कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित हंसूर तालुक के गौरीपुरा गांव से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां महज 5 साल के बच्चे मुकुंद मयूर की खिलौना निगलने से जान चली गई। स्नैक के पैकेट के अंदर मिली एक छोटी सी प्लास्टिक की उपहार बॉल बच्चे के गले में अटक गई, जिससे उसका श्वसन मार्ग अवरुद्ध हो गया। परिजन उसे आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी चिकित्सा केंद्र लेकर रवाना हुए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्चे ने दम तोड़ दिया। इस अचानक हुए हादसे से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
घटना का विवरण और पारिवारिक पृष्ठभूमि
मृतक मासूम मुकुंद मयूर अपने माता-पिता संतोष और ऐश्वर्या का इकलौता पुत्र था। उसके परिवार का गांव में काफी अच्छा सामाजिक प्रभाव है। बच्चे की दादी गौरम्मा गौरीपुरा ग्राम पंचायत की पूर्व उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। परिजनों के अनुसार, घर के किसी सदस्य ने बच्चे को खाने के लिए कुरकुरे का पैकेट दिया था। उस पैकेट के भीतर एक छोटी प्लास्टिक की गिफ्ट बॉल मौजूद थी, जिसे देखकर बच्चा उसके साथ खेलने लगा। खेल-खेल में मासूम ने उस बॉल को अपने मुंह में रख लिया और अचानक उसे निगल गया।
मासूम के दादा शंकर नायक ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्लास्टिक की वह बॉल अचानक बच्चे की श्वास नली में जाकर अटक गई। बॉल फंसते ही बच्चे को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और उसका दम घुटने लगा। परिवार वाले बिना कोई वक्त गंवाए उसे बचाने के लिए अस्पताल की तरफ भागे। हालांकि, स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि जब तक वे उसे डॉक्टरों के पास पहुंचाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया
इस दुखद हादसे के बाद शुरुआती स्तर पर परिजनों की तरफ से कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। हालांकि, बाद में सामने आई जानकारी के अनुसार हंसूर ग्रामीण पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर अपनी वैधानिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन अब इस मुख्य पहलू की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि पैकेट के अंदर मिली वह प्लास्टिक बॉल कंपनी द्वारा दिए गए प्रमोशनल गिफ्ट का हिस्सा थी या फिर वह किसी अन्य माध्यम से बच्चे के हाथ तक पहुंची थी। पुलिस सभी तकनीकी और व्यावहारिक कोणों से मामले की सच्चाई पता लगाने में जुटी हुई है।
क्षेत्र में पहले भी हो चुका है ऐसा ही हादसा
मैसूर जिले में छोटे बच्चों के साथ खाद्य या अन्य वस्तुओं से दम घुटने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी साल मार्च के महीने में भी इस जिले में एक और अत्यंत पीड़ादायक हादसा घटित हुआ था। उस समय साढ़े छह महीने के एक छोटे शिशु की सांस घुट जाने के कारण अकाल मृत्यु हो गई थी। वह मासूम अपने घर के बाहर धार्मिक पूजा-अर्चना के लिए रखे गए सूखे गुड़हल के फूल के टुकड़े को खेल-खेल में मुंह में डाल बैठा था। उस समय भी परिजन बच्चे को तुरंत अस्पताल ले गए थे, परंतु चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बाद भी शिशु को बचाया नहीं जा सका था।
छोटे बच्चों की सुरक्षा पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
एक ही जिले में कम समय के भीतर लगातार घटी इन दो दुखद घटनाओं ने छोटे बच्चों की देखरेख और सुरक्षा संबंधी इंतजामों पर गंभीर विमर्श छेड़ दिया है। बाल सुरक्षा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने अभिभावकों को सतर्क करते हुए विशेष हिदायत दी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि छोटे बच्चों की पहुंच से सिक्के, बटन, छोटी बैटरियां, प्लास्टिक के छोटे खिलौने या अन्य कोई भी निगलने योग्य वस्तुएं पूरी तरह दूर रखनी चाहिए। छोटे बच्चे अपनी सहज जिज्ञासा में अक्सर चीजों को मुंह में डाल लेते हैं, जिससे वायु मार्ग अवरुद्ध होने और दम घुटने जैसी प्राणघातक स्थिति पैदा हो जाती है।



















