास्थ्य को चोट पहुंचा रहा है।
दिल्ली में AQI 589 दर्ज, शीर्ष दस से बाहर लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर 589 दर्ज किया गया। हालांकि मेरठ, हापुड़ और पानीपत जैसे पड़ोसी शहरों की तुलना में दिल्ली का आंकड़ा कम रहा, जिसकी वजह से दिल्ली देश के शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल नहीं हुई। इसके बावजूद 589 का स्तर किसी भी सामान्य स्वास्थ्य मानक के लिहाज से बेहद खराब और अस्वस्थ श्रेणी में आता है। दिल्ली-NCR क्षेत्र में फैले इस व्यापक प्रदूषण को देखते हुए नागरिकों को सुबह और देर शाम के समय खुले स्थानों पर भारी शारीरिक परिश्रम करने से बचने की चेतावनी दी गई है। आने वाले दिनों में यदि मौसमी कारकों में बदलाव नहीं हुआ, तो त्योहार के नजदीक आते-आते यह स्थिति और अधिक विकट हो सकती है।
बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां
हवा में प्रदूषण का यह खतरनाक स्तर सबसे पहले इंसानी श्वसन तंत्र पर सीधा असर डालता है। फेफड़ों और श्वास नली में सूजन, लगातार खांसी, सीने में भारीपन और आंखों में तीखी जलन इसके शुरुआती लक्षण बनकर उभरते हैं। विशेष रूप से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन रोगों से जूझ रहे मरीजों को इस माहौल में अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा श्वसन तंत्र अधिक संवेदनशील होने के कारण उन्हें प्रदूषण के सीधे संपर्क से बचाना बहुत आवश्यक है। जब भी घर से बाहर निकलना अनिवार्य हो, तो साधारण कपड़े के स्थान पर उचित फिटिंग वाला मास्क लगाना बेहद जरूरी है। शरीर में किसी भी प्रकार की असामान्य सांस की परेशानी या आंखों में लगातार जलन होने पर उसे अनदेखा करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि दिवाली से पहले ही हवा का यह हाल आने वाले हफ्तों में और बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियां खड़ी कर सकता है।





















