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मुंबई बैंक चुनाव में आमने-सामने होगी बीजेपी और शिवसेना, शिंदे गुट ने ठोका दावामहाराष्ट्र
31 अग॰ 2026, 11:28 am (57 दिन पहले)· 5

मुंबई बैंक चुनाव में आमने-सामने होगी बीजेपी और शिवसेना, शिंदे गुट ने ठोका दावा

महाराष्ट्र की सत्ता में मिलकर काम कर रहे बीजेपी और शिवसेना के बीच अब सहकारिता क्षेत्र के चुनाव को लेकर सियासी रस्साकशी शुरू हो गई है। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के आगामी चुनाव में शिंदे गुट ने ताल ठोक दी है, जिससे वर्षों से चले आ रहे बीजेपी के वर्चस्व को सीधी चुनौती मिल रही है।

महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार के भीतर सत्ता की साझेदारी के बीच अब सहकारिता के मोर्चे पर एक नया सियासी घमासान छिड़ता नजर आ रहा है। राज्य में एक तरफ जहां महाराष्ट्र सरकार में बीजेपी और शिवसेना मिलकर राज चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के होने वाले चुनाव में यह सियासी समीकरण पूरी तरह बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस मलाईदार और प्रभावशाली निकाय के चुनाव में अभी तक आमतौर पर बीजेपी का ही एकछत्र प्रभाव और दबदबा माना जाता रहा है, लेकिन अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी भी इस मुकाबले में कूद पड़ी है, जिससे दोनों प्रमुख सहयोगी दल एक बार फिर आमने-सामने आ खड़े हुए हैं।

बीजेपी के गढ़ में शिंदे की सीधी चुनौती

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक प्रभाव वाले माने जाने वाले मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (MDCCB) के इस चुनाव में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना पूरी तैयारी और ताकत के साथ उतरने का मन बना चुकी है। हाल ही में ठाणे-पालघर जिला बैंक के चुनाव में मिली शानदार सफलता के बाद से शिंदे गुट का मनोबल काफी ऊंचा है। अब पार्टी सांसद श्रीकांत शिंदे की अगुवाई में मुंबई के इस बेहद अहम और प्रभावशाली बैंक पर अपना अधिकार जमाने की पूरी योजना बना रही है, जिससे राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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बोर्ड में वर्चस्व की लड़ाई और सियासी समीकरण

मौजूदा समय की बात करें तो कुल 20 निदेशकों वाली इस महत्वपूर्ण बैंक समिति पर बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर और उनके वफादार समर्थकों का एकतरफा कब्जा बना हुआ है। इस मौजूदा बोर्ड के भीतर बीजेपी के अन्य कद्दावर नेता जैसे प्रसाद लाड और तेजस्वी घोसालकर के साथ-साथ विपक्षी ठाकरे गुट के विधायक सुनील राउत भी शामिल हैं। ऐसे में अचानक शिंदे सेना की इस सियासी एंट्री से बीजेपी के सालों पुराने और मजबूत वर्चस्व को एक बड़ी और सीधी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है।

वित्तीय ताकत और मध्यमवर्गीय वोट बैंक का गणित

महाराष्ट्र की राजनीति में सहकारी बैंकों पर नियंत्रण होना केवल वित्तीय अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जमीनी स्तर की राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाने का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है। करीब 10,282 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कार्यशील पूंजी वाले इस बैंक से हर साल लगभग 600 से 700 करोड़ रुपये का होम लोन वितरित किया जाता है। इसके अलावा, यह वित्तीय संस्थान सरकारी कर्मचारियों के वेतन के लेन-देन, पेंशन वितरण और हाउसिंग सोसायटियों के सेल्फ-रीडेवलपमेंट के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग का काम करता है। इस वित्तीय केंद्र पर कब्जा जमाने से सीधे तौर पर मुंबई शहर के एक बड़े और असरदार मध्यमवर्गीय वोट बैंक तक सीधी पहुंच बनाई जा सकती है, जिस पर हर दल की नजर रहती है।

निकाय चुनावों से पहले सहकारिता में होड़

यह बात भी गौर करने वाली है कि भले ही राज्य के स्तर पर एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस मिलकर सरकार चला रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में होने वाले बीएमसी और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों के ठीक पहले यह महासंग्राम शुरू हो चुका है। दोनों ही प्रमुख दल सहकारिता के इस माध्यम से अपने राजनीतिक और आर्थिक जनाधार को और अधिक मजबूत करने की होड़ में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में सियासी पारा और अधिक चढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।

सवाल-जवाब

मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक चुनाव में कौन-से दल आमने-सामने हैं?
इस चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख दल बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना आमने-सामने हैं।
वर्तमान में बैंक के बोर्ड पर किसका कब्जा है?
मौजूदा समय में 20 निदेशकों वाले इस बैंक बोर्ड पर बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर और उनके समर्थकों का एकतरफा कब्जा है।
मुंबई मध्यवर्ती सहकारी बैंक की कार्यशील पूंजी कितनी है?
इस बैंक की कुल कार्यशील पूंजी लगभग 10,282 करोड़ रुपये है।
शिंदे गुट की तरफ से इस चुनाव का नेतृत्व कौन कर रहा है?
शिंदे सेना की तरफ से इस चुनाव में सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में पार्टी अपना दावा ठोक रही है।
बैंक सालाना कितने का होम लोन बांटता है?
यह बैंक हर साल लगभग 600 से 700 करोड़ रुपये का होम लोन वितरित करता है।
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