आधार कार्ड के प्रणेता और इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि के साथ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान बड़ी तकनीकी अड़चन सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर पंजाब में चल रहे सियासी घमासान के बीच अब यह नया मामला सुर्खियों में आ गया है। चुनाव आयोग द्वारा तैयार की गई विसंगतियों और गड़बड़ियों वाली सूची में नंदन नीलेकणि और उनके परिवार के तमाम सदस्यों के नाम शामिल कर लिए गए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अनमैपड सूची में नाम और दस्तावेजों की जरूरत
इस विशेष सूची में इकसठ वर्षीय नंदन नीलेकणि के अलावा उनकी सरसड़ठ वर्षीय पत्नी रोहिणी नीलेकणि, अड़तीस वर्षीय बेटी जान्हवी और छत्तीस वर्षीय बेटे निहार का नाम भी दर्ज है। दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान इस परिवार को चुनाव आयोग की तरफ से औपचारिक नोटिस मिल सकता है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी के नामों के आगे 'अनमैपड विद लास्ट एसआईआर' यानी पिछले एसआईआर के साथ मैप न होने का उल्लेख किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में इनके नाम मेल नहीं खा रहे हैं।
मतदाता सूची और मतदान केंद्र का विवरण
वर्तमान स्थिति के अनुसार, नंदन नीलेकणि के पूरे परिवार का नाम बीटीएम लेआउट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद है। उनका परिवार कोरमंगला के तीसरे ब्लॉक में स्थित रेड्डी जनसंघ हाई स्कूल के मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची सत्ताइस अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। सूची में अपनी पात्रता को पूरी तरह से वैध साबित करने के लिए उन्हें चुनाव आयोग द्वारा स्वीकृत ग्यारह अनिवार्य दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा।
नंदन नीलेकणि का राजनीतिक और प्रशासनिक सफर
यह उल्लेखनीय है कि नंदन नीलेकणि ने वर्ष 2014 के दौरान बैंगलोर साउथ संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें उस चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के हाथों दो लाख अठ्ठाइस हजार वोटों के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा था। उन्हें देश में आधार कार्ड की अवधारणा और उसकी शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है। नीलेकणि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई के संस्थापक अध्यक्ष भी रह चुके हैं, और आज के समय में यही वह केंद्रीय संस्था है जो देश भर में आधार से जुड़ी संपूर्ण व्यवस्था का संचालन करती है।
अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों के नाम भी शामिल
चुनाव आयोग की इस एसआईआर विसंगति सूची में केवल नीलेकणि परिवार ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य प्रतिष्ठित और पद्म पुरस्कार से सम्मानित नागरिकों के नाम भी शामिल हैं। इनमें प्रसिद्ध वैज्ञानिक और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत प्रोफेसर सीएनआर राव तथा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हरेकला हजब्बा के नाम भी शामिल हैं। वैज्ञानिक सीएनआर राव का नाम वर्ष 2002 की सूची के साथ मिलान न होने के कारण चिह्नित किया गया था, हालांकि बेंगलुरु अर्बन डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर महेश्वर राव ने स्पष्ट किया है कि उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है तथा उनके बूथ लेवल ऑफिसर ने अंतिम सूची में उनका नाम जोड़ने की संस्तुति कर दी है।
हजब्बा को नोटिस और कुल आंकड़ों की स्थिति
दूसरी ओर, हरेकला हजब्बा को उनके नाम में हुई मिसमैच की समस्या के कारण आधिकारिक तौर पर नोटिस थमाया गया है। ड्राफ्ट सूची में शामिल कुल चार करोड़ छियालीस लाख मतदाताओं में से लगभग तैंतालीस लाख इक्यासी हजार लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। इन सभी प्रभावित मतदाताओं को बाईस अक्टूबर तक अपने संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर्स के पास सभी आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य रूप से जमा कराने होंगे, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित बना रहे।





















