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राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, जानिए जयपुर और कोटा समेत अन्य जिलों में कब बदलेगा मौसम का मिजाजराजस्थान
10 सित॰ 2026, 5:58 am (1 घंटे पहले)· 3

राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, जानिए जयपुर और कोटा समेत अन्य जिलों में कब बदलेगा मौसम का मिजाज

राजस्थान में इस समय मानसूनी हवाएं सुस्त पड़ी हैं और अधिकांश जिलों में मौसम शुष्क बना हुआ है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए सिस्टम के कारण 11 सितंबर से बारिश का एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद है।

राजस्थान के मौसम में इन दिनों सुस्ती छाई हुई है और मानसून की गतिविधियां काफी धीमी पड़ चुकी हैं। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार राज्य के अधिकतर क्षेत्रों में इस वक्त शुष्क पश्चिमी हवाओं का प्रभाव लगातार बना हुआ है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर बारिश की गतिविधियां थम गई हैं। तापमान की बात करें तो श्रीगंगानगर में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। हालांकि यह शांत और शुष्क दौर अधिक लंबा नहीं खिंचेगा क्योंकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बदलाव के संकेत दिए हैं।

नया कम दबाव का क्षेत्र बढ़ाएगा बारिश की उम्मीद

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी के पास उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा तट के आसपास 11 सितंबर के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र आकार ले सकता है। इस मौसमी बदलाव के असर से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश की वापसी हो सकती है। खासतौर पर 11 सितंबर से पूर्वी राजस्थान के कुछ चुनिंदा इलाकों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

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12 से 15 सितंबर के बीच इन संभागों में बरसेंगे बादल

जैसे-जैसे यह मौसमी सिस्टम आगे बढ़ेगा, बारिश का दायरा भी राज्य के दूसरे हिस्सों में फैलता जाएगा। आगामी 12 से 15 सितंबर के दौरान जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग के तमाम इलाकों में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने के पूरे आसार हैं। विशेष तौर पर 13 और 14 सितंबर को कोटा संभाग और उसके आसपास के क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर मध्यम से लेकर भारी बारिश तक दर्ज की जा सकती है। इस दौरान गरज और चमक के साथ झमाझम बौछारें गिरने की भी पूरी संभावना है।

पश्चिमी राजस्थान में हल्की और छुटपुट बारिश के आसार

पूर्वी राजस्थान के मुकाबले पश्चिमी राजस्थान में मानसूनी असर थोड़ा सीमित रहने की उम्मीद है। जोधपुर और बीकानेर संभाग के जिलों में 13 से 15 सितंबर के बीच छिटपुट स्थानों पर ही हल्की फुल्की बारिश हो सकती है। इसका मतलब है कि पश्चिमी अंचल में व्यापक और भारी बारिश की बजाय केवल स्थानीय स्तर पर हल्की बौछारों का ही अनुमान है, जिससे वहां शुष्क मौसम का असर ज्यादा रहेगा।

सक्रिय मौसमी प्रणालियों का पूरा विवरण

वर्तमान समय में मानसून ट्रफ लाइन जम्मू से शुरू होकर देहरादून, पंतनगर, बाराबंकी, डेहरी, पुरुलिया और दीघा से गुजरते हुए दक्षिण-पूर्व दिशा की तरफ पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसके अलावा उत्तर हरियाणा के पास सतह से डेढ़ किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। वहीं दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के वायुमंडल में साढ़े चार से लेकर लगभग छह किलोमीटर की ऊंचाई के बीच एक पश्चिमी विक्षोभ भी चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। इन सभी मौसमी गतिविधियों के कारण आने वाले दिनों में राजस्थान का मौसम काफी हद तक प्रभावित हो सकता है।

मौसम अपडेट पर नजर रखना क्यों है जरूरी

चूंकि मौसम प्रणालियों की दिशा और उनकी ताकत में लगातार बदलाव हो रहा है, इसलिए बारिश के क्षेत्र और समय में भी फेरबदल संभव है। कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग ने किसानों और आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे पल-पल बदलते स्थानीय मौसम अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें ताकि किसी भी अचानक बदलाव के लिए तैयार रहा जा सके।

सवाल-जवाब

10 सितंबर को राजस्थान में मौसम का मिजाज कैसा रहेगा?
10 सितंबर को राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य तौर पर शुष्क रहने और किसी बड़ी बारिश के नहीं होने की संभावना है।
राज्य में सबसे अधिक तापमान कहां दर्ज किया गया?
श्रीगंगानगर में राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
राजस्थान में बारिश का नया दौर कब से शुरू हो सकता है?
बंगाल की खाड़ी में संभावित कम दबाव के क्षेत्र के असर से 11 सितंबर से पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश शुरू हो सकती है।
किन संभागों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है?
13 और 14 सितंबर को कोटा संभाग और उसके आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश होने के आसार हैं।
पश्चिमी राजस्थान में बारिश को लेकर क्या अनुमान है?
जोधपुर और बीकानेर संभाग के जिलों में 13 से 15 सितंबर के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की और छुटपुट बारिश हो सकती है।
वर्तमान में मानसून ट्रफ कहां से गुजर रही है?
मानसून ट्रफ इस समय जम्मू से लेकर देहरादून, पंतनगर, बाराबंकी, डेहरी, पुरुलिया और दीघा से होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 मिनट पहले

मानसून की इस सुस्ती और आगामी कम दबाव के क्षेत्र के बीच, मौसम में बदलाव के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के मोर्चे पर सतर्क रहना जरूरी होगा। विशेष रूप से जब 11 से 15 सितंबर के दौरान पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश और संभावित जलभराव की चेतावनी दी गई है, तब जिला प्रशासन और कानून-व्यवस्था एजेंसियों को निचले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता होगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

मानसूनी प्रणालियों के इस दौर में प्रशासनिक समन्वय और कृषि क्षेत्र पर इसके दूरगामी प्रभावों का आंकलन करना बेहद आवश्यक हो गया है। चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के वायुमंडल में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण तथा पश्चिमी विक्षोभ इस पूरे तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसे में पड़ोसी राज्यों में हो रहे इन मौसमी बदलावों का असर सीमावर्ती क्षेत्रों के कृषि प्रबंधन और स्थानीय यातायात पर भी पड़ सकता है। प्रशासन को जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों में पूर्व तैयारी पुख्ता रखनी होगी ताकि जनजीवन बाधित न हो।

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