त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले ही देश की राजधानी में वायु गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। आतिशबाजी शुरू होने से पहले ही शहर के कई हिस्सों में वातावरण में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ चुका है। इस दमघोंटू स्थिति के कारण स्थानीय निवासियों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कई लोग मौसमी बीमारियों और श्वसन संबंधी तकलीफों की चपेट में आने लगे हैं। मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 400 के गंभीर आंकड़े को पार कर खतरनाक श्रेणी में दर्ज किया गया है।
आठ प्रमुख निगरानी केंद्रों पर हालात गंभीर
राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए प्रदूषण मापक तंत्रों के ताजा आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मंगलवार को शहर के आठ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ यानी सीवियर श्रेणी में दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, समूची दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 331 रिकॉर्ड किया गया, जो मानकों के आधार पर ‘बेहद खराब’ श्रेणी के अंतर्गत आता है। हवा में फैले इस गाढ़े धुंधलेपन ने सामान्य दिनचर्या के साथ-साथ सुबह की सैर पर निकलने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।
प्रदूषण की रोकथाम के लिए ग्रैप-2 के उपाय सक्रिय
प्रदूषण के स्तर में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन के तहत सोमवार से दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का दूसरा चरण यानी ग्रैप-2 आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। इसके तहत धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर सख्ती और अन्य तात्कालिक उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले दिनों में प्रदूषण को और विकराल रूप लेने से रोका जा सके।




















