पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी राज्य मिजोरम में देर रात अचानक जमीन हिलने से लोगों के बीच घबराहट फैल गई। सीमावर्ती चंफाई जिले में दर्ज हुए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.7 रही। देश के अलग-अलग भूभागों में हाल के दिनों में दर्ज हो रही भूगर्भीय गतिविधियों के बीच यह ताजा घटना सामने आई है। झटके रात के उस वक्त महसूस किए गए जब ज्यादातर लोग सोने की तैयारी कर रहे थे या गहरी नींद में थे।
चंफाई में 24 किलोमीटर नीचे था केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक, मिजोरम में यह हलचल मंगलवार रात ठीक 11 बजकर 45 मिनट पर दर्ज की गई। भूकंप का मुख्य केंद्र चंफाई जिले में जमीन की सतह से लगभग 24 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। रात के सन्नाटे में जैसे ही हल्के कंपन का अहसास हुआ, कई घरों में बर्तनों और पंखों में हरकत देखी गई। हालांकि तीव्रता मध्यम स्तर से नीचे रहने की वजह से किसी बड़े नुकसान या जानमाल की हानि की तत्काल कोई खबर सामने नहीं आई है।
कश्मीर के कुलगाम में भी दर्ज हुआ था झटका
मिजोरम की इस घटना से कुछ ही दिन पहले उत्तर भारत में भी ऐसी ही हलचल देखी गई थी। बीते शुक्रवार की सुबह जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में धरती कांपी थी। वहां सुबह के समय महसूस किए गए झटके की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.6 मापी गई थी। उस घटना में भूकंप का केंद्र सतह से केवल 10 किलोमीटर नीचे दर्ज हुआ था। उथले केंद्र की वजह से कंपन का असर तेज महसूस हुआ था, जिसके चलते सो रहे नागरिक घबराकर तुरंत खुले स्थानों की ओर भागे थे और कुछ समय तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही थी।
जमीन के नीचे प्लेटों की टक्कर से पैदा होती है ऊर्जा
पृथ्वी की बाहरी परत कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है, जो बहुत धीमी गति से तैरती रहती हैं। जब ये चट्टानी प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे पर दबाव बनाती हैं या खिसकती हैं, तो उनके किनारों पर जबर्दस्त तनाव इकट्ठा हो जाता है। एक सीमा के बाद जब चट्टानें इस भारी दबाव को नहीं संभाल पातीं, तो वर्षों से संचित ऊर्जा अचानक तरंगों के रूप में बाहर फूट पड़ती है। यही ऊर्जा तरंगें सतह पर पहुंचकर कंपकंपी और झटकों का रूप ले लेती हैं, जिसे हम भूकंप कहते हैं।
















