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साम्राज्य आए और गए लेकिन भारत और अफगानिस्तान का रिश्ता अटूट है: संयुक्त राष्ट्र में पार्वथनेनी हरीशदुनिया
17 सित॰ 2026, 7:28 am (1 घंटे पहले)· 1

साम्राज्य आए और गए लेकिन भारत और अफगानिस्तान का रिश्ता अटूट है: संयुक्त राष्ट्र में पार्वथनेनी हरीश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया और मानवीय सहायता जारी रखने का संकल्प लिया। भारत ने कहा कि सदियों के बदलावों के बावजूद दोनों देशों का भाईचारा अटूट है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हालिया बैठक में अफगानिस्तान के राजनीतिक परिदृश्य, सुरक्षा चुनौतियों, मानवीय संकटों और मानवाधिकारों के मौजूदा हालातों पर विस्तार से चर्चा की गई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने इस मंच पर अपने विचार रखते हुए सबसे पहले इस महीने परिषद की अध्यक्षता संभालने के लिए फ्रांस की सराहना की और अपने संबोधन का अवसर देने के लिए आभार जताया। उन्होंने अफगानिस्तान के लिए मिशन की प्रमुख और डिप्टी एसआरएसजी (राजनीतिक) जॉर्गेट गैगनन द्वारा दी गई विस्तृत रिपोर्ट का भी उल्लेख किया और सिविल सोसाइटी की ओर से साझा की गई जानकारियों को भी महत्वपूर्ण बताया।

सीमाओं से परे है सदियों पुराना रिश्ता

पार्वथनेनी हरीश ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एक पड़ोसी के रूप में भारतीयों और अफगानों के रिश्ते आधुनिक मानचित्रों और राजनीतिक सीमाओं के अस्तित्व में आने से भी बहुत पुराने हैं। ऐतिहासिक रूप से काबुल से लेकर भारतीय उपमहाद्वीप के मैदानी इलाकों तक जाने वाले मार्ग केवल व्यापारिक गलियारे नहीं थे, बल्कि वे विचारों, ज्ञान, विश्वास और आस्था के आदान-प्रदान का माध्यम भी हुआ करते थे। वक्त के साथ इन क्षेत्रों में कई बड़े साम्राज्य आए और अपनी नियति पूरी कर के मिट गए, लेकिन भारत और अफगानिस्तान के आम नागरिकों के बीच की दोस्ती और भाईचारे का धागा कभी कमजोर नहीं पड़ा। यही ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भावना इस राष्ट्र के प्रति भारत की कूटनीतिक नीति की मजबूत नींव है। भारत हमेशा से एक ऐसे शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध अफगानिस्तान के पक्ष में रहा है, जो वहां के टिकाऊ विकास को सुनिश्चित कर सके। इसी सोच के तहत भारत दोहा वर्किंग ग्रुप की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है, मजबूत द्विपक्षीय विकास साझेदारियों को आगे बढ़ा रहा है और क्षेत्रीय स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रहा है।

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विकास और मानवीय सहायता की अटूट प्रतिबद्धता

भारतीय प्रतिनिधि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को भी दोहराया जिसके तहत एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया के निर्माण का लक्ष्य अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में फैली 500 से अधिक विकास साझेदारी परियोजनाओं के माध्यम से भारत वहां के निर्माण और सुधार कार्यों में लगातार योगदान दे रहा है। अफगान नागरिकों तक सहायता पहुंचाने का यह सिलसिला आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा। जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने के लिए भारत संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों के साथ-साथ अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर मैदानी स्तर पर काम कर रहा है।

बीते कुछ महीनों के दौरान अफगान मंत्रियों के भारत दौरों से दोनों पक्षों के बीच आपसी सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। इन वार्ताओं के जरिए मानवीय सहायता, विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सुरक्षा, क्षमता-निर्माण, नशीले पदार्थों की रोकथाम, खेलकूद, शिक्षा, व्यापार, यात्रा और कनेक्टिविटी जैसे अहम क्षेत्रों में बातचीत को आगे बढ़ाया गया है। यह सारी कवायद कुल 4.8 करोड़ से अधिक अफगान नागरिकों के कल्याण और विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की जा रही है, जो पिछले पांच वर्षों से भारी अभाव, कठिनाइयों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उदासीनता और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र के संकट पर भारत की विशेष नजर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट में अफगानिस्तान की चरमराई पब्लिक हेल्थ व्यवस्था के गंभीर संकट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इस साल की पहली छमाही में ही 150 स्वास्थ्य केंद्र बंद होने के लिए मजबूर हो गए हैं। इस चिंताजनक स्थिति की अनदेखी नहीं की जा सकती और अफगानिस्तान को एक बड़े मानवीय संकट से बचाने के लिए वित्तीय तथा चिकित्सीय निवेश की सख्त जरूरत है। बच्चों के टीकाकरण अभियान में सहायता देने के उद्देश्य से भारत ने पिछली तिमाही में 33 टन जीवनरक्षक वैक्सीन और उससे जुड़ी चिकित्सीय सामग्री वहां भेजी थी। इसके अलावा, इस रिपोर्टिंग अवधि के दौरान भारत ने अफगान स्वास्थ्य अधिकारियों को कई प्रकार के विशेष चिकित्सा उपकरण भी मुहैया कराए हैं। इनमें नवजात शिशुओं और बच्चों की देखभाल से जुड़े उपकरण, कार्डियोग्राफ मशीन, वेंटिलेटर, पेशेंट मॉनिटर, इलेक्ट्रोकॉटरी उपकरण, प्लास्टिक सर्जरी सेट और अन्य विशेष मेडिकल किट शामिल हैं, जो इस कठिन समय में वहां की स्वास्थ्य सेवाओं को संबल दे रहे हैं।

सवाल-जवाब

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
भारत अफगानिस्तान के कितने प्रांतों में विकास परियोजनाएं चला रहा है?
भारत अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से ज्यादा विकास साझेदारी परियोजनाओं के जरिए योगदान दे रहा है।
भारत ने बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम के लिए कितनी सामग्री भेजी थी?
भारत ने पिछली तिमाही में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम के लिए 33 टन वैक्सीन और उससे जुड़ी सामग्री भेजी थी।
इस साल की पहली छमाही में अफगानिस्तान में कितने हेल्थ सेंटर बंद हो गए हैं?
संकटग्रस्त पब्लिक हेल्थ सिस्टम के कारण इस साल की पहली छमाही में 150 हेल्थ सेंटर बंद हो गए हैं।
हालिया बैठकों में भारत और अफगानिस्तान के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई है?
मानवीय सहायता, विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Li Wei@li-wei·16 मिनट पहले

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का यह रुख भू-राजनीतिक स्तर पर बेहद अहम है। वर्तमान में जब काबुल में सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं, तब भारत कूटनीतिक और मानवीय सहायता के जरिए अपनी पैठ बनाए रखना चाहता है। यह रणनीति न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है, बल्कि इस बड़े एशियाई भूभाग में भारत के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को भी साधती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 मिनट पहले

संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह पक्ष सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खतरे से निपटने की मजबूत रणनीति है। जब काबुल में स्थिरता और मानवीय संकट दोनों गंभीर चुनौती बने हुए हैं, तब 34 प्रांतों में फैली 500 से अधिक विकास परियोजनाओं और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ समन्वय के जरिए भारत अपनी रणनीतिक उपस्थिति और कूटनीतिक दखल को सुरक्षित कर रहा है, जो सीमावर्ती सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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