महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित पवई इलाके में एक प्रमुख तकनीकी संस्थान के हॉस्टल परिसर में बुधवार देर रात अचानक आग भड़कने से अफरा-तफरी मच गई। हॉस्टल नंबर 6 में रसोई गैस के सिलेंडर से जुड़ी पाइपलाइन में रिसाव होने के कारण लपटें तेजी से उठीं, जिनकी चपेट में आकर दो बच्चों समेत कुल पांच लोग झुलस गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राहत कर्मियों ने फौरन मौके पर पहुंचकर सभी घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई, जहां डॉक्टरों ने सभी की स्थिति को खतरे से बाहर बताया है।
देर रात हॉस्टल नंबर 6 में हुआ हादसा
पवई स्थित संस्थान के आवासीय क्षेत्र में यह दुर्घटना 8 अक्टूबर की रात लगभग 10:24 बजे घटित हुई। शुरुआती ब्योरे के मुताबिक, कमरे में रखे गैस सिलेंडर से चूल्हे को जोड़ने वाली नली में छिद्र या ढीलेपन की वजह से गैस वातावरण में फैल रही थी। इसी दौरान चिंगारी अथवा ताप के संपर्क में आते ही गैस का तीव्र फ्लेयर-अप हुआ, जिससे आसपास मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सूचना मिलते ही राजावाड़ी अस्पताल प्रशासन, पुलिस दल और बीएमसी के संबंधित वार्ड के कर्मचारी बचाव कार्य के लिए मौके पर रवाना किए गए।
घायलों को नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया
आपातकालीन बचाव दल ने बिना समय गंवाए सभी पांचों झुलसे हुए व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार देने के लिए राजावाड़ी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों ने तुरंत प्राथमिक ड्रेसिंग और उपचार शुरू किया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने अधिक बेहतर देखभाल और बर्न मैनेजमेंट के उद्देश्य से चार व्यक्तियों को कस्तूरबा अस्पताल स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। वहीं 37 वर्ष के ईश्वर सिंह को उसी अस्पताल में रोककर चिकित्सा निगरानी में रखा गया, जहां उनकी हालत सामान्य और स्थिर बनी हुई है।
नाबालिगों समेत अन्य पीड़ितों की स्थिति
अस्पताल प्रशासन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस अग्नि दुर्घटना में दो छोटे बच्चे भी झुलसे हैं। इनमें 12 वर्षीय अंश अहिरवार तथा 9 वर्षीय तहजीब आलम शामिल हैं। दोनों बच्चों को तुरंत कस्तूरबा अस्पताल के बाल एवं बर्न विंग में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई गई है। इसके अतिरिक्त 34 वर्ष के शिवकुमार सिंह और 23 वर्षीय अनिलकुमार यादव भी लपटों की जद में आए थे, जिन्हें विशेष देखरेख के लिए उसी केंद्र में उपचाराधीन रखा गया है।
शहर में गैस दुर्घटनाओं का दूसरा मामला
उसी दिन मुंबई महानगर के एक अन्य इलाके में भी गैस संबंधी गंभीर अग्निकांड सामने आया था। गुरुवार को मुलुंड पूर्व स्थित टाटा कॉलोनी में बने एक लेबर कैंप में अचानक प्रचंड आग लग गई थी। यह अस्थाई आवास परिसर धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत विस्थापित किए गए परिवारों के पुनर्वास हेतु जी प्लस 1 ढांचे के रूप में तैयार किया गया था। वहां आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि परिसर में रखे 7 गैस सिलेंडर एक के बाद एक धमाके के साथ फट पड़े, जिससे मजदूरों में भारी भगदड़ मच गई थी। पवई परिसर की घटना में भी पाइपलाइन रिसाव ने घरेलू सुरक्षा मानकों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
























