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नालसर विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह विवाद पर बोले CJI सूर्यकांत, कहा कभी स्वीकार नहीं किया था निमंत्रणतेलंगाना
17 अग॰ 2026, 7:19 am (45 दिन पहले)· 3

नालसर विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह विवाद पर बोले CJI सूर्यकांत, कहा कभी स्वीकार नहीं किया था निमंत्रण

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने हैदराबाद स्थित नालसर विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने की सहमति कभी नहीं दी थी। छात्रों के विरोध और बार काउंसिल के हस्तक्षेप के बाद बने विवाद पर उन्होंने यह बड़ा बयान दिया है।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसर) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने के आमंत्रण को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कभी सहमति ही नहीं दी थी, इसलिए वहां जाने अथवा न जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

दीक्षांत समारोह को लेकर बढ़ा था विवाद

नालसर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीजेआई सूर्यकांत की उपस्थिति की खबरों के बीच छात्रों के एक वर्ग ने विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद मामला उस समय और अधिक पेचीदा हो गया जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने इस विवाद में हस्तक्षेप किया। बीसीआई ने विरोध में शामिल स्नातकोत्तर छात्रों के बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया था, हालांकि बाद में विवाद बढ़ता देख बीसीआई ने अपना बयान वापस लेते हुए खेद प्रकट किया था।

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बीसीआई के हस्तक्षेप पर जताई थी कड़ी आपत्ति

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से जवाब भी तलब किया था। सीजेआई सूर्यकांत ने बार काउंसिल के इस प्रकार के कड़े कदम पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि यह मुद्दा सीधे तौर पर उनके और विद्यार्थियों के बीच का है और इसमें किसी तीसरे पक्ष के अनावश्यक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं थी।

जोधपुर में कुलपतियों की बैठक के बाद दिया बयान

राजस्थान के जोधपुर में देश की विभिन्न नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों (VCs) के सम्मेलन को संबोधित करने के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि नालसर प्रशासन की ओर से मिले निमंत्रण पर उनकी तरफ से कभी कोई स्वीकृति नहीं दी गई थी। इस बयान के बाद दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि को लेकर बना संशय समाप्त हो गया है।

सवाल-जवाब

सीजेआई सूर्यकांत ने नालसर दीक्षांत समारोह को लेकर क्या बयान दिया?
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नालसर विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने के निमंत्रण पर कभी सहमति नहीं दी थी।
नालसर विश्वविद्यालय में विवाद किस बात पर हुआ था?
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सीजेआई को आमंत्रित किए जाने की खबरों पर कुछ छात्रों के समूह ने विरोध जताया था।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की क्या भूमिका रही?
बीसीसीआई ने शुरुआत में विरोध कर रहे छात्रों के बहिष्कार का फरमान जारी किया था, लेकिन बाद में विवाद बढ़ने पर खेद जताते हुए अपना बयान वापस ले लिया।
सीजेआई सूर्यकांत ने बीसीआई के रुख पर क्या टिप्पणी की थी?
सीजेआई ने कहा था कि यह विषय उनके और विद्यार्थियों के बीच का है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से स्पष्टीकरण मांगा था।
सीजेआई ने यह स्पष्टीकरण कहां दिया?
उन्होंने जोधपुर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों के सम्मेलन में भाग लेने के बाद यह स्थिति साफ की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·44 दिन पहले

सीजेआई सूर्यकांत का यह स्पष्टीकरण न्यायपालिका और वैधानिक निकायों के बीच की सीमाओं को रेखांकित करता है। बार काउंसिल द्वारा छात्रों के बहिष्कार और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से यह स्पष्ट होता है कि शैक्षणिक संस्थानों में असंतोष और बाहरी प्रशासनिक दखलअंदाजी से किस तरह कानूनी व्यवस्था प्रभावित होती है। भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए विश्वविद्यालयों को दीक्षांत समारोहों के आमंत्रण और प्रशासनिक समन्वय में अधिक पारदर्शिता रखनी होगी, ताकि अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·44 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह ध्यान देना आवश्यक है कि इस प्रकार के प्रशासनिक गतिरोध और संस्थागत विवादों का सीधा असर शैक्षणिक परिसरों की स्वायत्तता और विधिक शिक्षा की साख पर पड़ता है। जब शीर्ष न्यायपालिका को इस तरह के मामलों में सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी पड़े, तो यह उच्च शिक्षा संस्थानों और उनके प्रबंधन तंत्र के बीच संवाद की कमी को दर्शाता है। भविष्य में ऐसे आयोजनों को लेकर संस्थाओं को अधिक पेशेवर और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि इस तरह की असहज स्थितियों से बचा जा सके।

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