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हनुमान बेनीवाल के पैतृक गांव में अनोखा मुकाबला, सरपंच पद की रेस में आमने-सामने दो सगी बहनेंराजस्थान
24 अक्तू॰ 2026, 9:47 am (2 घंटे पहले)· 2

हनुमान बेनीवाल के पैतृक गांव में अनोखा मुकाबला, सरपंच पद की रेस में आमने-सामने दो सगी बहनें

नागौर के बरणगांव में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है, जहां सरपंच की कुर्सी के लिए दो सगी बहनें और रिश्ते में सांसद हनुमान बेनीवाल की भाभियां आमने-सामने हैं। इस दिलचस्प मुकाबले में कुल सात महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी हैं।

नागौर जिले के बरणगांव में सरपंच पद के चुनाव ने इन दिनों पूरे इलाके का राजनीतिक ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सांसद हनुमान बेनीवाल के पैतृक गांव में होने जा रहे इस पंचायत चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, क्योंकि चुनावी मैदान में उतरी सात महिला प्रत्याशियों में से दो मुख्य दावेदार आपस में सगी बहनें हैं। इस अनोखे और कड़े मुकाबले ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि गांव की जनता आखिर किस उम्मीदवार के सिर पर ताज सजाएगी।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बरणगांव की सियासत

यह पूरा चुनावी किस्सा नागौर के बरणगांव से जुड़ा हुआ है, जिसे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल का पैतृक गांव माना जाता है। इस ग्रामीण सीट पर सरपंच पद के लिए कुल सात महिलाएं अपनी किस्मत आजमा रही हैं। हालांकि, चर्चा का मुख्य केंद्र एक ही परिवार की दो महिलाओं की आपसी टक्कर है। हनुमान बेनीवाल के बड़े भाई रामप्रसाद बेनीवाल की पत्नी मीरा बेनीवाल और उनके दूसरे बड़े भाई प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी राजबाला बेनीवाल इस चुनाव में आमने-सामने खड़ी हैं। सबसे खास बात यह है कि मीरा और राजबाला दोनों सगी बहनें हैं, जिसके कारण इस चुनाव का रंग पूरी तरह से बदल गया है।

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राजनीतिक विरासत और पारिवारिक समीकरणों का दौर

एक तरफ जहां मीरा बेनीवाल अपनी राजनीतिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ मैदान में हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी बहन राजबाला बेनीवाल भी मतदाताओं को लुभाने में जुटी हैं। दोनों के सामने लक्ष्य एक ही है, लेकिन पारिवारिक और राजनीतिक रिश्ते इस मुकाबले को बेहद पेचीदा बना रहे हैं। बरणगांव की राजनीति में रामप्रसाद बेनीवाल लंबे समय तक काफी सक्रिय रहे थे और करीब पच्चीस साल पहले वह गांव के सरपंच भी रह चुके थे। अब उनकी पत्नी मीरा उसी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए चुनावी मैदान में उतरी हैं, जबकि राजबाला भी पूरी ताकत से अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं। मतदाता अब पुराने राजनीतिक अनुभव, स्थानीय विकास के मुद्दों और पारिवारिक समीकरणों के बीच अपनी पसंद तय करने की कोशिश कर रहे हैं।

मतदाताओं की संख्या और अन्य उम्मीदवार

भले ही यह मुकाबला मुख्य रूप से दो बहनों के बीच चर्चा का विषय बना हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मैदान में कुल सात महिला प्रत्याशी ताल ठोक रही हैं। बरणगांव और उससे जुड़े बूढ़ी व अर्जुनपुरा क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे चुनावी क्षेत्र में कुल 2,970 मतदाता दर्ज हैं। इन सभी मतदाताओं का भरोसा जीतना और गांव की तमाम बुनियादी समस्याओं का समाधान करने का विश्वास दिलाना हर उम्मीदवार के लिए जरूरी होगा। चुनावी मैदान में उतरीं सातों महिलाओं को जनता के बीच जाकर अपनी बात रखनी होगी, जिससे यह मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।

बेनीवाल परिवार के पुराने चुनावी पन्ने

बरणगांव का यह चुनाव केवल एक गांव की पंचायत का मामला नहीं है, बल्कि इसके साथ बेनीवाल परिवार के पिछले राजनीतिक घटनाक्रम भी जुड़े हुए हैं। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान मीरा बेनीवाल की बेटी डॉ. अनीता बेनीवाल ने सीधे तौर पर हनुमान बेनीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसके अलावा, हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल को भी खींवसर विधानसभा उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इन तमाम पुराने और चर्चित राजनीतिक घटनाक्रमों की वजह से बरणगांव का यह सरपंच चुनाव एक बार फिर से परिवार के भीतर के सियासी समीकरणों को सतह पर ले आया है।

सांसद हनुमान बेनीवाल की भूमिका पर सबकी नजर

इस पूरे चुनावी घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि सांसद हनुमान बेनीवाल का इस पूरे मामले में क्या रुख रहेगा। क्या वह परिवार के इस मुकाबले में किसी एक प्रत्याशी का समर्थन करते हुए नजर आएंगे, या फिर वह इस पूरी चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखेंगे। फिलहाल उनके समर्थन को लेकर किसी भी तरह के स्पष्ट रुख की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिसके चलते हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में उनकी क्या भूमिका रहती है। फिलहाल बरणगांव की जनता के हाथों में फैसला है कि वह किसे अपना नया सरपंच चुनती है और क्या इस चुनाव का कोई बड़ा असर बेनीवाल परिवार की राजनीति पर भी पड़ता है या नहीं।

सवाल-जवाब

बरणगांव में सरपंच पद के चुनाव में कुल कितनी महिला उम्मीदवार मैदान में हैं?
बरणगांव में सरपंच पद के लिए कुल सात महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ रही हैं।
सरपंच पद की रेस में चर्चा का मुख्य केंद्र कौन सी दो महिलाएं हैं?
मीरा बेनीवाल और राजबाला बेनीवाल इस चुनाव में मुख्य चर्चा का केंद्र हैं, जोसगी बहनें हैं।
मीरा बेनीवाल और राजबाला बेनीवाल का सांसद हनुमान बेनीवाल से क्या रिश्ता है?
दोनों महिलाएं रिश्ते में सांसद हनुमान बेनीवाल की भाभियां हैं।
बरणगांव और उससे जुड़े क्षेत्रों में कुल कितने मतदाता हैं?
बरणगांव, बूढ़ी और अर्जुनपुरा क्षेत्र के आंकड़ों के मुताबिक यहां कुल 2,970 मतदाता हैं।
स्व. रामप्रसाद बेनीवाल का बरणगांव की राजनीति से क्या संबंध रहा है?
स्व. रामप्रसाद बेनीवाल करीब 25 साल पहले बरणगांव के सरपंच रह चुके थे।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·7 मिनट पहले

वाह, राजनीति ने घर में ही ऐसा दंगल करा दिया! दो सगी बहनें आमने-सामने हैं, अब देखना मजेदार होगा कि गांव वाले किसका साथ देते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·49 मिनट पहले

राजनीति ने घरों में भी रिश्ते आमने-सामने खड़े कर दिए हैं। दो सगी बहनों का सरपंच पद के लिए भिड़ना गज़ब है, अब देखना होगा कि गांव वाले किसके पाले में जाते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·48 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो सही है पर मुझे लगता है कि ये सिर्फ सियासत है, असली घर की फूट तो चुनाव के बाद दिखेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

हमारे यहां पिछले जिला पंचायत चुनाव में ऐसा ही हुआ था जब दो चचेरे भाई आमने-सामने आ गए थे। पूरा परिवार दो हिस्सों में बंट गया था और वोटिंग वाले दिन घर के बाहर ही कुर्सियां लगाकर लोग तमाशा देख रहे थे। राजनीति सचमुच रिश्तों का इम्तिहान ले लेती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन जी, राजनीति सचमुच रिश्तों को तौल देती है। अब देखना होगा कि घर की इस जंग में जनता किस बहन के सिर ताज सजाती है।

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