मिजोरम सरकार ने राज्य में आतिशबाजी के उपयोग और भंडारण को नियंत्रित करने के लिए बने नए कानून को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। आइजोल स्थित सचिवालय सम्मेलन कक्ष में मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता गृह मंत्री के. सपडांगा ने की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मिजोरम आतिशबाजी नियमन कानून, 2026 के क्रियान्वयन को लेकर रणनीति तैयार करना और केवल कानूनी सख्ती पर निर्भर रहने के बजाय जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना था।
प्रशासनिक और नागरिक संगठनों की साझा बैठक
इस विचार-विमर्श सत्र में शासन और समाज के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। बैठक में मुख्य सचिव खिल्ली राम मीणा, पुलिस महानिदेशक शरद अग्रवाल, गृह विभाग तथा सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा आइजोल के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक के साथ-साथ सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन, आइजोल नगर निगम और मिजोरम मर्चेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी पक्षों ने आतिशबाजी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए साझा जिम्मेदारियों पर चर्चा की।
कानूनी बाध्यता से अधिक स्वैच्छिक अनुपालन को प्राथमिकता
गृह मंत्री के. सपडांगा ने बैठक में सरकार द्वारा आतिशबाजी पर रोक और नियमन के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दंडात्मक कार्रवाई के दम पर कानून लागू करने की तुलना में पटाखों और आतिशबाजी के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना अधिक कारगर सिद्ध हो सकता है। गृह मंत्री ने राज्य के नागरिकों से नियमों का स्वैच्छिक अनुपालन करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने मिजोरम के वातावरण को शांत, स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बनाए रखने में यंग मिजो एसोसिएशन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि चर्चों, स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से ही इस कानून को पूरी तरह सफल बनाया जा सकता है।
तीन स्तरीय निगरानी तंत्र और नए प्रावधान
बैठक के दौरान गृह सचिव वनलालमाविया (आईएएस) ने नए कानून के प्रमुख प्रावधानों को विस्तार से प्रस्तुत किया। यह कानून पूरे मिजोरम में पटाखों के कब्जे, बिक्री और उपयोग को विनियमित करता है तथा उल्लंघन करने वालों के लिए जुर्माने व सजा का प्रावधान करता है। कानून के सुचारू संचालन के लिए तीन स्तरों पर निगरानी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें उच्च स्तरीय समिति, जिला पर्यवेक्षी समितियां और स्थानीय पर्यवेक्षी समितियां शामिल हैं। प्रशासन ने मीडिया माध्यमों, स्थानीय चर्चों और समुदाय के अगुआ लोगों के जरिए जागरूकता फैलाने की योजना बनाई है। इसके अलावा आगामी क्रिसमस पर्व को देखते हुए मिजोरम मर्चेंट एसोसिएशन के साथ मिलकर काम करने पर सहमति बनी ताकि राज्य की सीमाओं से पटाखों का अनधिकृत प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके।



















