भारतीय चिकित्सा जगत के जाने-माने न्यूरोसर्जन और पद्मश्री से विभूषित प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार महापात्र का सोमवार रात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे और संस्थान में तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों के लिए उपचाराधीन थे। उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी और एक पुत्री हैं। डॉ. महापात्र के निधन के समाचार के बाद समूचे चिकित्सा जगत और देशभर में व्यापक शोक व्यक्त किया जा रहा है।
स्वास्थ्य समस्याएं और दिल्ली में उपचार
डॉ. महापात्र लंबे समय से मस्तिष्क कैंसर के अत्यंत गंभीर रूप ग्लियोब्लास्टोमा से जूझ रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के पश्चात बीते महीने दो अक्टूबर को उन्हें विशेष विमान से भुवनेश्वर से नई दिल्ली स्थित एम्स लाया गया था। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनके ब्रेन स्ट्रोक का उपचार चल रहा था। सोमवार रात चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान ही उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार को अंतिम संस्कार संपन्न कराने के लिए भुवनेश्वर ले जाया जाएगा।
जग्गा और कालिया का ऐतिहासिक ऑपरेशन
डॉ. अशोक कुमार महापात्र के चिकित्सकीय जीवन की सबसे प्रमुख सफलताओं में वर्ष 2017 की वह जटिल सर्जरी शामिल है, जब उन्होंने सिर से जुड़े जुड़वां बालकों जग्गा और कालिया को सफलतापूर्वक अलग किया था। ओडिशा के मूल निवासी इन दोनों बच्चों को अलग करने के लिए नई दिल्ली एम्स में 16 घंटे लंबा विस्तृत ऑपरेशन संचालित किया गया था। भारत में अपने स्वरूप की यह पहली ऐतिहासिक सर्जरी मानी गई, जिसने देश-विदेश में व्यापक ध्यान आकर्षित किया और चिकित्सा विज्ञान में नए प्रतिमान स्थापित किए।
एम्स भुवनेश्वर की स्थापना और पद्म सम्मान
चिकित्सा क्षेत्र में असाधारण शोध और असाधारण सेवाओं को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2024 में डॉ. महापात्र को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से अलंकृत किया था। इसके अतिरिक्त, ओडिशा में शीर्ष स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास में भी उनकी केंद्रीय भूमिका रही। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर की स्थापना में महत्वपूर्ण दायित्व निभाया और संस्थान के प्रथम निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं प्रदान की थीं।
राजनेताओं और प्रख्यात हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
डॉ. महापात्र के निधन पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से व्यापक संवेदनाएं व्यक्त की गई हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश साझा करते हुए लिखा कि देश के प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन के रूप में उन्होंने ओडिशा और पूरे देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं और शोध में डॉ. महापात्र के अतुलनीय योगदान का स्मरण किया।
इसी प्रकार, बीजू जनता दल के अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट कीं। नवीन पटनायक ने उल्लेख किया कि डॉ. महापात्र ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में गहरी छाप छोड़ी है और उनका जाना राज्य तथा पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
















