दिल्ली और एनसीआर जैसे इलाकों में लोग अभी भी उमस भरी गर्मी और एसी के सहारे दिन काट रहे हैं, क्योंकि सितंबर का महीना खत्म होने को है और बारिश का अता-पता नहीं है। हालांकि देश के बड़े हिस्से में तस्वीर बिल्कुल अलग है। पूरब से लेकर उत्तर तक करीब आधे हिंदुस्तान में जाते मानसून ने दोबारा लौटकर ऐसा भयंकर कोहराम मचाया है कि हर तरफ दहशत का माहौल है। उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक मूसलाधार बारिश ने अचानक भारी तबाही ला दी है। पिछले दो दिनों से यूपी के कई जिलों में बादलों के फटने जैसे हालात हैं, जिससे लोगों की जिंदगी पर संकट आ गया है। इसके अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा में भी तूफानी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उधर पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बाद भीषण लैंडस्लाइड की घटनाएं सामने आई हैं और मौसम ने अचानक करवट लेते हुए पहाड़ों पर सीजन की पहली बर्फबारी के साथ कड़ाके की ठंड की आहट दे दी है, जिससे ऊंची चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढक चुकी हैं।
सिक्किम और बंगाल में लैंडस्लाइड का तांडव
सिक्किम के ग्यालशिंग जिले के रिम्बी गांव में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश की वजह से पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरककर नीचे आ गिरा। इस भयानक लैंडस्लाइड की चपेट में आने से गांव के 30 से ज्यादा मकान मलबे में दब गए। इस आपदा के बाद पूरे इलाके में हर तरफ कीचड़, टूटे हुए पेड़ और भारी मलबा बिखरा पड़ा है और सन्नाटा छाया हुआ है। घरों के भीतर तक मलबा घुस जाने के कारण करीब 35 परिवारों को वहां से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सिर्फ सिक्किम ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में भी भारी बारिश के चलते लैंडस्लाइड हुई, जहां मलबा गिरने से एक अस्पताल की छत ढह गई और इलाज करा रहे मरीजों समेत 6 लोग मलबे के नीचे दब गए। सिक्किम के पश्चिमी हिस्से में मची इस तबाही के बीच उत्तरी सिक्किम और जम्मू-कश्मीर के पुंछ में मुगल रोड पर इस सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है।
मौसम में इस अचानक बदलाव की असली वजह
इस पूरे खराब मौसम की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी से उठे एक चक्रवात को जिम्मेदार माना जा रहा था, लेकिन बाद में मौसम विभाग ने यह स्पष्ट किया कि वो तूफान चक्रवात का रूप ले ही नहीं पाया था। विभाग के अनुसार, मौसम में आए इस खतरनाक बदलाव की असली वजह बंगाल की खाड़ी में बना एक डीप डिप्रेशन है, जो पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ चुका है। इसी मौसमी तंत्र के असर से देश के 23 राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट घोषित किया गया है। उत्तर प्रदेश के लगभग 50 शहरों में पिछले दो दिनों से लगातार या रुक-रुककर बरसात हो रही है और अगले दो दिनों के लिए पूर्वी यूपी के 8 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जिसका मतलब है कि इस दौरान बहुत भारी बारिश हो सकती है। साथ ही मध्य और पूर्वी यूपी के 32 जिलों में भारी पानी के कारण फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ आने का खतरा जताया गया है, जहाँ हवाएं 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक चल सकती हैं।
बंगाल की खाड़ी के इस डीप डिप्रेशन का असर तटीय राज्यों पर भी साफ देखने को मिला है। तेलंगाना के बुर्गमपाडु क्षेत्र में 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई और घरों की छतें तथा बाहर रखा सामान उड़ गया। ओडिशा के कई इलाके भी इस तूफान की चपेट में आए, जहां चिल्का झील में मछली पकड़ने गए मछुआरों की 10 नावें डूब गईं। मल्कानगिरी में कुछ ही घंटों की बारिश से पानी पुलों के ऊपर बहने लगा। उधर लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हालात गंभीर बने हुए हैं। ललितपुर जिले में भारी बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर आ गए और पानी पुल के ऊपर बहने लगा। पानी के तेज बहाव के बीच एक टैंकर ने पुल पार करने की कोशिश की, जो बीच में जाकर बेकाबू हो गया और बहने लगा, हालांकि गनीमत रही कि वह पुल के किनारे फंस गया और ड्राइवर की जान बचा ली गई। छत्तीसगढ़ के धमतरी में भी पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश दर्ज की गई है।



















