देशभर से मानसूनी हवाओं की रवानगी और गुलाबी ठंड की शुरुआत के बीच वायुमंडलीय हलचल ने अचानक जोर पकड़ लिया है। पहले आए तूफान अर्नब और उसके उपरांत सक्रिय हुए तूफान मुरासु के चलते मौसम चक्र में बड़ा फेरबदल दर्ज किया जा रहा है। 4 नवंबर के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पर्वतीय अंचलों समेत कुल 19 राज्यों में आंधी और वर्षा को लेकर मौसम विभाग (IMD) की चेतावनी सामने आई है। इस मौसमी उथल-पुथल का सबसे उग्र प्रभाव राजस्थान तथा उत्तराखंड में दिखाई दे सकता है, जहां तेज झक्कड़ चलने के साथ कई जगहों पर ओले गिरने की परिस्थिति भी बन रही है।
उत्तराखंड और राजस्थान में तेज हवाओं का प्रकोप
पहाड़ी और मैदानी दोनों ही क्षेत्रों में हवा के वेग को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरतने की बात कही गई है। राजस्थान के विस्तृत भूभाग में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अंधड़ चलने की संभावना व्यक्त की गई है, जिससे रेतीले इलाकों और खुले मैदानी हिस्सों में दृश्यता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, उत्तराखंड की घाटियों और उच्च पर्वतीय शिखरों पर वायु प्रवाह की तीव्रता 80 किलोमीटर प्रति घंटे के चरम स्तर को छू सकती है। तेज हवाओं के संग ओलावृष्टि की आशंका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मौसमी बदलाव केवल सामान्य बूंदाबांदी तक सीमित रहने वाला नहीं है, बल्कि इससे दैनिक जनजीवन पर गहरा असर पड़ सकता है।
पूर्वी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर मुरासु का प्रभाव
बंगाल की खाड़ी की जलीय सतह पर बने सशक्त चक्रवाती तंत्र और तूफान मुरासु के संयुक्त प्रभाव से देश का पूर्वी तथा दक्षिणी कोना निरंतर अशांत बना हुआ है। आंध्र प्रदेश की तटरेखा को पार करते समय मुरासु के थपेड़ों से कई तटीय इलाकों में जोरदार वर्षा और तीव्र झोंकों ने भारी तबाही जैसी स्थिति पैदा की। इसके निकटवर्ती राज्य ओडिशा में प्रशासनिक अमले ने संभावित आपदा से निपटने हेतु बड़े पैमाने पर बचाव कार्य पहले ही संचालित कर दिए थे। राज्य के दक्षिणी अंचलों से लगभग एक लाख 60 हजार से अधिक निवासियों को हटाकर सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया गया है। तटीय मछुआरों और निचले इलाकों के बाशिंदों को समुद्र से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाके
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस मौसमी बदलाव का सीमित किंतु स्पष्ट असर देखने को मिल सकता है। दिल्ली के वायुमंडल में 4 नवंबर को बादलों का डेरा रहेगा और छिटपुट स्थानों पर हल्की फुहारों के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। इस अवधि में सतही हवा की गति 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई है। तापमान के रुझान पर नजर डालें तो दिल्ली में अधिकतम पारा 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है। यद्यपि शहर के लिए किसी व्यापक मूसलाधार वर्षा का अलर्ट नहीं है, फिर भी दिनचर्या और यात्रा की योजना बनाने वाले नागरिकों को स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह है।
उत्तर प्रदेश के विस्तृत भूभाग में चेतावनी
उत्तर प्रदेश के 25 से अधिक जनपदों में आंधी और तेज पानी को लेकर सतर्कता संदेश जारी किया गया है। पूर्वांचल के छोर पर स्थित देवरिया, कुशीनगर, बलिया, चंदौली, गाजीपुर, सोनभद्र और गोरखपुर में मौसम के तीखे तेवर देखने को मिल सकते हैं। इसके समानांतर पश्चिमी अंचल के मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद और बिजनौर में भी अंधड़ संग बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है। चेतावनी के दायरे में मध्य और बुंदेलखंड से सटे इलाके भी सम्मिलित हैं, जिनमें फिरोजाबाद, उन्नाव, बाराबंकी, पीलीभीत, रामपुर, बदायूं, शाहजहांपुर, सीतापुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, कानपुर, मथुरा और आगरा के नाम शामिल हैं। इन जनपदों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंके चल सकते हैं। सूबे की राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
बिहार के जिलों में आंधी और बौछारें
बिहार के मौसम में भी व्यापक बदलाव की रूपरेखा तैयार हो चुकी है, जहां कुल 19 जिले आंधी और बारिश की जद में आ रहे हैं। राज्य के मध्य और पश्चिमी इलाकों जैसे वैशाली, भोजपुर, सारण, सिवान, बक्सर, गया और राजधानी पटना में तूफानी हवाओं के साथ पानी गिरने का खतरा बना हुआ है। मिथिलांचल और उत्तर बिहार के मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर तथा मुजफ्फरपुर में भी मौसमी तब्दीली नजर आएगी। इसके अतिरिक्त पूर्वी हिस्से में लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया के लिए अलर्ट दर्ज है। इस समूचे क्षेत्र में झक्कड़ की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने का आकलन है, जबकि पटना में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर रह सकता है।
झारखंड में दो दिनों का असर और ओलावृष्टि की आशंका
पड़ोसी राज्य झारखंड में इस मौसमी सिस्टम का ठहराव 4 और 5 नवंबर दोनों दिनों तक बने रहने का अंदेशा है। राज्य के प्रमुख जनपदों जिनमें पूर्वी सिंहभूम, पलामू, सरायकेला, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, दुमका, साहेबगंज और रांची शामिल हैं, गरज और बिजली की चमक के साथ बारिश के गवाह बनेंगे। कुछ ग्रामीण और शहरी पॉकेट्स में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं बहेंगी। कुछ इलाकों में ओले गिरने की परिस्थिति भी बन सकती है। राजधानी रांची में दिन का पारा 27 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहने का अनुमान है।
पश्चिम बंगाल में समुद्री हलचल का असर
बंगाल की खाड़ी में उपजे विक्षोभ का सीधा असर पश्चिम बंगाल के तटीय व आंतरिक जनपदों में साफ परिलक्षित हो रहा है। मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, कालिम्पोंग, दुर्गापुर, नादिया, दार्जिलिंग, कोलकाता, हावड़ा, बीरभूम और मालदा में वर्षा के आसार बने हुए हैं। राज्य के खुले और तटीय इलाकों में हवा की गति बढ़कर 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर पर पहुंच सकती है। कोलकाता महानगर में अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रहेगा। सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को आंधी-तूफान के दौरान विशाल पेड़ों, विद्युत खंभों और जर्जर ढांचों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने का परामर्श दिया है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश के अंचलों में स्थिति
मरुस्थलीय राज्य राजस्थान के जयपुर, झुंझुनू, अजमेर, सीकर, सवाई माधोपुर, चूरू, टोंक, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़ और भरतपुर में 4 नवंबर को मौसम में तीखा बदलाव आ सकता है। यहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली अंधड़ जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। जयपुर में अधिकतम पारा 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज हो सकता है। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी संभागों में छतरपुर, दमोह, उमरिया, सिंगरौली, शिवपुरी, कटनी, बैतूल, खंडवा, इंदौर, नर्मदापुरम, रायसेन, मुरैना, धार, हरदा और उज्जैन में बादलों की गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम है। भोपाल में अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 17 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इसके साथ ही पंजाब के अमृतसर, मानसा, लुधियाना, जालंधर और पटियाला जैसे जिलों में भी हवा और बारिश की हलचल दर्ज की जा सकती है।


















