देश के दो अलग-अलग हिस्सों में चंद घंटों के अंतराल पर भूकंपीय हलचल दर्ज की गई है। उत्तर भारत के पर्वतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के बाद पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में भी धरती डोलने से स्थानीय निवासियों में घबराहट फैल गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि दोनों ही घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि अथवा संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं मिली है। झटके महसूस होते ही कई इलाकों में लोग एहतियात के तौर पर घरों से बाहर निकल आए।
अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में सुबह दर्ज हुए झटके
पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में मंगलवार 3 नवंबर की सुबह धरती कांप उठी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यानी नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (एनसीएस) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह झटका सुबह ठीक 6 बजकर 43 मिनट और 16 सेकंड पर दर्ज किया गया। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.0 मापी गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस भूकंप का अधिकेंद्र जमीन की सतह से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। सुबह के वक्त अचानक हुए इस कंपन से लोग सहम गए, लेकिन तीव्रता कम होने के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
सोमवार देर रात जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हिली थी जमीन
अरुणाचल प्रदेश में सुबह आए इस झटके से कुछ ही घंटे पहले उत्तरी क्षेत्र के जम्मू-कश्मीर में भी जमीन हिली थी। किश्तवाड़ जिले में सोमवार की रात 10 बजकर 56 मिनट पर स्थानीय लोगों ने कंपन का अनुभव किया। रिक्टर पैमाने पर किश्तवाड़ में आए इस भूकंप की तीव्रता 3.1 रिकॉर्ड की गई। रात के सन्नाटे में अचानक धरती हिलने से लोग घबराकर खुले स्थानों की तरफ दौड़ पड़े। प्रशासनिक स्तर पर की गई शुरुआती समीक्षा में यहां भी किसी प्रकार के नुकसान या किसी नागरिक के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
हिमालयी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में क्यों होती है लगातार हलचल?
भौगोलिक दृष्टिकोण से भारत के कई भूभाग भूकंप के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। विशेष तौर पर हिमालय की पर्वत शृंखलाओं से सटे इलाके और पूर्वोत्तर भारत के राज्य सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित हैं। भूगर्भीय वैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट की दिशा में आगे बढ़ रही है। इन दोनों विशाल प्लेटों के निरंतर घर्षण और आपस में टकराने के कारण धरती के आंतरिक भाग में भारी ऊर्जा एकत्रित होती रहती है। जब यह संचित ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो सतह पर तेज कंपन महसूस होता है। जम्मू-कश्मीर जहां संवेदनशील हिमालयी बेल्ट में आता है, वहीं अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर की भूगर्भीय फॉल्ट लाइन पर स्थित है, जिसकी वजह से इन दोनों राज्यों में समय-समय पर इस तरह के झटके आते रहते हैं।
















