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नेपाल में अचानक आई सौ फीट ऊंची बाढ़, चम्पारण के सलमान ने सुनाई आंखों देखी तबाहीभारत
29 अग॰ 2026, 8:52 pm (32 दिन पहले)· 2

नेपाल में अचानक आई सौ फीट ऊंची बाढ़, चम्पारण के सलमान ने सुनाई आंखों देखी तबाही

तिब्बत से नेपाल तक आई भीषण तबाही में पश्चिम चम्पारण के कई मजदूर लापता हो गए हैं, जबकि सुरक्षित लौटे सलमान ने सौ फीट ऊंचे सैलाब का डरावना मंजर बयां किया है।

पश्चिम चम्पारण के कई परिवारों पर तिब्बत से उठी प्राकृतिक आपदा और नेपाल में मचे हाहाकार ने गहरा संकट ला दिया है। इस आपदा की चपेट में आने से बिहार के कई श्रमिकों की जान पर बन आई है, और पश्चिम चम्पारण ज़िले से रोजी-रोटी की तलाश में नेपाल गए लगभग सात लोगों में से तीन अभी भी लापता हैं। हालांकि, प्रशासन और राहत दलों की मदद से चार लोगों को सुरक्षित बचाकर उनके घर वापस लाया जा चुका है, जो चनपटिया और रामनगर प्रखंड के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

रोजगार की तलाश और नेपाल का सफर

चनपटिया के तुरहापट्टी टोला के वार्ड नंबर 01 के रहने वाले नेयाज मियां के अनुसार, उनके गांव से लगभग छह लोग नेपाल के रसुवा समेत अन्य जिलों में मजदूरी करने गए थे। इस समूह में उनके बड़े भाई अरमान मियां, पड़ोसी मुख्तार अंसारी और समीर अंसारी शामिल थे, जो घटना से महज पंद्रह दिन पहले ही नेपाल के लिए निकले थे। इस बार अरमान अपने बड़े बेटे सलमान और उसके दोस्त जब्बरुल आलम को भी अपने साथ काम पर ले गए थे ताकि वे भी कुछ कमाई कर सकें।

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वह भयानक सुबह और टला हुआ हादसा

नेयाज, अरमान, सलमान और जब्बरुल नेपाल के रसुवा जिले के धुंचे इलाके में डेरा डाले हुए थे, जबकि बाकी अन्य लोग दूसरे जिलों में ठहरे हुए थे। हादसे वाले दिन यानी बुधवार 26 अगस्त को सुबह सवेरे सलमान के पिता हमेशा की तरह अपने काम पर निकलने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने अपने बेटे सलमान और उसके दोस्त जब्बरुल को भी साथ चलने के लिए कहा था, लेकिन सलमान के सिर में तेज दर्द हो रहा था जिसके कारण उसने जाने से मना कर दिया। पिता ने सलमान को अकेला न छोड़ने के ख्याल से उसके दोस्त जब्बरुल को भी उसकी देखभाल के लिए कमरे पर ही रुकने के लिए कह दिया।

सौ फीट ऊंचा सैलाब और जान बचाकर भागना

सलमान के बताए अनुसार, पिता के काम पर निकलने के महज एक से दो घंटे के भीतर ही बाहर से एक अत्यंत भीषण और डरावनी आवाज गूंज उठी, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को सहमा दिया। जब उन्होंने बाहर निकलकर देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि सामने करीब एक सौ फीट ऊंचा पानी का सैलाब सब कुछ अपने आगोश में लेते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा था। इस भयानक तबाही के मंजर को देखते ही सलमान और उसका दोस्त अपनी जान बचाने के लिए उसी हालत में बाहर की तरफ भागे और किसी तरह दौड़कर एक ऊंचे स्थान पर जा पहुंचे। कुछ ही देर में सलमान के चाचा नेयाज और अन्य लोग भी वहां पहुंच गए और हालात का जायजा लेने लगे।

रेस्क्यू अभियान और घर वापसी

जलस्तर कम होने और स्थिति थोड़ी सामान्य होने के बाद सभी ने सलमान के पिता और उनके साथ गए अन्य साथियों की तलाश शुरू की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। मौके पर पहुंची राहत और बचाव टीम ने सभी को ढांढस बंधाया और हेलीकॉप्टर के जरिए उन्हें धुंचे आर्मी कैंप तक पहुंचाया। वहां राहत सामग्री और भोजन-पानी मिलने के बाद उन्हें त्रिशूली के उनवा कोट स्थित आर्मी कैंप में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद निजी वाहनों से काठमांडू के रास्ते उन्हें वीरगंज और रक्सौल लाया गया, जहां से ट्रेन पकड़कर वे सभी सुरक्षित बेतिया पहुंचे।

सवाल-जवाब

यह प्राकृतिक आपदा कहां और कब आई?
यह आपदा बुधवार 26 अगस्त को तिब्बत से उठी और नेपाल के रसुवा जिले के धुंचे क्षेत्र को अपनी चपेट में लिया।
पश्चिम चम्पारण से कितने लोग नेपाल गए थे?
पश्चिम चम्पारण से करीब सात लोग मजदूरी के सिलसिले में नेपाल गए थे।
कितने लोग लापता हैं और कितने सुरक्षित लौटे?
इस आपदा में तीन लोग लापता हो गए हैं, जबकि चार लोगों को सुरक्षित बचाकर घर वापस लाया गया है।
सलमान की जान कैसे बची?
सिर में तेज दर्द होने के कारण सलमान अपने पिता के साथ काम पर नहीं गया था, जिससे वह उस जगह पर नहीं था जहां सैलाब का सबसे ज्यादा असर हुआ।
सुरक्षित लौटे मजदूरों को किस रास्ते से लाया गया?
सुरक्षित बचाए गए लोगों को हेलीकॉप्टर से धुंचे आर्मी कैंप और फिर त्रिशूली के उनवा कोट आर्मी कैंप से काठमांडू होते हुए रक्सौल लाया गया।
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