राजस्थान के राजसमंद जिले के अंतर्गत आने वाले नाथद्वारा नगर पालिका क्षेत्र में निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच एक नाटकीय और तनावपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। वार्ड नंबर चार से भारतीय जनता पार्टी के पार्षद प्रदीप काबरा के अचानक लापता होने से सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद से ही उनके परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बेटे ने लगाया अपहरण का गंभीर आरोप
लापता पार्षद के बेटे धर्मेंद्र काबरा ने अपने पिता के اغवा होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि उनके पिता नाथद्वारा पालिका अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के वास्ते जोधपुर से रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते से ही उनका कोई अता-पता नहीं चल पाया। इस संबंध में परिवार की ओर से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। धर्मेंद्र ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनके पिता को सुरक्षित सामने नहीं लाया गया, तो विरोध प्रदर्शन को और अधिक तेज किया जाएगा। मौके पर आत्मदाह की चेतावनी दिए जाने के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी।
उपखंड कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
घटना की जानकारी मिलते ही नाथद्वारा उपखंड कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, पार्षद और उनके परिजन एकत्र हो गए। सभी लोग पार्षद को तुरंत वापस लाने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में नाथद्वारा के करीब पांच अन्य पार्षदों के परिवारजन भी शामिल हुए हैं। उनकी मांग है कि काबरा के साथ गए बाकी पार्षदों को भी तत्काल सुरक्षित वापस लाया जाए।
सांसद और विधायक ने की समझाइश की कोशिश
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और नाथद्वारा विधायक मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने परिजनों से लंबी बातचीत की और इस सिलसिले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से फोन पर भी चर्चा की। इस दौरान नाथद्वारा विधायक ने अध्यक्ष पद के टिकट को लेकर बयान दिया कि यह टिकट उनकी पसंद से नहीं दिया गया था, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
तनाव के बीच एक पार्षद के ससुर का निधन
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अन्य पार्षद के परिवार से बेहद दुखद खबर सामने आई। वार्ड नंबर 15 की पार्षद हिना पुरोहित के ससुर की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि वह भी इस राजनीतिक घटनाक्रम और तनाव के कारण काफी परेशान थे। इस आकस्मिक निधन के बाद माहौल और अधिक गर्मा गया है और लोग नाथद्वारा अस्पताल के बाहर जमा हो गए हैं। परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि जब तक लापता पार्षद और अन्य लोग वापस नहीं लौटते, तब तक वे शव को नहीं उठाएंगे।
चुनाव से पहले गरमाई स्थानीय राजनीति
नाथद्वारा में नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। एक तरफ जहां पुलिस लापता पार्षद की तलाश में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न राजनीतिक मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच के नतीजों और लापता पार्षद के सामने आने पर टिकी हुई हैं।






















