बिहार के पूर्णिया जिले के प्रसिद्ध चित्रकार किशोर कुमार राय, जिन्हें लोग प्यार से गुल्लू दा कहते हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर एक विशेष कलाकृति बनाई है। उन्होंने अपने चित्र में धार्मिक और राष्ट्रीय चेतना को एक साथ पिरोने की कोशिश की है। यह पेंटिंग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर खूब सराही जा रही है।
भगवान विश्वकर्मा और भारत के मानचित्र की अनूठी परिकल्पना
गुल्लू दा की इस पेंटिंग का मुख्य विषय 17 सितंबर की तारीख से जुड़ा है। दरअसल इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन होता है और उसी दिन विश्वकर्मा पूजा का पर्व भी मनाया गया। इस विशेष संयोग से प्रेरित होकर कलाकार ने एक अद्वितीय कैनवास तैयार किया। चित्र में शिल्प और सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा को हाथी पर सवार दिखाया गया है। वे भारत के मानचित्र के ऊपर सुनहरे अक्षरों में 'हैप्पी बर्थडे टू पीएम मोदी जी' लिखते हुए नजर आ रहे हैं।
12 रंगों का संयोजन और तीन दिनों का अनवरत परिश्रम
इस मनमोहक पेंटिंग को तैयार करने के लिए चित्रकार ने जलरंगों (वाटर कलर) की तकनीक अपनाई। उन्होंने 12 अलग-अलग रंगों का सटीक मिश्रण तैयार किया ताकि चित्र में जीवंतता आ सके। इस कलाकृति को पूरा करने में गुल्लू दा को लगातार तीन दिनों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी। बारीकियों पर ध्यान देते हुए उन्होंने हर एक रंग और रेखा को बड़ी ही सावधानी से उकेरा है।
'विकसित भारत' के संकल्प और प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान
अपनी इस रचना के पीछे की भावना व्यक्त करते हुए गुल्लू दा ने बताया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनके काम करने की शैली से काफी प्रभावित हैं। वे देश को आगे ले जाने वाले 'विकसित भारत' के संकल्प को बहुत बड़ा कदम मानते हैं। उनके अनुसार, निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा के पर्व और देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिवस का एक ही दिन पड़ना अत्यंत शुभ माना जाना चाहिए। इसी पवित्र भाव को उन्होंने रंगों के माध्यम से दुनिया के सामने रखा है।
सोशल मीडिया पर खूब मिल रही सराहना
कलाकृति का निर्माण पूरा होने के बाद जब इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आईं, तो लोगों ने इस पर खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ देश भर के कला प्रेमियों और प्रधानमंत्री के प्रशंसकों ने गुल्लू दा की रचनात्मक सोच, लगन और तीन दिनों की तपस्या की जमकर तारीफ की। पूर्णिया में अब इस पेंटिंग को कला और सम्मान के सुंदर संगम के रूप में देखा जा रहा है।





















