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मध्य एशिया में लगातार हिली ज़मीन, ताजिकिस्तान में सवा घंटे के अंतराल पर दर्ज हुए छह भूकंपदुनिया
4 नव॰ 2026, 6:44 am (1 घंटे पहले)· 1

मध्य एशिया में लगातार हिली ज़मीन, ताजिकिस्तान में सवा घंटे के अंतराल पर दर्ज हुए छह भूकंप

ताजिकिस्तान में बुधवार तड़के 76 मिनट के भीतर 3.2 से 5.3 तीव्रता वाले छह झटके महसूस किए गए, जिससे पहाड़ी इलाकों में दहशत फैल गई। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव वाले पामीर क्षेत्र में यह हलचल दर्ज हुई।

मध्य एशियाई मुल्क ताजिकिस्तान में बुधवार, 4 नवंबर की अलसुबह धरती के सीने में जबरदस्त हलचल देखी गई। तड़के के वक्त जब अधिकांश आबादी गहरी नींद में थी, तब सिर्फ 1 घंटे 16 मिनट के अंतराल में जमीन छह मर्तबा डोली। रिक्टर पैमाने पर इन झटकों की तीव्रता 3.2 से लेकर 5.3 मापी गई। बैक-टू-बैक आए इन कंपनों के चलते स्थानीय बाशिंदों में भारी खौफ का माहौल बन गया और लोग किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से सहम उठे। हालांकि किसी बड़े नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई, मगर इतनी कम अवधि में बार-बार कंपन होना भूगर्भीय वैज्ञानिकों के लिए भी निगरानी का विषय बन गया है।

76 मिनट में सिलसिलेवार दर्ज हुए छह झटके

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के सिस्मोलॉजिकल नेटवर्क पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, इस सिलसिले की शुरुआत तड़के 3 बजकर 4 मिनट पर हुई। उस वक्त आया झटका पूरी श्रृंखला में सबसे ताकतवर साबित हुआ, जिसकी तीव्रता 5.3 मापी गई और इसका केंद्र भूतल से 55 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। अभी लोग इस झटके से संभल भी नहीं पाए थे कि ठीक 5 मिनट बाद, यानी 3 बजकर 9 मिनट पर 4.5 तीव्रता का दूसरा झटका आ धमका, जिसका हाइपोसेंटर जमीन से महज 10 किलोमीटर नीचे था।

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इसके बाद भी धरती के शांत होने का नाम नहीं लिया। 3 बजकर 24 मिनट पर 3.9 तीव्रता का तीसरा कंपन रिकॉर्ड हुआ, जो 10 किलोमीटर गहराई पर केंद्रित था। इसके उन्नीस मिनट बाद, यानी सुबह 3 बजकर 43 मिनट पर 3.3 तीव्रता का चौथा झटका महसूस किया गया, जिसकी गहराई भी 10 किलोमीटर ही पाई गई। राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को 4 बजकर 3 मिनट पर फिर 3.2 तीव्रता के पांचवें धक्के का सामना करना पड़ा, जो अपेक्षाकृत काफी नीचे यानी 170 किलोमीटर की गहराई में उत्पन्न हुआ था। अंततः 4 बजकर 20 मिनट पर 4.2 तीव्रता का छठा झटका दर्ज हुआ, जिसका केंद्र भी 10 किलोमीटर नीचे था। इस तरह कुल 76 मिनट के भीतर छह बार हलचल दर्ज की गई।

उथले केंद्र बने चिंता की मुख्य वजह

वैज्ञानिक विश्लेषण के दृष्टिकोण से देखें तो इन छह झटकों में से चार झटके जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे केंद्रित थे। सिस्मोलॉजी में 10 किलोमीटर की गहराई को अत्यंत उथला यानी शैलो अर्थक्वेक माना जाता है। ऐसे कंपनों की ऊर्जा सतह तक बिना अधिक क्षय के पहुंचती है, जिससे जमीन पर कंपन का अहसास कहीं अधिक तीखा और भयावह होता है। यद्यपि एक कंपन 170 किलोमीटर गहरा और पहला झटका 55 किलोमीटर गहराई पर था, लेकिन लगातार 10 किलोमीटर वाले उथले आफ्टरशॉक्स ने इलाके के लोगों की चिंता कई गुना बढ़ा दी।

पामीर और हिंदूकुश बेल्ट में क्यों कांपती है धरती?

भौगोलिक और भूगर्भीय दृष्टि से ताजिकिस्तान एक अत्यधिक संवेदनशील पर्वतीय भूभाग पर बसा हुआ है। देश का एक विशाल इलाका पामीर तथा हिंदूकुश की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं के दायरे में फैला है। यह पूरा क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय सिस्मिक जोन्स में गिना जाता है। इस इलाके के गर्भ में भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार उत्तर की दिशा में खिसकते हुए विशाल यूरेशियन प्लेट पर दबाव बना रही है। इन दोनों महाद्वीपीय प्लेटों के निरंतर टकराव और रगड़ की वजह से भूगर्भीय चट्टानों में भारी तनाव संचित होता रहता है। जब यह ऊर्जा अचानक विमुक्त होती है, तो सतह पर तेज झटके महसूस होते हैं। यही कारण है कि पामीर और हिंदूकुश के आसपास के इलाकों में निरंतर सिस्मिक उथल-पुथल बनी रहती है।

सवाल-जवाब

ताजिकिस्तान में कुल कितने भूकंप दर्ज किए गए और कितनी देर में आए?
ताजिकिस्तान में 1 घंटे 16 मिनट (76 मिनट) के भीतर कुल छह भूकंप दर्ज किए गए।
इन छह झटकों में सबसे तेज भूकंप की तीव्रता कितनी थी?
सबसे ताकतवर भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.3 मापी गई, जो सुबह 3 बजकर 4 मिनट पर आया था।
इन भूकंपों की गहराई कितनी रिकॉर्ड की गई?
चार भूकंप 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आए, जबकि पहला झटका 55 किलोमीटर और पांचवां झटका 170 किलोमीटर गहराई पर दर्ज हुआ।
ताजिकिस्तान में इतनी ज्यादा भूकंपीय हलचल क्यों होती है?
ताजिकिस्तान पामीर और हिंदूकुश पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने से लगातार भूकंप आते हैं।
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टिप्पणियाँ 4

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·15 मिनट पहले

सिर्फ सत्तर मिनट में छह बार धरती का कांपना डरावना है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·15 मिनट पहले

आयशा जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मैं जब दुशान्बे में था, तब भी एक बार ऐसा ही झटका महसूस हुआ था, रात में हिलता कमरा आज भी डरा देता है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·38 मिनट पहले

इतनी कम देर में लगातार छह झटके! भगवान भला करे वहां के लोगों का, पहाड़ों में ऐसा कंपन डरा देता है।

Rohan Verma@rohan-verma·37 मिनट पहले

कार्लोस, बिल्कुल सही कहा आपने। पामीर के पहाड़ों में इतनी गहराई पर लगातार छह झटके आना सचमुच सिहरा देने वाला है, भगवान वहां के लोगों की रक्षा करे।

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