डिजिटल युग और स्मार्टफोन के इस दौर में जहां संगीत सुनने के लिए केवल एक क्लिक की जरूरत होती है, वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक रामगंज बाजार में एक ऐसी पुरानी दुकान स्थित है जो इतिहास के पन्नों को आज भी तरोताजा रखती है। इस दुकान में लगभग 120 साल पुरानी संगीत विरासत को चार पीढ़ियों से बड़े जतन से सहेजा जा रहा है। यहां आज भी विंटेज ग्रामोफोन की सुरीली धुनें गूंजती हैं, जो लोगों को बीते दौर के सुनहरे दिनों की याद दिलाती हैं।
चार पीढ़ियों से चला आ रहा है संगीत का यह अनूठा सफर
इस दुकान की कमान फिलहाल 75 वर्षीय अब्दुल अजीज के हाथों में है। इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत उनके दादा ने आज से करीब 120 वर्ष पहले की थी। तब से लेकर अब तक परिवार की चार लगातार पीढ़ियों ने इस काम को नहीं छोड़ा और पुरानी संगीत प्रणाली को जीवंत बनाए रखा। इस दुकान में विंटेज ग्रामोफोन, विनाइल रिकॉर्ड्स, टेप रिकॉर्डर और कैसेट समेत कई दुर्लभ एंटीक म्यूजिक मशीनों का बड़ा संग्रह मौजूद है। अब्दुल अजीज बताते हैं कि उनके पास 5 से 10 ऐसे ग्रामोफोन हैं जो बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक हैं, जिन्हें देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग जयपुर आते हैं।
बिना बिजली के चाबी से बजने वाला जादुई संगीत उपकरण
आधुनिक दौर में जहां इंटरनेट और डिजिटल म्यूजिक का बोलबाला है, वहीं ग्रामोफोन अपने समय का सबसे लोकप्रिय साधन माना जाता था। लकड़ी या धातु के बॉक्सनुमा आकार में बनी इस मशीन को चलाने के लिए किसी भी तरह की बिजली की आवश्यकता नहीं होती थी। इसमें रिकॉर्ड रखकर चाबी (हैंडल) भरी जाती थी और फिर सुई के घर्षण से मधुर संगीत बजने लगता था। समय के साथ जैसे-जैसे नई तकनीकों का आविष्कार हुआ, ग्रामोफोन का चलन धीरे-धीरे कम होता चला गया। आज यह पारंपरिक मशीनें आम घरों से गायब होकर या तो संग्रहालयों का हिस्सा बन चुकी हैं या फिर एंटीक वस्तुओं के शौकीनों के पास ही मिलती हैं।
रिक्का और एचएमवी जैसे दिग्गजों के दुर्लभ मॉडल का खजाना
इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कंपनियों के पुराने ग्रामोफोन हैं। अब्दुल अजीज के अनुसार भारत में ग्रामोफोन की शुरुआत विदेशी कंपनियों के आगमन से हुई थी। उनके कलेक्शन में 'रिक्का' और 'एचएमवी' (हिज मास्टर्स वॉइस) जैसी मशहूर विंटेज कंपनियों के ग्रामोफोन सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें से कुछ मॉडल आकार में इतने छोटे और पोर्टेबल हैं कि उन्हें आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता था, जबकि कुछ इतने बड़े और भव्य हैं कि वे किसी बड़ी अलमारी की तरह दिखाई देते हैं। इसके अलावा यहां दशकों पुराने संगीत के दुर्लभ रिकॉर्ड और उपकरण भी संभालकर रखे गए हैं।
संगीत प्रेमियों और बॉलीवुड का रहा है इस दुकान से गहरा नाता
यद्यपि आज की युवा पीढ़ी ग्रामोफोन और विनाइल रिकॉर्ड की कार्यप्रणाली से ज्यादा परिचित नहीं है, फिर भी पुराने गानों और एंटीक वस्तुओं के शौकीन आज भी इस दुकान पर खिंचे चले आते हैं। लोग यहां पुराने गानों की दुर्लभ रिकॉर्डिंग और कैसेट की खोज में पहुंचते हैं। अब्दुल अजीज याद करते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब बॉलीवुड और फिल्म जगत से जुड़े लोग भी पुरानी रिकॉर्डिंग कैसेट और म्यूजिक रिकॉर्ड खरीदने के लिए विशेष रूप से उनकी दुकान पर आते थे। जयपुर की यह दुकान केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि यह संगीत के क्रमिक विकास और उसके अनमोल इतिहास का एक जीवंत प्रतीक है।
















