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मुंबई में एमएसीटी जज शशिकांत बांगर की कार रोककर बदसलूकी और हत्या की चेतावनी, आरोपियों की तलाश जारीमहाराष्ट्र
3 सित॰ 2026, 10:22 am (9 दिन पहले)· 3

मुंबई में एमएसीटी जज शशिकांत बांगर की कार रोककर बदसलूकी और हत्या की चेतावनी, आरोपियों की तलाश जारी

मुंबई के दादर इलाके में दो अज्ञात युवकों ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के जज शशिकांत बांगर की एसयूवी रोककर वीडियो रिकॉर्डिंग की और विरोध करने पर उन्हें व उनकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के व्यस्त दादर इलाके में एक जज और उनके परिवार के साथ बीच सड़क पर अभद्रता का गंभीर मामला सामने आया है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के जज शशिकांत बांगर अपनी पत्नी और बेटी के साथ गाड़ी से लौट रहे थे, जब दो अज्ञात लोगों ने उनकी एसयूवी रोक ली। आरोपियों ने न केवल वाहन की रिकॉर्डिंग की, बल्कि विरोध करने पर जज और उनकी पत्नी के साथ गाली-गलौज करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दादर टीटी के पास रात के समय घटी वारदात

यह पूरा वाकया 13 जुलाई की रात लगभग 10:15 बजे का है। जज शशिकांत बांगर अपनी पत्नी विद्या बांगर और बेटी साक्षी बांगर के साथ धुले से मुंबई वापस आ रहे थे। जब उनकी कार दादर टीटी क्षेत्र में एक प्रसिद्ध ईरानी रेस्टोरेंट के समीप पहुंची, तब अचानक दो संदिग्ध युवकों ने उनकी एसयूवी को जबरन बीच रास्ते में रोक लिया। इसके बाद दोनों व्यक्ति अपने मोबाइल फोन निकालकर कार और उसमें सवार लोगों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे।

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'जज' लिखी प्लेट पर जताई आपत्ति और की गाली-गलौज

अचानक गाड़ी रोके जाने और वीडियो बनाए जाने पर जज शशिकांत बांगर ने कार का शीशा नीचे कर उन युवकों से रिकॉर्डिंग करने की वजह पूछी। इस पर आरोपियों ने बहस शुरू कर दी और कार के डैशबोर्ड पर रखी 'जज' लिखी नेमप्लेट को लेकर सवाल उठाने लगे। उन्होंने जज की पहचान पर भी संदेह जताया और आक्रामक हो गए। जब जज और उनकी पत्नी विद्या ने इस हरकत का विरोध किया, तो दोनों युवकों ने अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया और पूरे परिवार को गंभीर अंजाम भुगतने व जान से मारने की धमकी दी।

माटुंगा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज

घटना के तुरंत बाद पीड़ित जज ने इस आपबीती की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी। शिकायत दर्ज होने के उपरांत माटुंगा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिक मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की गहन छानबीन शुरू कर दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि उपद्रवियों की पहचान स्थापित करने के लिए प्रयास जारी हैं और उन्हें जल्द ही हिरासत में लिया जाएगा।

सवाल-जवाब

यह घटना मुंबई में कहां और कब हुई?
यह घटना 13 जुलाई की रात लगभग 10:15 बजे मुंबई के दादर टीटी क्षेत्र में एक ईरानी रेस्टोरेंट के पास हुई।
पीड़ित कौन हैं और वे कहां से आ रहे थे?
पीड़ित शशिकांत बांगर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के जज हैं, जो अपनी पत्नी विद्या और बेटी साक्षी के साथ धुले से मुंबई लौट रहे थे।
आरोपियों ने जज और उनके परिवार के साथ क्या किया?
दो अज्ञात युवकों ने उनकी एसयूवी को रोककर वीडियो रिकॉर्डिंग की, 'जज' की नेमप्लेट पर सवाल उठाए और विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
पीड़ित जज की शिकायत पर माटुंगा पुलिस स्टेशन में दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

मुंबई के व्यस्त दादर इलाके में एक न्यायिक अधिकारी की गाड़ी रोककर धमकी देना कानून-व्यवस्था और वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान लगाता है। इस तरह की सड़क पर गुंडागर्दी यह दर्शाती है कि असामाजिक तत्वों में पुलिस का खौफ किस हद तक कम हो चुका है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सीसीटीवी खंगालने की बात कही है, लेकिन इस मामले में आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी ही न्यायपालिका के मनोबल को बनाए रखने और आम जनता में सुरक्षा का संदेश देने के लिए बेहद जरूरी होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

एक न्यायिक अधिकारी को इस तरह बीच सड़क पर निशाना बनाए जाने की यह घटना संगठित अपराध या किसी पुरानी रंजिश के एंगल से भी जांच की मांग करती है। केवल सड़क पर दबंगई या रैंडम रोड रेज मानकर इसकी अनदेखी करना बड़ी भूल होगी। जिस तरह से आरोपियों ने 'जज' लिखी नेमप्लेट को विशेष रूप से टारगेट किया, वह उनकी सोची-समझी आक्रामकता को दर्शाता है। पुलिस के लिए यह सिर्फ एक सामान्य एफआईआर नहीं, बल्कि कानून के रखवालों की सुरक्षा का टेस्ट केस है, जिसमें तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र का इस्तेमाल करके आरोपियों तक जल्द पहुंचना अनिवार्य है ताकि न्याय व्यवस्था की गरिमा पर आंच न आए।

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