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मुजफ्फरपुर में दिव्यांगता को मात देकर इम्तियाज़ और नाजमा ने रचाई नई जिंदगी की शुरुआतबिहार
6 सित॰ 2026, 8:34 am (19 दिन पहले)· 2

मुजफ्फरपुर में दिव्यांगता को मात देकर इम्तियाज़ और नाजमा ने रचाई नई जिंदगी की शुरुआत

मुजफ्फरपुर के मुकसुदपुर गांव में दिव्यांग मोहम्मद इम्तियाज़ और बोलने में असमर्थ नाजमा परवीन ने निकाह कर लिया है, जिसे ग्रामीण आपसी समझ और भरोसे की मिसाल बता रहे हैं।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी शादी की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में इंसानी रिश्तों की एक अलग मिसाल पेश कर दी है। औराई थाना क्षेत्र के मुकसुदपुर गांव में दिव्यांग मोहम्मद इम्तियाज़ और बोलने में असमर्थ नाजमा परवीन ने निकाह कर लिया है और अब दोनों पति-पत्नी के तौर पर साथ जिंदगी बिताएंगे। ग्रामीण इलाकों में दो ऐसे लोगों का एक-दूसरे से निकाह होना, जिनमें से एक दिव्यांग हैं और दूसरी बोल नहीं पातीं, कम ही देखने को मिलता है, इसलिए यह शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे रिश्तों में आपसी समझ, भरोसे और सम्मान की मिसाल बता रहे हैं।

जयपुर जाकर सीखा हुनर, गांव लौटकर खड़ा किया कारोबार

चंडिहा गांव के रहने वाले मोहम्मद इम्तियाज़ बचपन से ही शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। महज चार-पांच साल की उम्र में ही वह दिव्यांग हो गए थे, जिसके बाद उनकी जिंदगी में एक के बाद एक मुश्किलें आती गईं। हालांकि इम्तियाज़ ने हालात के आगे हार मानने के बजाय खुद को आत्मनिर्भर बनाने की ठान ली। इसी सोच के साथ वह राजस्थान के जयपुर पहुंचे और वहां मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वह वापस अपने गांव लौट आए और अपनी खुद की मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोल ली। धीरे-धीरे मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने अपना कारोबार जमाया और आर्थिक रूप से खुद के पैरों पर खड़े हो गए। खुद की दुकान होने से उन्हें रोजी-रोटी के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ा, जो दिव्यांगता के चलते वर्षों तक दूसरों पर निर्भर समझे जाने के बाद उनके लिए बड़ी बात थी।

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ऐसा जीवनसाथी चाहिए था जो संघर्ष को समझे

आत्मनिर्भर बनने के बाद इम्तियाज़ के घरवालों में उनकी शादी को लेकर बातचीत शुरू हुई। इस दौरान उनके लिए कई रिश्ते भी आए, लेकिन इम्तियाज़ हर बार झिझकते रहे क्योंकि उन्हें डर था कि दिव्यांगता से अनजान कोई साथी शायद उनकी रोजमर्रा की परिस्थितियों को समझ न पाए। वह किसी ऐसे साथी की तलाश में थे जो उनकी परिस्थितियों और संघर्ष को दिल से समझ सके। इसी बीच उनकी मुलाकात मुकसुदपुर गांव की रहने वाली नाजमा परवीन से हुई। नाजमा बोल नहीं सकतीं, लेकिन दोनों के बीच बातचीत और समझ का ऐसा तालमेल बना कि उन्होंने साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया।

परिवार और गांव वालों की मौजूदगी में हुआ निकाह

दोनों की रजामंदी के बाद उनके परिवारों ने भी इस रिश्ते को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। इसके बाद परिवार वालों और गांव के लोगों की मौजूदगी में निकाह की रस्म पूरी की गई। इस समारोह में थाना अध्यक्ष समेत समाज के कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए और नवविवाहित जोड़े को सुखी वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। थाना अध्यक्ष और गांव के बुजुर्गों की मौजूदगी ने इस सामान्य से दिखने वाले सामाजिक आयोजन को एक तरह की सामूहिक स्वीकृति और शुभकामना का रूप दे दिया। निकाह के मौके पर दोनों परिवारों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों में भी खासा उत्साह देखने को मिला।

पत्नी से हैं ढेर सारी उम्मीदें: इम्तियाज़

इम्तियाज़ का कहना है कि उन्होंने खुद दिव्यांगता की पीड़ा को बहुत करीब से महसूस किया है, इसलिए वह नाजमा की भावनाओं और उनकी परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। उनके मुताबिक रिश्ते में सबसे ज्यादा मायने आपसी भरोसा, एक-दूसरे को समझना और हर हाल में साथ निभाने का जज्बा रखता है। इम्तियाज़ ने बताया कि उन्हें अपनी पत्नी नाजमा से काफी उम्मीदें हैं। नाजमा भले ही बोल नहीं पातीं, लेकिन वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी भावनाओं व तकलीफ को अच्छी तरह समझ सकती हैं। इम्तियाज़ के मुताबिक बिना शब्दों के भी अपनी भावनाएं समझ लेने वाला यह साथ ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी का कारण है, और उन्हें उम्मीद है कि उनकी जिंदगी यह संदेश देगी कि दिव्यांगता किसी को सुखी दांपत्य जीवन से नहीं रोक सकती।

सवाल-जवाब

इम्तियाज़ और नाजमा किस गांव के रहने वाले हैं?
मोहम्मद इम्तियाज़ मुजफ्फरपुर जिले के चंडिहा गांव के रहने वाले हैं, जबकि नाजमा परवीन औराई थाना क्षेत्र के मुकसुदपुर गांव की निवासी हैं।
इम्तियाज़ दिव्यांग कैसे हुए?
करीब चार-पांच साल की उम्र में इम्तियाज़ दिव्यांग हो गए थे।
इम्तियाज़ ने आत्मनिर्भर बनने के लिए क्या किया?
उन्होंने राजस्थान के जयपुर जाकर मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण लिया और गांव लौटकर अपनी दुकान खोली।
नाजमा परवीन को क्या दिक्कत है?
नाजमा बोल नहीं सकती हैं, लेकिन वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
निकाह में कौन-कौन शामिल हुआ?
निकाह में दोनों परिवारों और ग्रामीणों के साथ-साथ थाना अध्यक्ष समेत समाज के कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
इम्तियाज़ को अपनी पत्नी से क्या उम्मीदें हैं?
इम्तियाज़ को उम्मीद है कि नाजमा उनकी भावनाओं और तकलीफ को समझ सकेंगी, भले ही वह बोल नहीं पातीं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

यह खबर केवल एक शादी की नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और पुलिस-जनता के बीच सकारात्मक जुड़ाव का भी एक मजबूत दस्तावेज है। जिस तरह औराई थाना अध्यक्ष और स्थानीय गणमान्य लोग इस निकाह में शामिल हुए, वह कानून-व्यवस्था के मानवीय चेहरे को दर्शाता है। एक क्राइम संवाददाता के रूप में यह देखना सुखद है कि कैसे प्रशासन और स्थानीय समाज मिलकर ऐसे आयोजनों को सुरक्षा और सामाजिक स्वीकृति का कवच दे रहे हैं, जिससे हाशिए पर मौजूद लोगों का मनोबल बढ़ता है।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह शादी ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा और समावेशन का एक बड़ा उदाहरण है। जब थाना अध्यक्ष जैसे प्रशासनिक अधिकारी ऐसी पहलों में शामिल होते हैं, तो यह हाशिए पर जीवन बिता रहे व्यक्तियों के अधिकारों और उनकी मुख्यधारा में भागीदारी को मजबूत करता है। ऐसे मामले समाज में मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखते हैं और यह दर्शाते हैं कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और आपसी समझ किसी भी शारीरिक चुनौती पर भारी पड़ सकती है।

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