तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में समुद्र किनारे नया प्रशासनिक सचिवालय बनाने की सरकारी योजना का तटीय बस्तियों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार द्वारा समुद्र तट के पास प्रशासनिक केंद्र स्थापित करने के कदम से नाराज नौ तटीय गांवों के मछुआरे मंगलवार को पट्टिनापक्कम में एक साझा बैठक करने जा रहे हैं। यह महापंचायत मुल्लिकुप्पम सोशल वेलफेयर सेंटर के सामने आयोजित की जाएगी, जिसकी निगरानी मुल्लिकुप्पम-श्रीनिवासपुरम और मुल्लिनागर की स्थानीय पंचायत परिषदें करेंगी। इस सम्मेलन में एन्नोर के नेट्टुकुप्पम से लेकर पूरे चेन्नई जिले के नैनारकुप्पम तक फैली विभिन्न बस्तियों के प्रतिनिधि और आम नागरिक अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
प्रशासनिक भवन के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया
राज्य सरकार ने नए सचिवालय के निर्माण को गति देने के उद्देश्य से भूमि चयन और उसे अंतिम रूप देने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए दक्षिण चेन्नई में संथोम रोड के किनारे स्थित पट्टिनापक्कम को सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है। अधिकारियों के स्तर पर इस योजना को साकार करने के लिए लगभग 24 से 25 एकड़ जमीन के उपयोग पर विचार चल रहा है। करीब 1,200 करोड़ रुपये के संभावित खर्च वाली इस विशाल परियोजना को लेकर सरकार ने अभी तक कोई विस्तृत डिजाइन, आधिकारिक बजट आवंटन या निर्माण की समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है।
समुदाय की आजीविका और पर्यावरण पर मंडराता खतरा
तटीय समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इतना बड़ा कंक्रीट का ढांचा खड़ा होने से पारंपरिक मछुआरों की दैनिक गतिविधियों के लिए जगह बेहद सीमित हो जाएगी। समुद्र किनारे नावों को खड़ा करने, जाल सुखाने और उन्हें लाने-ले जाने के पारंपरिक रास्ते बंद होने का संकट पैदा हो जाएगा। इसके अलावा नौ प्रमुख बस्तियों के विस्थापन का डर भी लोगों को सता रहा है। स्थानीय प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि संथोम रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से यातायात व्यवस्था चरमरा जाएगी और नागरिक बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा। इसके साथ ही समुद्र तट के पारिस्थितिकी तंत्र, विशेष रूप से समुद्री कछुओं के अंडे देने वाले संवेदनशील प्राकृतिक ठिकानों को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
सरकारी तर्क और आंदोलन की भावी रणनीति
प्रशासन की ओर से इस योजना के समर्थन में तर्क दिया गया है कि वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर में जगह की भारी कमी है और आधुनिक बुनियादी ढांचे की अनुपलब्धता के कारण विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने में दिक्कतें आती हैं। सभी मंत्रालयों और विभागों को एक आधुनिक छत के नीचे लाने के लिए यह नया सचिवालय जरूरी बताया गया है। दूसरी ओर, मछुआरा संगठनों का साफ कहना है कि इस फैसले से उनके पारंपरिक अधिकारों पर सीधी चोट पहुंचेगी। मंगलवार की सभा में सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग वाला औपचारिक नोटिस जारी करने पर विचार होगा। यदि शासन ने स्थान बदलने पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। टीवीके ने प्रशासनिक सुधार और पारदर्शी व्यवस्था का संकल्प लेकर 108 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी, लेकिन अब समुदाय का कहना है कि तटवासियों से सीधी बातचीत के बिना ऐसा कोई भी विकास कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।











