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पूर्णिया के गुल्लू दा का अनूठा जलरंग चित्र, 12 रंगों से उकेरा पीएम मोदी और भगवान विश्वकर्मा का संगमबिहार
16 सित॰ 2026, 5:03 pm (31 मिनट पहले)· 0

पूर्णिया के गुल्लू दा का अनूठा जलरंग चित्र, 12 रंगों से उकेरा पीएम मोदी और भगवान विश्वकर्मा का संगम

पूर्णिया के चित्रकार किशोर कुमार राय उर्फ गुल्लू दा ने 12 जलरंगों के मेल से तीन दिनों की मेहनत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर एक आकर्षक पेंटिंग बनाई है।

बिहार के पूर्णिया जिले के प्रसिद्ध चित्रकार किशोर कुमार राय, जिन्हें लोग प्यार से गुल्लू दा कहते हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर एक विशेष कलाकृति बनाई है। उन्होंने अपने चित्र में धार्मिक और राष्ट्रीय चेतना को एक साथ पिरोने की कोशिश की है। यह पेंटिंग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर खूब सराही जा रही है।

भगवान विश्वकर्मा और भारत के मानचित्र की अनूठी परिकल्पना

गुल्लू दा की इस पेंटिंग का मुख्य विषय 17 सितंबर की तारीख से जुड़ा है। दरअसल इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन होता है और उसी दिन विश्वकर्मा पूजा का पर्व भी मनाया गया। इस विशेष संयोग से प्रेरित होकर कलाकार ने एक अद्वितीय कैनवास तैयार किया। चित्र में शिल्प और सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा को हाथी पर सवार दिखाया गया है। वे भारत के मानचित्र के ऊपर सुनहरे अक्षरों में 'हैप्पी बर्थडे टू पीएम मोदी जी' लिखते हुए नजर आ रहे हैं।

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12 रंगों का संयोजन और तीन दिनों का अनवरत परिश्रम

इस मनमोहक पेंटिंग को तैयार करने के लिए चित्रकार ने जलरंगों (वाटर कलर) की तकनीक अपनाई। उन्होंने 12 अलग-अलग रंगों का सटीक मिश्रण तैयार किया ताकि चित्र में जीवंतता आ सके। इस कलाकृति को पूरा करने में गुल्लू दा को लगातार तीन दिनों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी। बारीकियों पर ध्यान देते हुए उन्होंने हर एक रंग और रेखा को बड़ी ही सावधानी से उकेरा है।

'विकसित भारत' के संकल्प और प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान

अपनी इस रचना के पीछे की भावना व्यक्त करते हुए गुल्लू दा ने बताया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनके काम करने की शैली से काफी प्रभावित हैं। वे देश को आगे ले जाने वाले 'विकसित भारत' के संकल्प को बहुत बड़ा कदम मानते हैं। उनके अनुसार, निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा के पर्व और देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिवस का एक ही दिन पड़ना अत्यंत शुभ माना जाना चाहिए। इसी पवित्र भाव को उन्होंने रंगों के माध्यम से दुनिया के सामने रखा है।

सोशल मीडिया पर खूब मिल रही सराहना

कलाकृति का निर्माण पूरा होने के बाद जब इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आईं, तो लोगों ने इस पर खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ देश भर के कला प्रेमियों और प्रधानमंत्री के प्रशंसकों ने गुल्लू दा की रचनात्मक सोच, लगन और तीन दिनों की तपस्या की जमकर तारीफ की। पूर्णिया में अब इस पेंटिंग को कला और सम्मान के सुंदर संगम के रूप में देखा जा रहा है।

सवाल-जवाब

पूर्णिया के किस कलाकार ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर पेंटिंग बनाई?
पूर्णिया के प्रसिद्ध चित्रकार किशोर कुमार राय, जिन्हें गुल्लू दा के नाम से जाना जाता है, ने यह पेंटिंग बनाई।
पेंटिंग बनाने में कितने रंगों और समय का उपयोग किया गया?
इस पेंटिंग को तैयार करने में 12 अलग-अलग जलरंगों का उपयोग किया गया और इसे पूरा करने में 3 दिन का समय लगा।
पेंटिंग में मुख्य रूप से क्या दर्शाया गया है?
पेंटिंग में भगवान विश्वकर्मा को हाथी पर सवार दिखाया गया है, जो भारत के मानचित्र पर सुनहरे अक्षरों से 'Happy Birthday to PM Modi Ji' लिख रहे हैं।
कलाकार ने इस थीम को क्यों चुना?
17 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी का जन्मदिन और विश्वकर्मा पूजा एक ही दिन पड़ने के शुभ संयोग से प्रेरित होकर कलाकार ने यह थीम चुनी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·12 मिनट पहले

छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के स्थानीय कलाकार अक्सर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श और 'विकसित भारत' जैसे संकल्पों को अपनी कला के जरिए जनमानस तक पहुँचाने का काम करते हैं। विश्वकर्मा पूजा और प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के इस अनूठे जुड़ाव को जलरंगों में पिरोना यह दर्शाता है कि कैसे क्षेत्रीय स्तर पर सांस्कृतिक परंपराओं का उपयोग राष्ट्रीय विकास के आख्यान से जुड़ने के लिए किया जा रहा है। जन-आकांक्षाओं और कला के इस तरह के संगम से यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर राष्ट्रीय अभियानों की स्वीकार्यता बढ़ रही है, जो क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक चेतना के नए आयाम प्रस्तुत करती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह देखना महत्वपूर्ण है कि स्थानीय स्तर पर कलात्मक और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। पूर्णिया जैसे क्षेत्रों में जब नागरिक और युवा रचनात्मक माध्यमों से सकारात्मक चेतना में अपनी सहभागिता दिखाते हैं, तो इससे सामुदायिक तनाव घटता है और असामाजिक प्रवृत्तियों पर अंकुश लगता है। कानून और न्याय व्यवस्था के लिए ऐसी शांतिपूर्ण नागरिक भागीदारी जन-सुरक्षा बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होती है।

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